उधारदाताओं के लिए उचित व्यवहार संहिता पर दिशानिर्देश - ऋण करार की प्रतिलिपि देना
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आरबीआइ/2007-08/119 22 अगस्त 2007 सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक /अखिल भारतीय वित्तीय संस्था महोदय उधारदाताओं के लिए उचित व्यवहार संहिता पर दिशानिर्देश - ऋण करार की प्रतिलिपि देना
कृपया 5 मई 2003 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. एलईजी सं. बीसी. 104/09.07.007/2002-03 देखें जिसमें उधारदाताओं के लिए उचित व्यवहार संहिता को निर्धारित करनेवाले दिशानिर्देश बैंकों /वित्तीय संस्थाओं को जारी किए गए थे। 2. उपर्युक्त परिपत्र के पैरा 2 (ii)(ग) के अनुसार, बैंकों /वित्तीय संस्थाओं को सूचित किया गया था कि उधारकर्ता तथा ऋणदात्री संस्था के बीच वार्ता के बाद निर्धारित शर्तों और अन्य चेतावनी, जो बैंकों/वित्तीय संस्थाओं द्वारा दी जानेवाली ऋण सुविधाओं पर लागू होंगी, को लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए और प्राधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत् प्रमाणित किया जाना चाहिए। बैंकों /वित्तीय संस्थाओं को साथ में यह भी सूचित किया गया था कि ऋण करार में उल्लिखित सभी अनुलग्नकों की एक-एक प्रति सहित ऋण करार की प्रतिलिपि उधारकर्ता को दी जाए। 3. हमें यह पता चला है कि कुछ बैंक, उधारकर्ताओं द्वारा ऐसा अनुरोध किए जाने के पश्चात् ही ऋण करार की प्रतिलिपि उन्हें देते हैं। इस संबंध में हम सूचित करते हैं कि ऋण करार अथवा ऋण करार में उल्लिखित अनुलग्नकों की प्रतिलिपि नहीं देना एक अनुचित व्यवहार है और इससे ऋण प्रदान करने की शर्तों के संबंध में बैंक तथा उधारकर्ता के बीच विवाद हो सकते हैं।
4. अत: बैंकों /वित्तीय संस्थाओं को सूचित किया जाता है कि ऋण की मंजूरी /वितरण के समय सभी उधारकर्ताओं को ऋण करार की तथा ऋण करार में उल्लिखित सभी अनुलग्नकों की एक-एक प्रतिलिपि अनिवार्यत: दें। भवदीय
(प्रशांत सरन) |
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