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चेक क्लियरिडग में विलंब - राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष 2006 का मामला संख्या 82

आरबीआई / 2008-09 /377
ग्राआऋवि.केंका.आरआरबी.बीसी.सं. 87/03.05.33 /2008-09
5 फरवरी 2009
अध्यक्ष

सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

महोदय/महोदया,
चेक क्लियरिडग में विलंब - राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण

आयोग के समक्ष 2006 का मामला संख्या 82

जैसा कि आपको विदित है, अगस्त 2006 के दौरान उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष एक मामला दर्ज किया गया था जिसमें चेक क्लियरिडग में विलंब और विशेष रूप से, स्थानीय और अंतर -सिटी क्लियरिडग में प्लोट के मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था। 2006 के मामला सं. 82 को जनहित में स्वीकार करते हुए शिकायत में भारतीय रिज़र्व बैंक (the Bank) और सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (the banks) को प्रतिवादी बनाया गया था तथा चेक संग्रहण में हुए विलंब के लिए ब्याज के रुप में पर्याप्त क्षतिपूर्ति की मांग की गई थी।

भारतीय रिज़र्व बैंक और अनुसूचित वाणिज्य बैंकों ने समय-समय पर कई एफिडेविट फाइल किए तथा आयोग ने अंतत: 27 अगस्त 2008 को मामला यह देखते हुए निपटा दिया था कि भारतीय रिज़र्व बैंक, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत अपनी इन व्यापक शक्तियों का प्रयोग करते हुए बाहरी केद्रों के चेकों के संग्रहण में हुए विलंब के कारण उत्पन्न प्लोट यदि कोई हो, को नियंत्रित करने का प्रयास करेगा।

सुनवाई के दौरान आयोग ने आदेश पारित किए जिनके परिणामस्वरूप "बाहरी केद्रों के चेकों के संग्रहण के लिए समय सीमा " के बारे में अंतिम आदेश पारित किया जा सका जो @http:www.ncdrc.nic.in/CC820605.htm  पर उपलब्ध है।

इन बातों के होते हुए भी, बेहतर स्पष्टता और आयोग के आदेशों के अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हम निम्नलिखित को पुन: दोहराते हैं :
    i) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा के अनुसार स्थानीय और बाहरी केद्रों के चेकों के संग्रहण के संबंध में अपनी चेक संग्रहण नीतियां (सीसीपी) तैयार करें / पुन: तैयार करें।

    ii) स्थानीय चेकों के मामले में, क्रेडिट और डेबिट उसी दिन या क्लियरिडग में उनके प्रस्तुत किये जाने के अगले दिन अवश्य दिया जाए। आदर्श रूप में, स्थानीय क्लियरिडग के मामले में बैंक संबंधित रिटर्न क्लियरिडग की समाप्ति के तुरंत बाद ग्राहक के खातों में दिए जाने वाले शेडो क्रेडिट का उपयोग करने की अनुमति देंगे तथा सुरक्षा उपायों के अधीन, आहरण की अनुमति किसी भी हालत में, उसी दिन या ज्यादा से ज्यादा अगले कार्य दिवस को कारोबार आरंभ होने से एक घंटे के अंदर होगी।

    iii) राज्यों की राजधानियों / प्रमुख शहरों / अन्य लोकेशनों पर आहरित चेकों के संग्रहण की समय सीमा क्रमश: 7/10/14 दिन होगी। इस अवधि के बाद संग्रहण में हुए विलंब के मामले में बेंक  की चेक संग्रहण नीतियों में विनिर्दिष्ट ब्याज दर तदनुरुपी परिपक्वता वाली सावधि जमाराशियों के लिए ब्याज दर होगी। चेक के संग्रहण के लिए आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट समय सीमा को अंतिम सीमा माना जाएगा और यदि प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती है तो चेक की राशि खाते में जमा कर दी जाएगी।

    iv) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक चेक संग्रहण नीतियों की मुख्य-मुख्य बातें मोटे और साफ अक्षरों में अपनी शाखाओं के नोटिस बोर्ड पर दर्शनीय स्थान पर प्रदर्शित करके उनका व्यापक प्रचार करेंगे।

    v) ग्राहक द्वारा मांग किए जाने पर शाखा प्रबंधक उसे चेक संग्रहण नीतियों की प्रति उपलब्ध करायेंगे।
भवदीय
( बी.पी.विजयेद्र )

मुख्य महाप्रबंधक

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