रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 01/2022: बेसल कार्यान्वयन की घोषणा पर स्टॉक मूल्य की प्रतिक्रिया: भारतीय बैंकों से साक्ष्य - आरबीआई - Reserve Bank of India
रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 01/2022: बेसल कार्यान्वयन की घोषणा पर स्टॉक मूल्य की प्रतिक्रिया: भारतीय बैंकों से साक्ष्य
11 जनवरी 2022 रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 01/2022: भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर श्रृंखला* के तहत “बेसल कार्यान्वयन की घोषणा पर स्टॉक मूल्य की प्रतिक्रिया: भारतीय बैंकों से साक्ष्य" शीर्षक से एक वर्किंग पेपर रखा। पेपर का लेखन गौरव सेठ, सुप्रिया कट्टी और बी. वी फणी ने किया है। यह अध्ययन वैश्विक बेसल पूंजी पर्याप्तता मानदंडों के साथ अपने घरेलू नियमों को संरेखित करने के लिए वित्तीय उदारीकरण के बाद भारतीय बैंकिंग उद्योग में प्रमुख सुधार लाने हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा लिए गए विभिन्न नीतिगत निर्णयों की बाजार प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करता है। ये घोषणाएं कुछ महत्वपूर्ण निर्णय हैं जिन्होंने भारतीय वाणिज्यिक बैंकों के परिचालन में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं; इसलिए, यह समझना अनिवार्य है कि बाजार बेसल सिफारिशों के कार्यान्वयन को कैसे मानता है। घटना अध्ययन का उपयोग विनियमों के अल्पकालिक प्रभाव की जांच के लिए किया जाता है। उसी पद्धति का उपयोग करते हुए, अध्ययन से पता चलता है कि भारतीय बैंक शुरू में पूंजी को 9 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए तैयार नहीं थे, जिसके परिणामस्वरूप बाजार ने बेसल I की घोषणा के प्रति अति प्रतिक्रिया व्यक्त की, और असामान्य रिटर्न और संचयी रिटर्न के संदर्भ में निराशावादी मनोभावों को देखा गया। बाद की घोषणाओं को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली क्योंकि भारतीय बैंक पिछले नियामक निर्णयों को लागू करने से प्राप्त अनुभव से लाभान्वित हुए थे और अपेक्षित परिवर्तनों का सामना करने के लिए तैयार थे। बेसल II और बेसल III अवधियों की घोषणाओं के दौरान बैंकों के स्टॉक की कीमतों में वृद्धि इस बात का प्रमाण देती है कि बेसल नियमों के कार्यान्वयन का भारतीय बैंकिंग क्षेत्र पर लंबे समय में अनुकूल प्रभाव पड़ा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए स्वामित्व संरचना और नीतिगत निर्णयों के आधार पर बाजार की प्रतिक्रिया भी भिन्न रही। इसके अलावा, बहुचर विश्लेषण विभिन्न घटनाओं के बाजार निष्पादन पर बैंक-विशिष्ट विशेषताओं का कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं दिखाता है। यह अध्ययन उभरते बाजारों में अलग-अलग बैंक स्वामित्व संरचना पर बेसल जोखिम-आधारित पूंजी पर्याप्तता मानदंडों के कार्यान्वयन के धन प्रभाव पर बढ़ते साहित्य में योगदान देता है। (योगेश दयाल) प्रेस प्रकाशनी: 2021-2022/1528 * भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर श्रृंखला की शुरुआत मार्च 2011 में की थी। ये पेपर भारतीय रिज़र्व बैंक के स्टाफ सदस्यों और कभी-कभी बाहरी सह-लेखकों, जब अनुसंधान संयुक्त रूप से किया जाता है, के अनुसंधान की प्रगति पर शोध प्रस्तुत करते हैं। उन्हें टिप्पणियों और आगे की चर्चा के लिए प्रसारित किया जाता है। इन पेपरों में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और जरूरी नहीं कि वे जिस संस्थान (संस्थाओं) से संबंधित हैं, उनके विचार हों। अभिमत और टिप्पणियां कृपया लेखकों को भेजी जाएं। इन पेपरों के उद्धरण और उपयोग में इनके अनंतिम स्वरूप का ध्यान रखा जाए। |