वर्ष 2007-08 के लिए वार्षिक नीति वक्तव्य - आस्ति निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण तथा प्रावधानीकरण संबंधी मानदंड - शहरी सहकारी बैक
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आरबीआई/2007/361 30 अप्रैल 2007
मुख्य कार्यपालक अधिकारी
महोदय/महोदया
वर्ष 2007-08 के लिए वार्षिक नीति वक्तव्य - आस्ति निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण तथा प्रावधानीकरण संबंधी मानदंड - शहरी सहकारी बैक
कृपया वर्ष 2007-08 के लिए वार्षिक नीति वक्तव्य का पैराग्राफ 210 (प्रति संलग्न) देखें।
2. हमारे परिपत्र शबैंवि.पीसीबी.परि.21/12.05.05/2004-05 दिनांक 27 सितंबर 2004 के अनुसार सभी शहरी सहकारी बैकों को निर्देश दिया गया था कि वे 01 अप्रैल 2006 को या उसके बाद संदिग्ध आस्ति (डी-III) श्रेणी के रूप में वर्गीकृत अग्रिमों के सुरक्षित हिस्से पर 100% प्रावधान करें। वर्ष 2006-07 के प्रारंभ से उनके लिए यह भी अनिवार्य था कि वे संदिग्ध आस्तियों (डी-III) के बकाए स्टॉक के लिए क्रमिक आधार पर प्रावधान करें।
3. शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र की विविधता को देखते हुए एक द्वि-स्तरीय विनियामक दृष्टिकोण अपनाने का निर्णय लिया गया था। तदनुसार, शहरी सहकारी बैंकों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था जैसे (क) टियर I बैंक जिनमें वे यूनिट बैंक शामिल हैं जिनकी केवल एक शाखा/प्रधान कार्यालय है और जिनकी जमाराशि 100 करोड़ रुपये तक हो। टियर I में वे शहरी सहकारी बैंक भी शामिल हैं जिनकी एक जिले के भीतर कई शाखाएं हैं और जिनकी जमाराशि 100 करोड़ रुपये तक हो और (ख) टियर II बैंक जिनमें अन्य सभी बैंक शामिल हैं। टियर II बैंकों के लिए 14 जुलाई 2007 के हमारे परिपत्र शबैंवि.पीसीबी.परि.सं.1 /09.14.00/2005-06 के माध्यम से रियायती विवेकपूर्ण मानदंड जारी किए गए थे। उन्हें 31 मार्च 2007 तक ऋण खातों को 90 दिन के चूक मानदंड के बजाय 180 दिन के चूक मानदंड के आधार पर एनपीए के रूप में वर्गीकृत करने की अनुमति दी गई थी। यह रियायत देने के पीछे स्पष्ट उद्देश्य यही था कि संबंधित शहरी सहकारी बैंक पर्याप्त प्रावधान सृजित करते हुए तथा अपने मूल्यांकन, संवितरण तथा संवितरण के बाद की प्रक्रियाओं को मजबूत करने के उपरांत वर्ष 2007-08 में अनर्जक आस्तियों से संबंधित 90 दिन के चूक मानदंड की व्यवस्था में शामिल हो सकें।
4. इसके अतिरिक्त टियर I बैंकों के लिए संदिग्ध आस्तियों (डी-III) की श्रेणी के सुरक्षित हिस्से पर 100% प्रावधानीकरण को तीन वर्षों के लिए आस्थगित कर दिया गया था जब कि टियर II बैंकों के लिए 01 अप्रैल 2006 को या उसके बाद 100% प्रावधान करना अनिवार्य था।
5. शहरी सहकारी बैंकों की अब तक की प्रगति को ध्यान में रखते हुए तथा वार्षिक नीति वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसार निम्नवत निर्णय लिया गया है:
क) टियर-I बैंक i) अनर्जक आस्तियों के लिए ऋण संबंधी 180 दिन के चूक मानदंड को एक साल बढ़ाकर अर्थात 31 मार्च 2008 तक कर दिया गया है।
ii) संदिग्ध श्रेणी के अंतर्गत किसी अवमानक आस्ति के वर्गीकरण के लिए 12 महीने की अवधि 01 अप्रैल 2008 से लागू होगी।
iii) इसके अलावा इन बैंकों के लिए 01 अप्रैल 2010 को या उसके बाद तीन वर्षों से अधिक समय से संदिग्ध आस्तियों के रूप में वर्गीकृत डी-III अग्रिमों के सुरक्षित हिस्से का 100% प्रावधान करना अनिवार्य होगा।
iv) बैंकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे 31 मार्च 2010 तक के डी-III अग्रिमों के बकाए स्टॉक के लिए निम्नवत प्रावधान करे:
31 मार्च 2010 तक 50%
ख) टियर-II बैंक
i) डी-III (तीन वर्ष से अधिक समय से संदिग्ध) के रूप में वर्गीकृत अग्रिमों के लिए 100% प्रावधानीकरण उन अग्रिमों पर लागू होगा जो 01 अप्रैल 2007 को या उसके बाद इस श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किए गए थे बजाय उन अग्रिमों के जो 01 अप्रैल 2007 को या उसके बाद इस श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किए गए थे।
ii) इसके फलस्वरूप बैंकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे 31 मार्च 2007 तक के डी-III आस्तियों के बकाए स्टॉक के लिए निम्नवत प्रावधान करे:
31 मार्च 2007 तक 50%
6. कृपया प्राप्ति-सूचना हमारे संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को दें। भवदीय
(एन.एस.विश्वनाथन) वर्ष 2007-08 के लिए वार्षिक नीति वक्तव्य (ग) शहरी सहकारी बैकों के लिए विवेकपूर्ण मानदंड : समय विस्तारण
210. शहरी सहकारी बैंकों के क्षेत्र से लेनदेन हेतु द्विस्तरीय विनियामक दृष्टिकोण के एक भाग के रूप में, शहरी सहकारी बैंकों का दो श्रेणियों, अर्थात् टियर I और टियर II बैंकों में वर्गीकरण किया गया है। टियर I शहरी सहकारी बैंकों को 31 मार्च 2007 तक 90 दिन के मानदंड के बदले 180 दिन के चूक के मानदंड पर आधारित अनर्जक परिसंपत्तियों के रूप में ऋण खातों का वर्गीकरण करने की अनुमति थी। इतना ही नहीं, वित्तीय वर्ष 2006-07 से टियर II के शहरी सहकारी बैंकों से यह अपेक्षित था कि वे संदिग्ध परिसंपत्तियों के लिए अधिक कठोर प्रावधानन मानदंड अपनाएं। शहरी सहकारी बैंकों द्वारा अब तक की गई प्रगति को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव है क:
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