केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के लिए बैंकों के एक्सपोजर हेतु पूंजी अपेक्षाएं
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आरबीआई/2013-14/113 2 जुलाई 2013 अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी महोदय/महोदया केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के लिए बैंकों के एक्सपोजर हेतु पूंजी अपेक्षाएं कृपया 3 मई 2013 को घोषित मौद्रिक नीति वक्तव्य 2013-14 का पैरा 77 (उद्धरण संलग्न) देखें। उक्त पैरा में यह इंगित किया गया था कि बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासल समिति के अंतरिम ढांचे पर आधारित, केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के प्रति बैंकों के एक्सपोजर हेतु पूंजी अपेक्षाओं पर आधारित अंतिम दिशानिर्देश जून 2013 के अंत तक जारी किए जाएंगे। 2. केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के प्रति बैंक के एक्सपोजर के लिए पूंजी अपेक्षाओं पर अंतिम दिशानिर्देश अनुबंध. के रूप में संलग्न है। ये अनुदेश 1 जनवरी 2014 से लागू होंगे। भवदीय (चंदन सिन्हा)) संलग्नकः यथोक्त मौद्रिक नीति वक्तव्य 2013-14 से पैराग्राफ 77 का उद्धरण 77. दूसरी तिमाही समीक्षा में की गई घोषणा के अनुसार, (i) पूंजी प्रकटीकरण आवश्यकताओं की संरचना और (ii) केंद्रीय प्रतिपक्षकारों में बैंकों के एक्सपोज़र के लिए पूंजी आवश्यकताओं पर ड्राफ्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। यह प्रस्तावित है कि: • पूंजी प्रकटीकरण आवश्यकताओं की संरचना पर अंतिम दिशा-निर्देश मई 2013 के अंत तक जारी कर दिए जाएं; और • केंद्रीय प्रतिपक्षकारों को बैंकों के एक्सपोजर के लिए पूंजी आवश्यकताओं पर अंतिम दिशा-निर्देश जून 2013 के अंत तक जारी कर दिए जाएं। केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के लिए बैंक के एक्सपोजर हेतु पूंजी अपेक्षाएं I. पृष्ठभूमि (क) केंद्रीकृत समाशोधन एक संस्था की समस्याओं को दूसरी संस्था में जाने/संक्रमित करने के जोखिम को कम कर देता है जिससे प्रणालीगत जोखिम कम हो जाता है। तथापि, केंद्रीकृत समाशोधन केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के मध्य अत्यधिक जोखिम संकेंद्रित कर देता है और एक केंद्रीय प्रतिपक्ष (सीसीपी) की असफलता संपूर्ण वित्तीय प्रणाली के लिए विप्लवकारी साबित हो सकती है। इसके मद्देनजर, बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासल समिति ने सीसीपी के प्रति बैंकों के एक्सपोजर के पंजीकरण के लिए एक अंतरिम ढांचा निर्मित1 किया है जिससे सीसीपी के कड़े विनियमन एवं पर्यवेक्षण को प्रोत्साहन मिलता है तथा सीसीपी के भीतर जोखिम प्रबंधन के उच्च मानकों को भी प्रोत्साहन मिलता है। इस ढांचे के अंतर्गत, सीसीपी के प्रति बैंकों के ओटीसी डेरिवेटिव से उत्पन्न होने वाले एक्सपोजर, शेयर बाजार में व्यापार किए जाने वाले डेरिवेटिव तथा प्रतिभूति वित्तपोषण लेनदेनों (एसएफटी) से उत्पन्न एक्सपोजर को प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम के लिए पूंजी अपेक्षाओं के अधीन किया जाएगा। (ख) तदनुसार केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के लिए बैंकों के एक्सपोजर के लिए पूंजी अपेक्षाओं पर दिशानिर्देशों को भारत में अंतरिम ढांचे 2 के रूप में शुरू किया जा रहा है जिसके लिए 1 जुलाई 2013 के मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 2/21.06.201/2013-14 द्वारा जारी बासल III पूंजी विनियमन पर मास्टर परिपत्र में वृद्धि/संशोधन किए गए हैं। तथापि, ये दिशानिर्देश 1 जनवरी 2014 से लागू किए जाएंगे। (ग) वर्तमान में, पूंजी पर्याप्तता के उद्देश्य हेतु केंद्रीय प्रतिपक्षकारों में एक्सपोजरों का ट्रीटमेंट निम्नवत हैः
