भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर श्रृंखला 6 : भारत में रोजगार सघन वृद्धि जनसांख्यिकीय लाभांश चुनौती को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण
24 जून 2014 भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर श्रृंखला 6 : भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर श्रृंखला* के अंतर्गत “भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वृद्धि के रोजगार लचीलेपन का अनुमान लगाना” शीर्षक से एक वर्किंग पेपर जारी किया है। यह पेपर श्रीमती संगीता मिश्रा और श्री अनूप के. सुरेश द्वारा लिखा गया गया है। रोजगार लचीलापन रोजगार में प्रतिशत परिवर्तन का एक माप है जो आर्थिक वृद्धि में 1 प्रतिशत दशमलव परिवर्तन से जुड़ा हुआ है। यह किसी अर्थव्यवस्था की वृद्धि (विकास) प्रक्रिया के प्रतिशत के रूप में इसकी आबादी के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने में उसकी सक्षमता को दर्शाता है। इस प्रकार रोजगार लचीलापन वृद्धि की रोजगार सघनता को सारांश में प्रस्तुत करने का आसान तरीका है और इसका उपयोग रोजगार सृजित करने तथा रोजगार में भविष्य की वृद्धि का अनुमान लगाने के लिए क्षेत्रकीय संभावना का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस पेपर में विभिन्न दृष्टिकोणों का उपयोग करते हुए और वर्ष 2011-12 तक उद्योगों के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण और वार्षिक सर्वेक्षण के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए दोनों समग्र तथा क्षेत्र विशिष्ट रोजगार लचीलेपन पर अद्यतन अनुमान उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। अनुभवजन्य निष्कर्ष दर्शाते हैं कि भारत के लिए समग्र रोजगार लचीलेपन के अनुमानों में पिछले दशकों में कमी आई है और सुधार के बाद की अवधि के दौरान ये 0.18 (वर्ताकार लचीलापन) से 0.20 (दशमलव लचीलापन) तक अलग-अलग हैं। क्षेत्रवार जहां कृषि में नकारात्मक लचीलापन देखा गया है, वहीं निर्माण सहित सेवा क्षेत्र सामान्यरूप से रोजगार सघन रहा है। विनिर्माण रोजगार लचीलापन 0.3 के आसपास रहा है। विनिर्माण के अंदर संगठित विनिर्माण क्षेत्र में विभिन्न अनुमानों पर आधारित रोजगार लचीलापन 2000 के दशक में 0.4-0.5 के दायरे में रहा है। 2000 के दशक के दौरान रोजगार सघन रहने वाले क्षेत्रों में कपड़ा, फर्नीचर और चमड़े का उत्पाद और विद्युतीय उपस्कर शामिल हैं। पेपर में निष्कर्ष दिया गया है कि वर्ष 2012 और 2013 में वृद्धि में नरमी आने से रोजगार लचीलेपन में कमी आने की संभावना है। आगे, भारत के लिए रोजगार सघन वृद्धि जनसांख्यिकीय लाभांश चुनौती को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है जिसमें उच्चतर रोजगार लचीलेपन वाले उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया जाए। *भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वर्किंग पेपर श्रृंखला मार्च 2011 से शुरू की गई। इन पेपरों में भारतीय रिज़र्व बैंक के स्टाफ सदस्यों द्वारा किए जा रहे अनुसंधानों को प्रस्तुत किया जाता है और टिप्पणियां प्राप्त करने और आगे चर्चा के उद्देश्य से इसे प्रसारित किया जाता है। इन पेपरों में व्यक्त किए गए विचार लेखकों के होते है, न कि भारतीय रिज़र्व बैंक के। कृपया टिप्पणियां और अभिमत लेखकों के पास प्रेषित करें। पेपरों के अनंतिम स्वरूप को देखते हुए इनका उल्लेख और प्रयोग किया जाए। संगीता दास प्रेस प्रकाशनी : 2013-2014/2489 |
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