सभी राज्य और जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक
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आरबीआई/2004-05/336 ग्राआऋवि.सं.आरएफ.बीसी. 69/07.38.01/2004-05 जनवरी 7, 2005 सभी राज्य और जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक महोदय, भारत स्थित संघों / संगठनों द्वारा विदेशी अंशदान अंशदान प्राप्त किया जाना जैसाकि आपको ज्ञात है बैंकों से अपेक्षित है कि वे भारत स्थित संघों / संगठनों द्वारा प्राप्त विदेशी अंशदान के संबंध में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 1976 के विभिन्न प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करें । विशेषकर बैंकों से यह सुनिश्चित करने की अपेक्षा है कि, दान/अंशदान प्राप्त करनेवालों के बैंक खातों में वास्तव में राशि जमा किये जाने से पहले, संबंधित संगठनों ने दान/अंशदान प्राप्त करने के संबंध में भारत सरकार से पूर्व अनुमति प्राप्त कर ली है । गंभर सुनामी को दृष्टिगत रखते हुए (जिसने अंदमान और निकोबार द्वीप-समूह, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पांडिचेरी और केरल के तटवर्ती इलाकों को प्रभावित किया है ) केंद्र सरकार, गफ्ह मंत्रालय ने 30 दिसंबर 2004 को अधिसूचना सं. घ्घ्/21022/11(19) 2004-एफसीआरए (प्रतिलिपि संलग्न) द्वारा, निश्चित सांस्वफ्तिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम चलानेवाले सभी संगठनों को (राजनीतिक दलों से भिन्न), सुनामी से प्रभावित व्यक्तियों को राहत प्रदान करने के लिए, केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त किये बिना, नकद या वस्तु रुप में विदेशी अंशदान स्वीकार करने के मामले में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम 1976 की धारा 6 (1-ए) के प्रावधानों से, तत्काल प्रभाव से और 31 मार्च 2005 तक की अवधि के लिए छूट प्रदान कर दी है, परंतु इस मामले में निम्नलिखित शर्तें लागू होंगी :
(क) ऐसा प्रत्येक संगठन इस प्रयोजन के लिए एक नया बैंक खाता खोलेगा ; (ख) उक्त खाते का नाम "सुनामी राहत खाता" होगा ; (ग) संबंधित संगठन केवल उक्त बैंक खाते में ही विदेशी अंशदन प्राप्त कर सकेगा ; (घ) प्रत्येक संगठन उक्त बैंक खाते में प्राप्त विदेशी अंशदान के मामले में अलग-अलग खाते और रिकाड़ तैयार करेगा ;
(ड.) संबंधित संगठन उक्त बैंक खाता खोलने के बाद एक सप्ताह के भीतर गफ्ह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग को फॉर्म एफसी - 1ए में अंशदान का विवरण प्रस्तुत करेगा ; (च) संबंधित संगठन विदेशी अंशदान की प्राप्ति के संबंध में फॉर्म एफसी-3 में और प्राप्त वस्तुओं के मामले में पॉर्म एफसी-6 में, वर्ष समाप्त होने के बाद चार महीने के भीतर, विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम 1976 में निर्धारित तरीके से, गफ्ह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग को, चार्टड़ एकाउंटेंट द्वारा विधिवत् प्रमाणित एक घोषणा पत्र प्रस्तुत करेगा ।
आप इस संबंध में अपनी शाखाओं को तत्काल अपेक्षित अनुदेश जारी करें ।
वफ्पया हमारे संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्राप्ति सूचना दें ।
भवदीय
( सी.एस.मूर्ति ) प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
अनुलग्नक : 1
घ्घ्/21022/11(19)2004-एपसीआरए 1 भारत सरकार आर्थिक कार्य विभाग विदेशी प्रभाग
लोक नायक भवन खान मार्केट नयी दिल्ली - 110 023
दिनांक : 30 दिसंबर 2004
आदेश जबकि, जबतक एक निश्चित सांस्वफ्तिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम चलानेवाला कोई संगठन भारत सरकार के पास अपना पंजीकरण नहीं करा लेता या भारत सरकार से पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं कर लेता, तब तक वह विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम 1976, जिसे इसमें इसके बाद "अधिनियम" कहा गया है, की धारा 6 के अंतर्गत विदेशी अंशदान प्राप्त नहीं कर सकेगा ।
2. जबकि अंदमान और निकोबार द्वीपसमूह, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पांडिचेरी और केरल के तटवर्ती क्षेत्रों के सुनामी द्वारा गंभीर रुप से प्रभावित होने के बाद अनेक विदेशी स्रोतों ने, सुनामी पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए, इन क्षेत्रों में और देश के अन्य भागों में कार्यरत विभिन्न एजेंसियों को नकद या वस्तु रुप में अंशदान भेजने की इच्छा व्यक्त की है ।
3. जबकि सुनामी पीड़ित व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए सहायता का तत्काल पहुंचना अत्यंत महत्वपूर्ण है और उक्त अधिनियम के अंतर्गत, विशेष मामले के रुप में केवल इसी प्रयोजन के लिए, विदेशी अंशदान स्वीकार करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया से छूट प्रदान करना जनहित में है ।
4. इसलिए अब, उक्त अधिनियम की धारा 31 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार एतद्द्वारा , एक निश्चित सांस्वफ्तिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम चलानेवाले सभी संगठनों को (राजनीतिक दलों से भिन्न), केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त किये बिना ही, सुनामी पीड़ित व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने क लिए, नकद या वस्तु रुप में विदेशी अंशदान स्वीकार करने के मामले में तत्काल प्रभाव से और 31 मार्च 2005 तक उक्त अधिनियम की धारा 6 (1-ए) के प्रावधानों से छूट प्रदान करती है परंतु इस मामले में निम्नलिखित शर्तें लागू होंगी : (व) ऐसा प्रत्येक संगठन इस प्रयोजन के लिए एक नया बैंक खाता खोलेगा ; (वव) उक्त खाते का नाम "सुनामी राहत खाता" होगा ; (ववव) संबंधित संगठन केवल उक्त बैंक खाते में ही विदेशी अंशदान प्राप्त कर सकेगा ;
(वख्) प्रत्येक संगठन उक्त बैंक खाते में प्राप्त विदेशी अंशदान के मामले में अलग-अलग खाते और रिकाड़ तैयार करेगा ; (ख्) संबंधित संगठन उक्त बैंक खाता खोलने के बाद एक सप्ताह के भीतर गफ्ह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग को फॉर्म एफसी - 1ए में अंशदान का विवरण प्रस्तुत करेगा ; (ख्व) संबंधित संगठन विदेशी अंशदान की प्राप्ति के संबंध में फॉर्म एफसी-3 में और प्राप्त वस्तुओं के मामले में पॉर्म एफसी-6 में, वर्ष समाप्त होने के बाद चार महीने के भीतर, विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम 1976 में निर्धारित तरीके से, गफ्ह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग को, चार्टड़ एकाउंटेंट द्वारा विधिवत् प्रमाणित एक घोषणा पत्र प्रस्तुत करेगा ।
5. संबंधित फॉर्म गफ्ह मंत्रालय की वेबसाईट http://mha.nic.in/fore.htm से डाउनलोड किये जा सकते हैं ।
ह/- ( डी.एस.मिश्रा) भारत सरकार के संयुक्त सचिव
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