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भारत में विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि में वृद्धि के स्रोत :अप्रैल-दिसंबर 2002 के लिए अद्यतन आंकड़े

भारत में विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि में वृद्धि के स्रोत :
अप्रैल-दिसंबर 2002 के लिए अद्यतन आंकड़े

7 अप्रैल 2003

पृष्ठभूमि

भारतीय रिज़र्व बैंक ने, 31 जनवरी 2003 को एक प्रेस प्रकाशनी जारी की थी, जिसमें विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि में वृद्धि के स्रोतों पर आर्थिक विश्लेषण और नीति विभाग द्वारा अप्रैल-नवंबर 2002 के दौरान किये गये अध्ययन की मुख्य-मुख्य बातें प्रस्तुत की गयी थीं। यह प्रेस प्रकाशनी अनुमानित आंकड़ों के आधार पर जारी की गयी थी। पूरा अध्ययन और प्रेस प्रकाशनी भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट (www.rbi.org.in ) पर उपलब्ध है। इस प्रेस प्रकाशनी में दिसंबर 2002 तक यह जानकारी अद्यतन की गयी है।

तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर 2002) और अप्रैल-दिसंबर 2002 के लिए वास्तविक भुगतान संतुलन के आंकड़े अब उपलब्ध हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर 31 मार्च 2003 को ये आंकड़े प्रकाशित किये गये थे।

आरक्षित निधियों की वृद्धि के स्रोत (अप्रैल-दिसंबर 2002)

अद्यतन रूप से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, अप्रैल-दिसंबर 2002 के लिए विदेशी मुद्रा आरक्षित निधियों में वृद्धि के स्रोत निम्नलिखित तालिका में प्रस्तुत किये गये हैं। तुलना के लिए अप्रैल-दिसंबर 2001 के आंकड़े भी तालिका में प्रस्तुत किये गये हैं।

(आंकड़े हजार मिलियन अमेरिकी डॉलर में हैं)

 

मदें

अप्रैल-नवंबर 2002

अप्रैल-दिसंबर 2002

अप्रैल-दिसंबर 2001

I. चालू खाता शेष

2.5

2.8

-0.7

II. पूंजी खाता (निवल)

8.0

9.9

6.3

विदेशी निवेश

1.9

2.3

3.5

बैंकिंग पूंजी जिसमें से

4.0

6.7

4.1

अनिवासी भारतीय जमाराशियां

2.1

2.3

2.3

अल्पावधि ऋण

0.5

0.4

-0.8

अन्य पूंजी

3.8

2.2

0.4

बाह्य वाणिज्यिक उधार

-1.8

-1.7

-0.9

III. मूल्यांकन परिवर्तन

2.1

3.2

0.1

कुल

12.6

15.9

5.7

 

अप्रैल-दिसंबर 2002 के दौरान विदेशी मुद्रा आरक्षित निधियों में वृद्धि के प्रमुख स्रोत इस तरह रहे :

  • चालू खाते में अधिशेष (17.6 प्रतिशत)
  • विदेशी निवेश योगदान (14.5 प्रतिशत)
  • अनिवासी जमाराशियों को छोड़कर, हिसाब में ली गयी बैंकिंग पूंजी 27.7 प्रतिशत और हिसाब में ली गयी अनिवासी जमाराशियां 14.5 प्रतिशत रहीं।
  • अन्य पूंजी (अवशिष्ट) प्रभावी रूप से निर्यात प्राप्तियों में समाविष्ट अग्रता (लीड्स) और पश्चता (लैग्स) को शामिल करते हुए 13.8 प्रतिशत रहीं।
  • आरक्षित निधियों में मूल्यांकन परिवर्तन (20.1 प्रतिशत)

अप्रैल-दिसंबर 2002 के दौरान प्रवाहों के ढांचे में कोई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन नहीं पाये गये हैं। इस तरह अप्रैल-नवंबर 2002 के दौरान पायी गयी प्रवृत्तियां अप्रैल-दिसंबर 2002 के दौरान भी बनी रहीं। अतएव, अप्रैल-नवंबर 2002 के आंकड़े वाली इससे पहले जारी प्रेस प्रकाशनी में, जैसा कि बताया गया है, वर्ष की पहली तीन तिमाहियों के लिए भी निम्नलिखित निष्कर्ष उभरकर सामने आते हैं :

  • अप्रैल-दिसंबर 2002 के दौरान अमेरिकी डॉलर खाते की तुलना में यूरो, ग्रेट ब्रिटन पाउंड और येन की मूल्यवृद्धि प्रतिबिंबित करने वाले मूल्यांकन परिवर्तनों का योगदान करीब 3.2 बिलियन अमेरिकी डालर रहा।
  • अनिवासी भारतीय जमाराशियों में करीब 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की निवल वृद्धि हुई है। यह वृद्धि पिछले वर्ष की अनुवर्ती अवधि के दौरान हुई वृद्धि के अनुरूप ही है। इस तरह चालू वर्ष में आरक्षित निधियों की उच्चतर वृद्धि के लिए विदेशी मुद्रा के क्रय-विक्रय (आब्रिट्रेज) के योगदान का कोई सबूत नहीं है।
  • नयी वृद्धियों में सबसे बड़ा हिस्सा चालू खाता अधिशेष, गैर-ऋण तैयार करनेवाले प्रवाह और करेंसी मूल्यांकन के कारण रहा है। चूंकि ऋण तैयार करने वाले प्रवाह सापेक्षत: निम्न हैं, अतिरिक्त आरक्षित निधियों की लागत संभवत: अत्यंत उल्लेखनीय नहीं होगी। यह भी नोट किया जाये कि पिछले कुछ वर्षों में आरक्षित निधियों में करीब-करीब समग्र परिवर्तन, बाह्य ऋण की समग्र सीमा में वृद्धि किये बिना किये गये हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक, अप्रैल-मार्च 2003 की अवधि के लिए, जब पूरे वित्तीय वर्ष के लिए वास्तविक आंकड़े उपलब्ध होंगे, पूरे वर्ष के लिए जून 2003 में विदेशी मुद्रा आरक्षित निधियों में वृद्धि के स्रोतों पर और प्रेस प्रकाशनी जारी करेगा।

अल्पना किल्लावाला
महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2002-2003/1043

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