(घ) इन दिशानिर्देशों में प्रयुक्त पदों को स्पष्ट करने के लिए बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 2/21.06.201/2013-14) के पैरा 5.15.3.3 में कुछ परिभाषाएं जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त, बासल III पूंजी विनियमों और क्रेडिट जोखिम के लिए पूंजी प्रभार की गणना हेतु आंतरिक रेटिंग आधारित (आईआरबी) दृष्टिकोणों के क्रियान्वयन पर दिशानिर्देशों (22 दिसंबर 2011 का परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 67/21.06.202/2011-12) में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन (विलोपन/संशोधन) आवश्यक हो गए हैं। कृपया परिवर्तनों के लिए इन दिशानिर्देशों का परिशिष्ट l देखें। II. केंद्रीय प्रतिपक्षकारों (सीसीपी) में एक्सपोजर के लिए पूंजी अपेक्षाएं बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 2/21.06.201/2013-14) में निम्नलिखित पैराग्राफ (अर्थात् 5.15.3.8 से 5.15.3.10) जोड़े जाएंगे। 5.15.3.8 लागू होने का दायरा (i) ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेनों, शेयर बाजार में व्यापार किए जाने वाले डेरिवेटिव लेनदेनों तथा प्रतिभूतियों के वित्तपोषण वाले लेनदेनों से उत्पन्न केंद्रीय प्रतिपक्षकार के प्रति एक्सपोजर, नीचे पैराग्राफ में इंगित किए गए अनुसार प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम ट्रीटमेंट के अधीन होंगे। (ii) जब किसी एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव लेनदेन का क्लीयरिंग मेम्बर-टू-क्लाइंट लेग किसी द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत किया जाता है तो क्लाइंट बैंक और क्लीयरिंग मेम्बर दोनों उस लेनदेन का पूंजीकरण किसी ओटीसी डेरिवेटिव के रूप में करेंगे। (iii) पूंजी पर्याप्तता ढांचा के उद्देश्य हेतु, सीसीपी को वित्तीय संस्था माना जाएगा। तदनुसार, सीसीपी की पूंजी में किसी बैंक का निवेश बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 2/21.06.201/2013-14) के पैरा 4.4.9 के अनुसार संचालित होगा। (iv) पूंजी अपेक्षाएं सीसीपी की प्रकृति अर्थात् क्वालीफाइंग सीसीपी (क्यूसीसीपी) और गैर-क्वलीफाइंग सीसीपी पर आधारित रहेंगी। क्वालीफाइंग सीसीपी को भाग कः परिशिष्ट l में पैरा 5.15.3.3 में वृद्धिके अंतर्गत परिभाषित किया गया है। (क) चाहे कोई सीसीपी क्यूसीसीपी के रूप में वर्गीकृत हो अथवा नहीं, बैंक के पास यह सुनिश्चित करने का दायित्व कायम रहता है कि वह अपने एक्सपोजर के लिए समुचित पूंजी बनाए रखे। पिलर 2 के अंतर्गत, बैंक को यह विचार करना चाहिए कि यदि, उदाहरण के लिए (i) सीसीपी से उसके लेनदेन के कारण अधिक जोखिमपूर्ण एक्सपोजर में वृद्धि होती है अथवा (ii) जहां किसी बैंक के लेनदेन से यह अस्पष्ट है कि सीसीपी क्यूसीसीपी की परिभाषा को पूरा करता है या नहीं, तो क्या उसे न्यूनतम पूंजी अपेक्षाओं के अतिरिक्त पूंजी धारण करने की आवश्यकता पड़ सकती है। (ख) यदि भारतीय रिज़र्व बैंक की दृष्टि में ऐसा करना जरूरी हो तो बैंकों से अपेक्षा हो सकती है कि वे पिलर 2 के जरिए क्यूसीसीपी के प्रति अपने एक्सपोजर के लिए अतिरिक्त पूंजी धारण करें। उदाहरण के लिए इसे तब उचित माना जा सकता है जब अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा कोष/विश्व बैंक के किसी वित्तीय क्षेत्र मूल्यांकन कार्यक्रम (एफएसएपी) ने सीसीपी या सीसीपी के विनियमन में महत्वपूर्ण खामियां पायी हों और उस सीसीपी और/अथवा सीसीपी विनियामक ने उसके बाद से चिन्हित किए गए मुद्दों को सार्वजनिक रूप से न निपटाया हो। (ग) जहां बैंक एक समाशोधन सदस्य के रूप में कार्य कर रहा हो, तो बैंक को परिदृश्य विश्लेषण (सीनारिओ एनालिसिस) तथा दबाव परीक्षण (स्ट्रेस टेस्टिंग) द्वारा यह मूल्यांकन कर लेना चाहिए कि किसी सीसीपी के एक्सपोजर के लिए धारित पूंजी का स्तर इन लेनदेनों में अंतर्निहित जोखिमों को समुचित रूप से कवर करता है या नहीं। इस मूल्यांकन में डिफाल्ट फंड प्रतिबद्धताओं पर भावी आहरणों के कारण तथा/अथवा किसी अन्य समाशोधन सदस्य के ग्राहकों से प्रतितुलनकारी लेनदेनों को अधिग्रहीत करने या प्रतिस्थापित करने की गौण प्रतिबद्धताओं से, यदि यह समाशोधन सदस्य डिफाल्ट करे या दिवालिया हो जाए, उत्पन्न संभावित भावी या आकस्मिक एक्सपोजर को शामिल किया जाना चाहिए। (घ) बैंक के लिए यह आवश्यक है कि वह, सीसीपी के जरिये क्रय-विक्रय करने से उत्पन्न एक्सपोजरों तथा डिफाल्ट फंड जैसी सीसीपी सदस्यता दायित्व से उत्पन्न एक्सपोजरों के अतिरिक्त, सीसीपी के प्रति अपने सभी एक्सपोजर को मानीटर करे तथा नियमित आधार पर (तिमाही या और बारंबारी अंतरालों पर) बोर्ड की समुचित समिति (उदाहरण के लिए जोखिम प्रबंधन समिति) और वरिष्ठ प्रबंधन को रिपोर्ट करे। (ङ) जब तक भारतीय रिज़र्व बैंक (डीबीओडी) की अपेक्षा अन्यथा न हो, पूर्ववर्ती क्यूसीसीपी के साथ लेनदेन के लिए उसी तरह पूंजीकरण किया जाना चाहिए मानो जब से वह क्यूसीसीपी के रूप में क्वालीफाई न हुआ हो उस तिथि से अधिकतम 3 माह की अवधि के लिए उसे क्यूसीसीपी ही माना गया है। इस समय के बाद, ऐसे केंद्रीय प्रतिपक्ष के साथ बैंक के एक्सपोजर पर गैर-क्यूसीसीपी के लिए लागू नियमों के अनुसार पूंजीकरण किया जाना चाहिए। 