भारतीय रिज़र्व बैंक ने घरेलू और विदेशी मुद्रा चलनिधि में सुधार के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा की
15 अक्टूबर 2008 भारतीय रिज़र्व बैंक ने घरेलू और विदेशी मुद्रा चलनिधि में भारतीय रिज़र्व बैंक हाल की अवधि में चलनिधि और मौद्रिक स्थितियों की लगातार निगरानी कर रहा है। पिछले महीने के दौरान कई उपाय पहले ही किए गए हैं ताकि प्रणाली में पर्याप्त चलनिधि बनी रहे। भारतीय अंतर बैंक गैर-जमानती मुद्रा बाज़ार सामान्य रूप से कार्य करता रहा है। रातभर के लिए माँग मुद्रा बाज़ार में औसत दैनिक मात्रा अक्टूबर 2008 में 14,000 करोड़ रही है जो वास्तव में पिछले छह महीने की अवधि में देखी गई मात्रा से कुछ अधिक है। तथापि, जारी अनिश्चित वैश्विक स्थिति का हमारे वित्तीय बाज़ारों पर एक अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। आगे समीक्षा किए जाने पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने निर्णय लिया है कि निम्नलिखित उपाय लागू किए जाएं - i)अनुसूचित बैंकों का आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर) उनकी निवल माँग और मीयादी देयताओं (एनडीटीएल) का वर्तमान में 7.5 प्रतिशत है। उभरती चलनिधि स्थितियों की समीक्षा करने पर यह निर्णय लिया गया है कि 11 अक्तूबर 2008 को प्रारंभ होनेवाले वर्तमान रिपोर्टिंग पखवाड़े से आरक्षित नकदी निधि अनुपात में 100 आधार बिंदुओं तक कमी करते हुए इसे निवल माँग और मीयादी देयताओं (एनडीटीएल) का 6.5 प्रतिशत किया जाए। इस उपाय से प्रणाली में 40,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त चलनिधि जारी की जाएगी। ii)मंगलवार, 14 अक्टूबर 2008 को भारतीय रिज़र्व बैंक ने पारस्परिक निधियों की चलनिधि आवश्यकताओं को पूरा करने में बैंकों को सहायता करने की दृष्टि से 20,000 करोड़ रुपए की एक अधिसूचित राशि के लिए 9 प्रतिशत वार्षिक दर पर एक विशेष 14-दिवसीय रिपो के आयोजन का निर्णय लिया। इसके अतिरिक्त रिज़र्व बैंक ने आज सुबह घोषणा की थी कि यह 14 दिवसीय रिपो सुविधा अगली सूचना जारी होने तक इस प्रयोजन के लिए 20,000 करोड़ रुपए की एक संचयी राशि तक अब प्रत्येक दिन आयोजित की जाएगी। बैंक उन पात्र प्रतिभूतियों की संपार्श्विकता के बदले चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत रिज़र्व बैंक से चलनिधि प्राप्त करते हैं जो उनके निर्धारित सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) के आधिक्य में हैं। शुद्ध रूप से अस्थायी उपाय के रूप में यह निर्णय लिया गया है कि बैंक पारस्परिक निधियों की चलनिधि आवश्यकताओं को पूरा करने के विशेष प्रयोजन से अपनी निवल माँग और मीयादी देयताओं की 0.5 प्रतिशत की सीमा तक इस अतिरिक्त चलनिधि सहायता का लाभ उठा सकते हैं।