व्यापार संग्राहक को ओटीसी डेरिवेटिव कारोबार की रिपोर्टिंग पर भारतीय रिज़र्व बैंक का जी-20 प्रतिबद्धता का अनुपालन
15 जनवरी 2014 व्यापार संग्राहक को ओटीसी डेरिवेटिव कारोबार की रिपोर्टिंग पर दिनांक 24-25 सितंबर 2009 को पिट्सबर्ग शिखर वार्ता की जी-20 घोषणा में ओवर दि काउंटर (ओटीसी) डेरिवेटिव बाजारों के सुधार के लिए अनेक सुधारात्मक उपाय रेखांकित किए गए जिनमें व्यापार संग्राहक को ओटीसी डेरिवेटिव संविदाओं की रिपोर्टिंग शामिल है। भारतीय रिज़र्व बैंक से अपेक्षित था कि वह भारत में ओटीसी ब्याज दर और विदेशी विनिमय डेरिवेटिव का विनियामक होने के कारण जी-20 प्रतिबद्धताओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए। वर्ष 2010-11 की वार्षिक मौद्रिक नीति में की गई घोषणा के अनुपालन में सभी ओटीसी ब्याज दर और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन के लिए कार्यकुशल, एकल रिपोर्टिंग व्यवस्था के तौर-तरीकों पर कार्य करने के लिए जून 2010 में एक कार्यसमूह (अध्यक्षः श्री पी. कृष्णमूर्ति) का गठन किया गया था। मई 2011 में कार्यसमूह द्वारा प्रस्तुत की गई सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि भारतीय रिज़र्व बैंक बैंकों/प्राथमिक व्यापारियों और अपने ग्राहकों के बीच सभी अंतर बैंक ओटीसी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव और ओटीसी विदेशी मुद्रा और ब्याज दर डेरिवेटिव में सभी/चयनित कारोबार की भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) रिपोर्टिंग मंच पर रिपोर्ट करने का अधिदेश दे। यह उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने पहले ही अगस्त 2007 में रुपया ब्याज दर स्वैप (आईआरएस)/फारवर्ड दर करार (एफआरए) में अंतर बैंक/प्राथमिक व्यापारी लेनदेन के लिए रिपोर्टिंग व्यवस्था शुरू की थी। भारतीय रिज़र्व बैंक ने ओटीसी डेरिवेटिव आंकड़ों की रिपोर्टिंग तथा एकीकरण आवश्यकताओं तथा भारतीय संदर्भ में आवश्यकताओं पर सीपीएसएस-आईओएससीओ की रिपोर्ट में प्रस्तावित संभाव्य आंकड़ा क्षेत्रों की सूची को ध्यान में रखते हुए रिपोर्टिंग मंचों के विकास और रिपोर्टिंग प्रारूप तैयार करने के लिए सीसीआईएल का सहयोग किया। सीसीआईएल ने बाजार के प्रतिनिधित्व निकायों के परामर्श से ग्राहक लेनदेनों की रिपोर्टिंग के लिए गोपनीय रूप से प्रोंटोकॉल का भी विकास किया है। ओटीसी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव के लिए सीसीआईएल के रिपोर्टिंग मंच की शुरूआत 9 जुलाई 2012 को की गई थी तथा तत्पश्चात विभिन्न सक्रिय रूप से प्रयोग किये जाने वाली डेरिवेटिव लिखतों में अंतर बैंक और ग्राहक लेनदेन (1 मिलियन अमरीकी डॉलर या अन्य मुद्राओं में समकक्ष शुरूआती सीमा) की रिपोर्टिंग के लिए तीन चरणों में इसका विस्तार किया गया। अंतिम चरण हाल में 30 दिसंबर 2013 को शुरू किया गया जिसमें रुपया आईआरएस/एफआरए में ग्राहक लेनदेन की रिपोर्टिंग भी शामिल की गई। ऋण चूक स्वैप (सीडीएस) के लिए रिपोर्टिंग मंच लिखत को प्रारंभिक तारीख अर्थात 1 दिसंबर 2011 से शुरू किया गया। तब से विभिन्न ओटीसी ब्याज दर, विदेशी मुद्रा और ऋण डेरिवेटिव्ज के लिए कारोबारी रिपोर्टिंग व्यवस्था पूरी हो गई है। इस व्यवस्था में निम्नलिखित लिखतों को शामिल किया गया हैः
भारतीय रिज़र्व बैंक विभिन्न ओटीसी डेरिवेटिव लिखतों के उपयोग की सीमा का आवधिक आकलन करेगा और बाजार सहभागियों द्वारा इन लिखतों को सक्रिय रूप से उपयोग करने पर अन्य डेरिवेटिव लिखतों की रिपोर्टिंग शुरू करेगा। भविष्य में ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन की रिपोर्टिंग भारत में ओटीसी डेरिवेटिव बाजारों की पारदर्शिता में संवर्धन करने के अलावा भारतीय रिज़र्व बैंक को ओटीसी डेरिवेटिव बाजारों की निगरानी करने, वित्तीय स्थिरता आकलन लगाने, बैंकों और प्राथमिक व्यापारियों का सूक्ष्म-विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण करने आदि की सुविधा प्रदान करेगी। अजीत प्रसाद प्रेस प्रकाशनी : 2013-2014/1424 |
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