5.15.3.9 क्वालीफाइंग सीसीपी (क्यूसीसीपी) के प्रति एक्सपोजर (i) व्यापार एक्सपोजर क्यूसीसीपी के प्रति समाशोधन सदस्य के एक्सपोजर (क) जहां कोई बैंक स्वयं के उद्देश्यों के लिए किसी क्यूसीसीपी के एक समाशोधन सदस्य के रूप में कार्य करता है तो ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेनों, शेयर बाजार में क्रय-विक्रय किए जाने वाले डेरिवेटिव लेनदेनों तथा एसएफटी के संबंध में क्यूसीसीपी के प्रति बैंक के एक्सपोजर के लिए 2% का जोखिम भार अवश्य लगाया जाना चाहिए। (ख) ऐसे व्यापार एक्सपोजर के लिए एक्सपोजर की राशि की गणना रिपो/रिवर्स रिपो शैली के लेनदेनों3 के लिए पूंजी पर्याप्तता हेतु यथालागू नियमों और डेरिवेटिव के लिए मौजूदा एक्सपोजर पद्धति (सीईएम) के अनुसार की जाएगी। (ग) जहां डिफाल्ट की स्थिति में निवल आधार पर निपटान विधिक रूप से प्रवर्तनीय है, इस बात की परवाह किए बिना कि प्रतिपक्षकारदिवालिया या शोधक्षम है, व्यापार एक्सपोजर निर्धारण से संबंधित सभी संविदाओं की कुल प्रतिस्थापन लागत की गणना निवल प्रतिस्थापन लागत के रूप में तब की जा सकती है यदि लागू क्लोज आउट निवल समुच्चय इन दिशानिर्देशों के परिशिष्ट 2 में दी गई अपेक्षाओं को पूरा करते हों तो। (घ) बैंकों को दर्शाना होगा कि, जहां तक क्यूसीसीपी के प्रति एक्सपोजर की नेटिंग की विधिक निश्चितता का संबंध है, स्वतंत्र और तर्कपूर्ण विधिक राय प्राप्त करके परिशिष्ट 2 में उल्लिखित शर्तें नियमित आधार पर पूरी की जाती हैं। बैंक क्यूसीसीपी से उनकी महत्वपूर्ण गतिविधियों जैसे अंतिम निपटान निर्धारण) निपटान निर्धारण, नेटिंग, (मार्जिन व्यवस्थाओं सहित) संपार्श्विक व्यवस्थाओं, डिफाल्ट प्रक्रियाओं इत्यादि की विधिक निश्चितता पर संबंधित क्यूसीसीपी द्वारा ली गई विधिक राय भी प्राप्त कर सकते हैं। ग्राहकों के प्रति समाशोधन सदस्य के एक्सपोजर समाशोधन सदस्य सदैव ग्राहकों के प्रति (संभावित सीवीए4 जोखिम सहित) अपने एक्सपोजर के द्विपक्षीय व्यापार के रूप में पूंजीकरण करेगा चाहे समाशोधन सदस्य व्यापार की गारंटी देता हो अथवा ग्राहक और क्यूसीसीपी के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता हो। तथापि, समाशोधित लेनदेनों के लिए लघुतर क्लोज आउट अवधि को चिन्हित करने के लिए समाशोधन सदस्य एक ऐसे स्केलर से ईएडीइ में गुणा करके जो 0.71 से कम न हो अपने ग्राहकों के प्रति एक्सपोजर का पूंजीकरण कर सकते हैं।समाशोधन सदस्य के प्रति ग्राहक बैंक के एक्सपोजर I. जहां कोई बैंक किसी समाशोधन सदस्य का ग्राहक है तथा वित्तीय मध्यस्थ के रूप में कार्य करने वाले समाशोधन सदस्य के साथ कोई लेनदेन करता है (अर्थात् समाशोधन सदस्य किसी क्यूसीसीपी के साथ कोई प्रतितुलनकारी लेनदेन पूरा करता है), समाशोधन सदस्य के प्रति ग्राहक के एक्सपोजर को इस खंड के (ऊपर उल्लिखित) ‘सीसीपी के प्रति क्लीयरिंग मेम्बर का एक्सपोजर’ पैरा पर लागू ट्रीटमेंट प्राप्त होगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी हों: (a) क्यूसीसीपी द्वारा प्रतितुलनकारी लेनदेनों की पहचान ग्राहक लेनदेनों के रूप में की जाती है तथा उनका समर्थन करने के लिए क्यूसीसीपी द्वारा और/अथवा सदस्य द्वारा ऐसी व्यवस्थाओं के अंतर्गत यथालागू संपार्श्विक धारण किया जाता है जो ग्राहक को
ग्राहक बैंक को अवश्य ही एक स्वतंत्र, लिखित और तर्कपूर्ण विधिक राय प्राप्त करनी चाहिए जिसका निष्कर्ष यह हो कि, विधिक चुनौती की स्थिति में, संबंधित अदालतें और प्रशासनिक अधिकरण पाएंगे कि संबंधित कानून के अंतर्गत किसी मध्यस्थ के दिवालिएपन के कारण ग्राहक किसी प्रकार की हानि नहीं होगी। इन कानूनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