14 अक्तूबर 2008 को घोषित इस विशेष मीयादी रिपो सुविधा के बंद होने के बाद यह 14 दिवसीय अतिरिक्त चलनिधि सहायता सुविधा समाप्त हो जाएगी। यह सहायता 16 सितंबर 2008 को घोषित अस्थायी उपाय के अतिरिक्त होगी जिसमें बैंकों को यह अनुमति दी गई है कि वे अपनी निवल माँग और मीयादी देयताओं की 1 प्रतिशत की सीमा तक इस अतिरिक्त चलनिधि सहायता का लाभ उठा सकते हैं। iii)भारतीय रिज़र्व बैंक ने जून-जुलाई 2008 में मुद्रा और विदेशी मुद्रा बाज़ारों में उस समय व्याप्त असाधारण स्थिति पर विचार करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष बाज़ार परिचालन (एसएमओ) की एक व्यवस्था लागू की थी। भारतीय रिज़र्व बैंक वैसी ही एक सुविधा लागू करेगा जब तेल बाण्ड उपलब्ध होंगे। iv)कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना के अंतर्गत सरकार ने पहली किश्त के रूप में 25,000 करोड़ रुपए की एक राशि वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी ऋण संस्थाओं को उपलब्ध कराने पर सहमति दी थी। सरकार के अनुरोध पर भारतीय रिज़र्व बैंक उधारदात्री संस्थाओं को राशि उपलब्ध कराने पर तत्काल सहमत हुआ। यह चलनिधि सहायता भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 17 (3बी) और धारा 17(4ई) के अंतर्गत क्रमश: अनुसूचित बैंकों तथा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) को उपलब्ध कराई जाएगी। v)अनिवासी भारतीय जमाराशियों पर ब्याज दरें (क) विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) (एफसीएनआर (बी)) जमाराशियों पर ब्याज दरें वर्तमान में सभी परिपक्वतावाली एफसीएनआर (बी) जमराशियों पर ब्याज दर सीमा संबंधित विदेशी मुद्राओं के लिए 25 आधार बिंदुओं की कमी के साथ तदनुरूपी परिपक्वताओं हेतु लिबोर/स्वैप दरों पर निर्धारित की गई है। व्याप्त बाज़ार स्थितियों की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है कि -
(ख) अनिवासी (बाह्य) रुपया खाता (एनआर (ई) आरए) जमाराशियों पर ब्याज दर वर्तमान में एक से तीन वर्ष की परिपक्वता वाले एनआर (ई) आरए पर ब्याज दर सीमा तदनुरूपपी परिपक्वता के अमरीकी डॉलर के लिए लिबोर/स्वैप दरों में 50 आधार बिंदु बढ़ाते हुए उससे अधिक नहीं होना चाहिए। व्याप्त बाज़ार स्थितियों की दृष्टियों से यह निर्णय लिया गया है कि :
vi)बैंकों को अनुमति दी जाएगी कि वे अपनी समुद्रपारीय शाखाओं से तथा प्रतिनिधि बैंक 25 प्रतिशत की अपनी वर्तमान सीमा के बदले पिछली तिमाही की समाप्ति पर अपनी अक्षत टियर I पूँजी की 50 प्रतिशत की सीमा तक अथवा 10 मिलियन अमरीकी डॉलर, जो भी अधिक हो, निधियाँ उधारस्वरूप प्राप्त करें। उभरती हुई चलनिधि स्थितियों के आलोक में उपर्युक्त उपायों की समीक्षा निरंतर आधार पर की जाएगी। रिज़र्व बैंक निकट से तथा निरंतर आधार पर वित्तीय बाज़ारों में गतिविधयों की निगरानी कर रहा है तथा वह घरेलू वित्तीय स्थिरता, मूल्य स्थिरता और मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं पर प्रभाव डालनेवाली किन्हीं प्रतिकूल बाहरी गतिविधियों पर तेजी से तथा पूर्वकृत उपाय के रूप में भी कार्रवाई करेगा। रिज़र्व बैंक अपने उद्देश्य के अभिन्न भाग के रूप में सभी नीति लिखतों का उपयोग करते हुए वित्तीय स्थिरता और सक्रिय एवं लचीले चलनिधि प्रबंध बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है। अल्पना किल्लावाला प्रेस प्रकाशनी : 2008-2009/500 |
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