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नवंबर 2011 के‍ लिए आरबीआइ वर्किंग पेपर श्रृंखला सं. 20

 7 दिसंबर 2011

नवंबर 2011 के‍ लिए आरबीआइ वर्किंग पेपर श्रृंखला सं. 20

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जीवन कुमार खुंद्रक्‍कपम द्वारा ''भारत में मौद्रिक अंतरण के ऋण माध्‍यम - यह अवधि कितनी प्रभावी और दीर्घजीवी है'' शीर्षक वर्किंग पेपर प्रस्‍तुत किया।  मूल्‍य स्थिरता के साथ वृद्धि के अपने उद्देश्‍य को प्राप्‍त करने में मौद्रिक नीति की प्रभाव क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि किस प्रकार नीति संकेत वित्तीय प्रणाली और अर्थव्‍यवस्‍था के माध्‍यम से अंतरित किए जा रहे हैं। जब ब्‍याज दर नीति रूझान का संकेत देने का मुख्‍य लिखत है, वाणिज्यिक ब्‍याज दर के माध्‍यम से अंतरण मुख्‍य माध्‍यमों में से एक है। इस माध्‍यम में वित्तीय संस्‍थाओं की जमाराशियों और उधार दरों को प्रभावित करने के द्वारा ब्‍याज दर नीति में परिवर्तन परिवारों और व्‍यापारों के व्‍यय और निवेश निर्णयों को बदल देता है जिसके परिणामस्‍वरूप मुद्रास्‍फीति और वृद्धि में परिवर्तन हो जाता है।

परिचालन प्रक्रिया के रूप में चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) ढॉंचे के स्‍वीकरण के साथ ब्‍याज दर भारत में मौद्रिक नीति का मुख्‍य संकेतक लिखत हो गया है। इस प्रकार यह पेपर 2001:3 से 2011:3 की चलनिधि समायोजन सुविधा के बाद की अवधि के दौरान नीति ब्‍याज दर में परिवर्तन के माध्‍यम से मौद्रिक नीति अंतरण के ऋण माध्‍यम की जॉंच करता है। इसके साहित्‍य से उद्धरण लेते हुए दो घटे हुए स्‍वरूप एक सांकेतिक बैंक ऋण का प्रतिनिधित्‍व और दूसरा वास्‍तविक बैंक ऋण का प्रतिनिधित्‍व करने वाले के समीकरणों को आकलित किया गया है। ये आकलन चर वस्‍तुओं के स्‍थायी स्‍वरूप को अंतरित करने के बाद तथा हेंड्री के सामान्‍य - से - विशिष्‍ट पद्धति के अनुरूप दृष्टिकोण का पालन करने के बाद किए गए हैं। जारी प्रतिगमन के अतिरिक्‍त स्थिरता, संरचनात्‍मक अवसर और विभिन्‍न डायग्‍नोस्टिक जॉंच परिणामों की मज़बूती सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं।

पेपर का निष्‍कर्ष यह है कि बैंक ऋण पर आर्थिक गतिविधि के सकारात्‍मक प्रभाव के अलावा जमाराशि अथवा मुद्रा आपूर्ति में नीति प्रभावित विस्‍तार अथवा संकुचन बैंकों को तदनुरूपी ढंग से अपने ऋण संविभाग का समायोजन करने देता है। महत्‍वपूर्ण रूप से मौद्रिक अंतरण का माध्‍यम उल्‍लेखनीय और मज़बूत पाया गया है। विशेष रूप से सांकेतिक अथवा वास्‍तविक बैंक ऋण वृद्धि के प्रति नीति दर का अंतरण होने में सात महीने लगते हैं। अंतरण अवधि सभी विचारणीय उप-प्रतिदर्श अवधियों में मज़बूत पायी गई है। संपूर्ण प्रतिदर्श अवधि के दौरान नीति दर में 100 आधार बिंदुओं की वृद्धि के परिणामस्‍वरूप सांकेतिक और बैंक ऋण में क्रमश: 2.78 और 2.17 प्रतिशत बिंदुओं तक वार्षिक कृद्धि में गिरावट हुई है। तथापि लेखक के अनुसार बैंक ऋण पर नीति ब्‍याज दर का प्रभाव वैश्विक संकट के बाद कम हुआ है।

अजीत प्रसाद
सहायक महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2011-2012/895

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