(ख) संबंधित कानूनों, विनियमों, नियमों, संविदात्मक अथवा प्रशासकीय व्यवस्थाओं में प्रावधान किया गया है कि डिफाल्ट कर चुके या दिवालिया हो चुके समाशोधन सदस्य के साथ प्रतितुलनकारी लेनदेनों की अधिक संभावना है कि उनका लेनदेन समाशोधन सदस्य के डिफाल्ट करने या दिवालिया होने की स्थिति में अप्रत्यक्ष रूप से क्यूसीसीपी के माध्यम से किया जाता रहे। ऐसी परिस्थितियों में, ग्राहक पोजीशन और क्यूसीसीपी के साथ संपार्श्विक को बाजार मूल्य पर अंतरित कर दिया जाएगा जब तक कि ग्राहक बाजार मूल्य पर पोजीशन को क्लोज आउट करने का अनुरोध नहीं करता है। इस संदर्भ में, यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि संबंधित कानून, नियम, संविदात्मक या प्रशासकीय करार यह प्रावधान करते हैं कि क्रय-विक्रय के अंतरित किए जाने की पूरी संभावना है, तो यह माना जा सकता है कि यह शर्त पूरी हो गयी है। यदि क्यूसीसीपी पर अंतरित किए जाने का स्पष्ट पूर्व इतिहास है तथा प्रतिभागियों का इरादा इस प्रथा को जारी रखने का है, तो यह मूल्यांकन करते समय कि क्रय-विक्रय के अंतरित किए जाने की अत्यधिक संभावना है, इन कारकों पर विचार किया जाना चाहिए। यह तथ्य कि क्यूसीसीपी दस्तावेजीकरण ग्राहक क्रय-विक्रय को अंतरित किए जाने से मना नहीं करता है यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि उनके अंतरित किए जाने की प्रबल संभावना है। अन्य प्रमाण जैसे कि इस पैरा में उल्लिखित मानदंड यह दावा करने के लिए आवश्यक हैं। II. जहां ऐसा हो कि ग्राहक हानियों से सुरक्षित नहीं हैं क्योंकि समाशोधन सदस्य और समाशोधन सदस्य का एक और सदस्य संयुक्त रूप से डिफाल्ट करते हैं अथवा दिवालिया हो जाते हैं, किंतु ऊपर उल्लिखित सभी अन्य शर्तें पूरी होती हैं तथा संबंधित सीसीपी एक क्यूसीसीपी है, समाशोधन सदस्य के प्रति ग्राहक के एक्सपोजर पर 4% का जोखिम भार लगाया जाएगा। III. उक्त पैरा में ग्राहक बैंक यदि अपेक्षाएं पूरी नहीं करता है, बैंक से अपेक्षित होगा कि वह द्विपक्षीय क्रय-विक्रय के रूप में समाशोधन सदस्य के प्रति संभावित सीवीए जोखिम एक्सपोजर सहित अपने एक्सपोजर का पूंजीकरण करें। IV. उन परिस्थितियों के अंतर्गत जिनमें कोई ग्राहक क्यूसीसीपी से कोई लेनदेन करता है और इसके कार्य-निष्पादन की गारंटी कोई समाशोधन सदस्य लेता है, तो पूंजी अपेक्षाएं बासल III पूंजी विनियमों पर 01 जुलाई 2013 के मास्टर परिपत्र (01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 2/21.06.201/2013-14) पर आधारित होंगी। पोस्ट किए गए संपार्श्विक का ट्रीटमेंट (क) सभी मामलों में, पोस्ट किए गए आस्तियों या संपार्श्विक को, ऐसे संपार्श्विक को पोस्ट करने वाले बैंक के दृष्टिकोण से, इस तथ्य के होते हुए भी कि इस तरह की आस्तियों को संपार्श्विक के रूप में पोस्ट किया गया है वही जोखिम भार मिलना चाहिए जो अन्यथा पूंजी पर्याप्तता ढांचे के अंतर्गत ऐसी परिसंपत्तियों या संपार्श्विक को दी जाती है। इस प्रकार बैंकिंग बही से पोस्ट किए गए संपार्श्विक को बैंकिंग बही का ट्रीटमेंट प्राप्त होगा और व्यापार बही से पोस्ट किए गए संपार्श्विक को व्यापार बही का ट्रीटमेंट प्राप्त होगा। जहां किसी समाशोधन सदस्य या ग्राहक की आस्तियां या संपार्श्विक क्यूसीसीपी अथवा समाशोधन सदस्य के साथ पोस्ट किए गए हैं तथा दिवालियापन दूरस्थ शैली में धारित नहीं किए गए हैं, तो ऐसी आस्तियों या संपार्श्विक को पोस्ट करने वाले बैंक को क्रेडिट जोखिम को भी मान्य करना चाहिए। इसका आधार ऐसी आस्तियों, संपार्श्विक को धारण करने वाली संस्था5 की साख योग्यता पर आधारित हानि के जोखिम के प्रति एक्सपोज होने वाली आस्तियां या संपार्श्विक होने चाहिए। (ख) समाशोधन सदस्य द्वारा पोस्ट किया गया (नकदी, प्रतिभूतियों, अन्य गिरवी आस्तियों, तथा अतिरिक्त आरंभिक या विचरण मार्जिन जिसे अति-संपार्श्वीकरण भी कहा जाता है, सहित) संपार्श्विक जो किसी अभिरक्षक6द्वारा धारित हो और क्यूसीसीपी से दिवालीयापन दूरस्थ हो, ऐसे दिवालियापन दूरस्थ अभिरक्षक के प्रति प्रतिपक्ष क्रेडिट जोखिम एक्सपोजर के लिए पूंजी अपेक्षा के अधीन नहीं है। (ग) किसी अभिरक्षक द्वारा धारित तथा ग्राहक द्वारा पोस्ट किया गया संपार्श्विक जो क्यूसीसीपी (समाशोधन सदस्य तथा अन्य ग्राहकों से) से दिवालियापन दूरस्थ है, वह प्रतिपक्ष क्रेडिट जोखिम के लिए पूंजी अपेक्षा के अधीन नहीं है। यदि क्यूसीसीपी पर कोई संपार्श्विक किसी ग्राहक की ओर से धारित है तथा दिवालियापन दूरस्थ आधार पर धारित नहीं है व इस खंड के पैरा ‘क्लीयरिंग मेम्बर्स के प्रति ग्राहक बैंक के एक्सपोजर’ में स्थापित शर्तें पूरी होती हैं तो संपार्श्विक पर 2% का जोखिम भार लगाया जाएगा। समाशोधन सदस्य और समाशोधन (उपर्युक्त) सदस्य के कोई अन्य ग्राहक संयुक्त रूप से डिफाल्ट करते अथवा संयुक्त रूप से दिवालिया होते हैं और उस स्थिति में ग्राहक हानियों से सुरक्षित नहीं है किंतु इस खंड के पैरा ‘क्लीयरिंग मेम्बर्स के प्रति ग्राहक बैंक के एक्सपोजर’ में वर्णित सभी अन्य शर्तें पूरी होती हैं तो 4% का जोखिम भार लगाया जाएगा। (घ) यदि कोई समाशोधन सदस्य किसी ग्राहक से ग्राहक द्वारा समाशोधित किए गए व्यापारों से संपार्श्विक एकत्र करता है तथा यह संपार्श्विक क्यूसीसीपी को सौंप दिया जाता है, तो समाशोधन सदस्य इस संपार्श्विक को क्यूसीसीपी समाशोधन सदस्य श्रृंखला तथा ग्राहक द्वारा समाशोधित किए गए व्यापार के समाशोधन सदस्य ग्राहक श्रृंखला दोनों ही के लिए गणना में शामिल कर सकता है। अतएव, ग्राहकों द्वारा समाशोधन सदस्य के लिए पोस्ट किये गये आरंभिक मार्जिन उस एक्सपोजर को समाप्त करता है जो इन ग्राहकों के प्रति समाशोधन सदस्य का होता है। (ii) क्यूसीसीपी के प्रति डिफाल्ट फंड एक्सपोजर (क) जहां कोई डिफाल्ट फंड केवल निपटान जोखिम वाले उत्पादों या कारोबार (जैसे ईक्विटी और बांड) तथा ऐसे उत्पाद या कारोबार जिनसे प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम उत्पन्न होता है अर्थात् ओटीसी डेरिवेटिव, एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव या एसएफटी, इन दोनों से मिलकर निर्मित होता है तो उस समस्त डिफाल्ट फंड के अंशदानों पर कारोबारों या उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों के बीच विभाजन न कर, नीचे दिए गए फार्मूले तथा पद्धति के अनुसार जोखिम भार लगाया जाएगा। (ख) तथापि, जहां समाशोधन सदस्यों से डिफाल्ट फंड योगदानों को उत्पादों के प्रकार के आधार पर अलग किया जाता है तथा केवल विनिर्दिष्ट उत्पाद प्रकारों के लिए सुलभ रहता है, तो नीचे दिए गए फार्मूले तथा पद्धति के अनुसार निर्धारित उन डिफाल्ट फंड एक्सपोजरों के लिए पूंजी अपेक्षाओं की गणना उस प्रत्येक विनिर्दिष्ट उत्पाद के संबंध में की जानी चाहिए जिससे प्रतिपक्ष ऋण जोखिम को बढ़ावा मिलता है। यदि क्यूसीसीपी के पूर्व में ही फंड किए गए स्वयं के संसाधन विभिन्न उत्पाद प्रकारों के बीच शेयर किये जाते हैं तो क्यूसीसीपी को इन फंडों को प्रत्येक गणना को संबंधित उत्पाद विनिर्दिष्ट एक्सपोजर अर्थात् ईएडी के अनुपात में आबंटित करना होगा। (ग) समाशोधन सदस्य बैंकों से अपेक्षित है कि वे निम्नलिखित फार्मूले का प्रयोग करके क्वालीफाइंग सीसीपी में डिफाल्ट फंड योगदानों से उत्पन्न अपने एक्सपोजरों का पूंजीकरण करें:
Min {(2% * TEi + 1111% * DFi); (20% * TEi)} के बराबर7 होती हैं, जहां; -TEi है क्यूसीसीपी के प्रति बैंक i का क्रय-विक्रय एक्सपोजर; और -DFi है क्यूसीसीपी के डिफाल्ट फंड के प्रति बैंक i का प्री-फंडेड योगदान। 5.15.3.10 गैर-क्वालीफाइंग सीसीपी के प्रति एक्सपोजर (क) बैंकों के लिए आवश्यक है कि वे गैर-क्वालीफाइंग सीसीपी8 के प्रति अपने क्रय-विक्रय एक्सपोजर के लिए प्रतिपक्ष की श्रेणी के अनुसार ऋण जोखिम के लिए मानकीकृत दृष्टिकोण प्रयोग करें। (ख) बैंकों के लिए गैर-क्वालीफाइंग सीसीपी के प्रति अपने डिफाल्ट फंड अंशदानों के लिए 1111% का जोखिम लगाना आवश्यक है। (ग) इस पैराग्राफ के उद्देश्य के लिए, यदि सीसीपी को इसकी आवश्यकता हो तो ऐसे बैंकों के डिफाल्ट फंड योगदान में फंडेड और गैर-फंडेड दोनों अंशदान भुगतान हेतु देय हैं । जहां गैर-फंडेड अंशदानों (अर्थात् असीमित बाध्यकारी प्रतिबद्धता) के लिए देयता हो वहां रिज़र्व बैंक अपने पिलर 2 मूल्यांकनों में उस गैर-फंडेड प्रतिबद्धताओं की राशि निर्धारित करेगा जिस पर 1111% का जोखिम भार लागू होना चाहिए। परिशिष्ट 1 केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के प्रति बैंक के एक्सपोजर हेतु पूंजी अपेक्षाएं – मौजूदा दिशानिर्देशों में परिवर्धन/विलोपन/संशोधन भाग कः उप-पैरा 5.15.3.3 में परिवर्तन परिभाषाएं तथा सामान्य शब्दावली (बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 2/21.06.201/2013-14).
भाग खः मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन/विलोपन बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (दिनांक 01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी.बीसी. 2/21.06.201/2013-14) तथा ऋण जोखिम के लिए पूंजी प्रभार की गणना के लिए आंतरिक रेटिंग आधारित (आईआरबी) पद्धति के क्रियान्वयन पर दिशानिर्देश (22 दिसंबर 2011 का परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी) में महत्वपूर्ण परिवर्तन अर्थात् विलोपन/संशोधन निम्नवत हैं: I. विलोपन क. सीसीपी के प्रति बैंक एक्सपोजर के लिए पूंजी अपेक्षाओं पर नए ढांचे के क्रियान्यन के फलस्वरूप बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (दिनांक 01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी.बीसी. 2/ 21.06.201/2013-14) के निम्नलिखित पैरा का विलोपन कर दिया जाएगा। 5.14.3 जैसा कि पैरा 5.15.3.4 (iii) में बताया गया है, सीसीपी में बैंकों द्वारा रखी गई जमाराशियों पर सीसीपीकी प्रकृति के अनुरूप जोखिम भार लगाया जाएगा। भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) के मामले में जोखिम भार 20 प्रतिशत होगा और अन्य सीसीपी के लिए, इन संस्थाओं को प्रदत्त रेटिंगों के अनुसार होगा। 5.15.3.4(i): सीसीपी के प्रति डेरिवेटिव ट्रेडिंग और प्रतिभूति वित्तीयन लेनदेनों (अर्थात् संपार्श्विकृत उधार लेनदेन संबंधी दायित्व सीबीएलओ, रिपो), जिनमें वे लेनदेन भी शामिल हैं जो एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव के समाधान के लिए शेयर बाजार से संबद्ध हैं, को प्रतिपक्ष जोखिम के लिए शून्य एक्सपोजर मूल्य प्रदान किया जाएगा क्योंकि यह माना जाता है किसी सीसीपी के उनके प्रतिपक्ष के प्रति एक्सपोजर दैनिक आधार पर पूरी तरह से संपार्श्विकृत किया जाता है, जिससे सीसीपी के ऋण जोखिम एक्सपोजर को सुरक्षा प्राप्त होती है। 5.15.3.4(ii) सीसीपी के साथ संपार्श्विक के रूप में दर्ज बैंक प्रतिभूतियों पर 100% का सीसीएफ लगाया जाएगा तथा परिणामी तुलनपत्रेतर एक्सपोजर को सीसीपी की प्रवृत्ति के अनुसार उचित जोखिम भार प्रदान किया जाएगा। भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) के मामले में जोखिम भार 20% होगा और अन्य सीसीपी के लिए यह इन संस्थाओं को प्रदत्त रेटिंगों के अनुसार होगा। 5.15.3.4(iii): सीसीपी में बैंकों द्वारा रखी गई जमाराशियों पर सीसीपीकी प्रवृत्ति के अनुरूप जोखिम भार लगाया जाएगा। भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) के मामले में जोखिम भार 20 प्रतिशत होगा और अन्य सीसीपी के लिए, इन संस्थाओं को प्रदत्त रेटिंगों के अनुसार होगा। ख. 'ऋण जोखिम के लिए पूंजी प्रभार की गणना हेतु आंतरिक रेटिंग आधारित विधियों का कार्यान्वयन' पर दिशानिर्देशों (22 दिसंबर 2011 का परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 67/21.06.202/2011-12) के अनुबंध 7 के पैरा 1 व 2 नीचे दिये गए अनुसार विलोपित कर दिये जाएँगे: केंद्रीय प्रतिपक्षकारों (सीसीपी) के साथ लेनदेन 1. डेरिवेटिव ट्रेडिंग तथा प्रतिभूति वित्तपोषण लेनदेन (उदा. संपार्श्विकृत उधार तथा उधारदात्री दायित्वों, रिपो, रिवर्स रिपो) केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के समक्ष की बकाया राशियों के कारण केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के प्रति एक्सपोजरां को प्रतिपक्षकार ऋण जोखिम के लिए शून्य एक्सपोजर मूल्य निर्दिष्ट किया जाएगा क्योंकि यह माना जाता है कि अपनी काउंटर पार्टियों के प्रति सीसीपी के एक्सपोजरों दैनिक आधार पर पूर्णतः संपार्श्विकृत होते हैं, जिससे सीसीपी के ऋण जोखिम एक्सपोजरों की सुरक्षा प्रदान की जाती है। 2. सीसीपी के पास संपार्श्विकों के रूप में दर्ज की गई बैंक की प्रतिभूतियों तथा परिणामी तुलनपत्रेतर एक्सपोजर को सीसीपी के स्वरूप के अनुरूप मानकीकृत विधि के अनुसार जोखिम भार निर्दिष्ट किए जाएंगे और यह समीक्षा के अधीन होंगे। II. संशोधन बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (01 जुलाई 2013 के मास्टर परिपत्र बैंपविवि सं. बीपी. बीसी. 2 /21.06.201/2013-14) और 'ऋण जोखिम के लिए पूंजी प्रभार की गणना हेतु आंतरिक रेटिंग आधारित विधियों का कार्यान्वयन' पर दिशानिर्देशों (22 दिसंबर 2011 का परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 67/21.06.202/2011-12) के निम्नलिखित पैरा में संशोधन किया जाएगा। परिवर्तनों को मोटे अक्षरों में रेखांकित किया गया है। बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र ( 01 जुलाई 2013 के मास्टर परिपत्र बैंपविवि सं. बीपी. बीसी. 2 /21.06.201/2013-14) का पैरा 5.15.4 (iii) नकद राशि देने पर प्रतिभूतियों के एक साथ विनिमय होने वाली सुपुर्दगी बनाम अदायगी प्रणाली (डीवीपी) के माध्यम से निपटाए गए लेनदेन की असफलता बैंकों को वर्तमान बाजार मूल्य (अर्थात् धनात्मक वर्तमान एक्सपोजर) पर मूल्यांकित लेनदेन तथा सहमत निपटान मूल्य पर मूल्यांकित लेनदेन के बीच के अंतर पर हानि के जोखिम में डालता है। असफल लेनदेन जहां समतुल्य प्राप्य वस्तु (प्रतिभूतियां, विदेशी मुद्राएं अथवा स्वर्ण) की प्राप्ति के बिना ही नकद राशि का भुगतान किया जाता है अथवा इसके विपरीत प्रदेय वस्तुएं समतुल्य नकद राशि का भुगतान प्राप्त किए बिना प्रदान की गई हैं (गैर डीवीपी अथवा मुक्त सुपुर्दगी) वहां बैंक को भुगतान की गई संपूर्ण राशि अथवा सुपुर्द की गई प्रदेय वस्तुओं पर हानि के जोखिम का खतरा रहता है। अतः असफल लेनदेन के लिए पूंजी प्रभार अपेक्षित है और उनकी गणना करनी होगी। सभी असफल लेनदेन जिनमें मान्यताप्राप्त समाशोधन गृह और केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के माध्यम से किए गए लेनदेन शामिल हैं पर निम्नलिखित पूंजी व्यवहार लागू होगा। रिपर्चेस तथा रिवर्स रिपर्चेस करार तथा प्रतिभूति उधार देना तथा उधार देना, जिनका निपटान नहीं हुआ है पर यह पूंजी व्यवहार लागू नहीं होगा। 'ऋण जोखिम के लिए पूंजी प्रभार की गणना हेतु आंतरिक रेटिंग आधारित विधियों का कार्यान्वयन' पर दिशानिर्देशों (22 दिसंबर 2011 का परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 67/21.06.202/2011-12) कापैरा 5(iii) : नकद राशि देने पर प्रतिभूतियों के एक साथ विनिमय होने वाली सुपुर्दगी बनाम अदायगी प्रणाली (डीवीपी) के माध्यम से निपटाए गए लेनदेन की असफलता बैंकों को वर्तमान बाजार मूल्य (अर्थात् धनात्मक वर्तमान एक्सपोजर) पर मूल्यांकित लेनदेन तथा सहमत निपटान मूल्य पर मूल्यांकित लेनदेन के बीच के अंतर पर हानि के जोखिम में डालता है। असफल लेनदेन जहां समतुल्य प्राप्य वस्तु (प्रतिभूतियां, विदेशी मुद्राएं अथवा स्वर्ण) की प्राप्ति के बिना ही नकद राशि का भुगतान किया जाता है अथवा इसके विपरीत प्रदेय वस्तुएं समतुल्य नकद राशि का भुगतान प्राप्त किए बिना प्रदान की गई हैं (गैर डीवीपी अथवा मुक्त सुपुर्दगी) वहां बैंक को भुगतान की गई संपूर्ण राशि अथवा सुपुर्द की गई प्रदेय वस्तुओं पर हानि के जोखिम का खतरा रहता है। अतः असफल लेनदेन के लिए पूंजी प्रभार अपेक्षित है और उनकी गणना करनी होगी। सभी असफल लेनदेन जिनमें मान्यताप्राप्त समाशोधन गृह और केंद्रीय प्रतिपक्षकारोंके माध्यम से किए गए लेनदेन शामिल हैं पर निम्नलिखित पूंजी व्यवहार लागू होगा। रिपर्चेस तथा रिवर्स रिपर्चेस करार तथा प्रतिभूति उधार लेने तथा देने पर, जिनका निपटान नहीं हुआ है, यह पूंजी व्यवहार लागू नहीं होगा। परिशिष्ट 2 क्लोज आउट नेटिंग सेट्स में निवल प्रतिस्थापन लागत को शामिल करने के लिए अपेक्षाएं क. रिपो-स्टाइल लेनदेनों के लिए यदि करार डिफाल्ट की घटना घटित होने पर प्रत्येक संबंधित अधिकार क्षेत्र में विधिक रूप से प्रवर्तनीय हैं भले ही प्रतिपक्ष दिवालिया हो या शोधक्षम हो तो रिपो-स्टाइल लेनदेनों को कवर करने वाले द्विपक्षीय नेटिंग समझौतों के प्रभावों को प्रतिपक्ष-दर-प्रतिपक्ष आधार पर शामिल किया जाएगा । इसके अतिरिक्त, नेटिंग करारों के लिए (क) डिफाल्ट न करने वाले पक्ष को डिफाल्ट के घटित होने पर करार के अंतर्गत सभी लेनदेनों को समयबद्ध तरीके से समाप्त कर देने तथा बंद करने के अधिकार का प्रावधान करना आवश्यक है; (ख) उन लेनदेनों पर लाभों तथा हानियों की नेटिंग करने का प्रावधान करना आवश्यक है जो समाप्त कर दी गई है तथा बंद कर ही गई हों (किसी संपार्श्विक के मूल्य सहित) ताकि एक पार्टी द्वारा दूसरे पार्टी के प्रति कोई बकाया न रह जाए; (ग) डिफाल्ट घटित होने पर संपार्श्विक के तुरंत परिसमापन एवं प्रतितुलन की अनुमति देना आवश्यक है तथा; (घ) उक्त (क) तथा (ग) में अपेक्षित प्रावधानों से उत्पन्न अधिकारों समेत, डिफाल्ट की स्थिति में प्रत्येक संबंधित न्याय क्षेत्र में विधिक रूप से प्रवर्तनीय होना चाहिए चाहे प्रतिपक्षकारशोधाक्षम या दिवालिया हो अथवा न हो। ख. डेरिवेटिव लेनदेनों के लिए (क) बैंक उस नवीयन के अधीन लेनदेनों की नेटिंग कर सकते हैं जिसके अंतर्गत किसी बैंक और उसके प्रतिपक्षकार के बीच किसी दिए हुए मूल्य तिथि में किसी दी हुई मुद्रा की सुपुर्दगी करने का दायित्व उसी मुद्रा के लिए अन्य सभी दायित्वों के साथ स्वतः सम्मिलित हो जाती है, जिसमें पूर्व की सकल दायित्वों का स्थान विधिक रूप से एकल राशि ले लेती है। (ख) नवीयन के अन्य स्वरूपों सहित उक्त (क) में कवर नहीं किए गए किसी द्विपक्षीय नेटिंग के विधिक रूप से वैध स्वरूप के अंतर्गत लेनदेनों को भी बैंक निवल कर सकते हैं। (ग) उक्त दोनों मामलों (क) तथा (ख) में, बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका: (i) वह नेटिंग करार या संविदा जो प्रतिपक्ष के साथ एकल विधिक दायित्व उत्पन्न करने वाला है तथा जिसमें सभी शामिल लेनदेन आ जाते हैं ताकि यदि कोई प्रतिपक्षकार निम्नलिखित में से किसी एक कारण से कार्य-निष्पादन में असमर्थ रहता है तो बैंक के पास शामिल किए गए अलग-अलग लेनदेनों के बाजार दर आधारित धनात्मक एवं ऋणात्मक मूल्यों के निवल योग को या तो प्राप्त करने का दावा रहे या भुगतान करने का दायित्व रहे; चूक (डिफाल्ट), दिवालियापन, परिसमापन या समान परिस्थितियां; (ii) लिखित तथा तर्कयुक्त विधिक राय जो, विधिक चुनौती मिलने की स्थिति में, संबंधित अदालतें तथा प्रशासकीय प्राधिकारी बैंक के एक्सपोजर को ऐसी निवल राशि को जिसके अंतर्गत पाएंगे:
(iii) यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियायें स्थापित करना कि नेटिंग व्यवस्थाओं की विधिक विशिष्टताएं संबंधित कानून में संभावी परिवर्तनों के आलोक में समीक्षाधीन रखी जाती हैं। (ङ) इन दिशानिर्देशों के अंतर्गत पूंजी अपेक्षाओं की गणना करने के उद्देश्य से नेटिंग करने के लिए वाकअवे क्लाज वाली संविदाएं पात्र नहीं होंगी। वाकअवे क्लाज वह प्रावधान है जो किसी गैर-डिफाल्टिंग प्रतिपक्षकार को यह अनुमति प्रदान करती है कि वह किसी चूककर्ता की संपदा को केवल सीमित भुगतान करे या बिल्कुल ही कोई भुगतान न करे भले ही चूककर्ता निवल उधारदाता हो। 1 कृपया बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासल समिति द्वारा जुलाई 2012 में ‘केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के प्रति बैंक एक्सपोजर का पूंजीकरण’ (bcbs227.pdf.) पर जारी किए गए अंतरिम नियमों को देखें। 2 बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बासल समिति द्वारा ‘केंद्रीय प्रतिपक्षकारों के प्रति बैंक एक्सपोजर का पूंजी ट्रीटमेंट’ (http://www.bis.org/publ/bcbs253.pdf) पर दिनांक 28 जून 2013 को जारी परामर्शकारी दस्तावेज की ओर ध्यान दें। 3 कृपया बासल III पूंजी विनियमों पर मास्टर परिपत्र (01 जुलाई 2013 का मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी.2/21.06.201/2013-14) का पैरा 7.3.8 देखें। 4 कृपया भारत में बासल III पूंजी विनियमों का क्रियान्वयन-स्पष्टीकरण पर दिशानिर्देश (28 मार्च 2013 का परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 88/21.06.201/2012-13) देखें जिनके अनुसार सीवीए जोखिम प्रभार 01 जनवरी 2014 की स्थिति के अनुसार लागू होंगे। 5 जहां इस प्रकार की आस्तियों या संपार्श्विक को धारण करने वाली संस्था कोई क्यूसीसीपी है, वहां व्यापार एक्सपोजर की परिभाषा में शामिल संपार्श्विक पर 2% का जोखिम भार लगता है। क्यूसीसीपी का संबंधित जोखिम भार अन्य उद्देश्यों हेतु पोस्ट किए गए आस्तियों या संपार्श्विक पर लगाया जाता है। 6 इस पैराग्राफ में, ‘अभिरक्षक’ शब्द के अंतर्गत न्यासी, अभिकर्ता, गिरवी रखने वाला, सुरक्षित ऋणदाता या कोई अन्य व्यक्ति जो इस प्रकार संपत्ति धारण करता है जो इस व्यक्ति को ऐसी संपत्ति में कोई लाभप्रद हित नहीं प्रदान करता है तथा जिसके परिणामस्वरूप ऐसी संपत्ति ऐसे व्यक्तियों,ऋणदाताओं द्वारा विधिक रूप से प्रवर्तनीय दावों के अधीन नहीं होता है या ऐसी संपत्ति का न्यायालय के आदेश से वापस किया जाना यदि ऐसा व्यक्ति दिवालिया हो जाए या अर्थशोधक्षम न रह जाए। 7 व्यापार एक्सपोजर पर 2% का जोखिम भार अतिरिक्त रूप में लागू नहीं होता है क्योंकि यह समीकरण में सम्मिलित है। 8 जिन मामलों में किसी सीसीपी पर गैर-क्यूसीसीपी के रूप में विचार किया जाता है और एक्सपोजर की गणना सीसीपी पर की जानी है, तो लागू जोखिम भार सीसीपी को प्रदत्त रेटिंग के अनुसार होगा। |
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