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बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) तथा व्यापार ऋण

भाग-I बाह्य वाणिज्यिक उधार

ए. कुछ बुनियादी प्रश्न

उत्तर: ईसीबी तथा ट्रेड क्रेडिट (टीसी) संबंधी मौजूदा ढांचे पर मार्गदर्शन के लिए बाह्य वाणिज्यिक उधार, व्यापार ऋण तथा संरचित प्रतिबद्धताएं विषय पर दिनांक 26 मार्च 2019 के मास्टर निदेश सं. 5 से संदर्भ करें। पूर्व ढांचों के अंतर्गत जुटाये गए ईसीबी तथा टीसी का उक्त ईसीबी तथा टीसी का लाभ उठाते समय यथालागू तदनुरूपी दिशानिर्देशों का अनुपालन करना जारी रहेगा।

उत्तर: नहीं, एडी श्रेणी-I बैंकों द्वारा एफ़सीएनआर (बी) जमाराशियों की आगम राशियों में से घरेलू तौर पर दिए गए विदेशी मुद्रा ऋण ईसीबी ढांचे के अंतर्गत नहीं आते हैं।

उत्तर: विदेशों से लिए गए उधार समय- समय पर संशोधित दिनांक 17 दिसंबर 2018 की अधिसूचना सं. फेमा 3(आर)/2018 द्वारा जारी किए विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा में उधर लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018 में निहित यथालागू ईसीबी दिशानिर्देशों / प्रावधानों के अनुपालन में होने चाहिए।

उत्तर: जो उधार लिया गया है उसे यथालागू ईसीबी दिशानिर्देशों के अनुपालन में लिया गया है इसे सुनिश्चित करने का प्राथमिक दायित्व संबंधित उधारकर्ता का है। ऐसे ढांचे, जो किसी भी प्रकार से ईसीबी दिशानिर्देशों को बाइपास करते हों अथवा उससे बच कर निकलते हो तथा / अथवा किसी ऐसी अन्य पद्धति से उधार जुटाना जो कि अनुमत नहीं है/ उधार को किसी अन्य प्रकार के लेनदेन की ओढ़ में छिपाना तथा/ अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा में उधर लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन करना फेमा के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई के लिए पात्र हैं।

बी. ईसीबी जुटाने के लिए पात्रता

उत्तर: चूंकि एलएलपी एफ़डीआई प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं हैं इसलिए वे ईसीबी जुटा नहीं सकते हैं।

सी. ईसीबी की मुद्रा

उत्तर: भारतीय रुपये में मूल्यवर्गित ईसीबी को जुटाने वाली किसी भी एंटीटी को आईएनआर ईसीबी से उभरने वाली देयता को किसी भी प्रकार से विदेशी मुद्रा देयता में परिवर्तित करने अथवा डेरिवेटिव कांट्रैक्ट अथवा अन्यथा रूप में शामिल होकर किसी भी प्रकार से विदेशी मुद्रा जोखिम लेने की अनुमति नहीं है।

डी. मान्यताप्राप्त उधारदाता/ निवेशक

उत्तर: ईसीबी तथा टीसी संबंधी मौजूदा ढांचे पर मार्गदर्शन के लिए बाह्य वाणिज्यिक उधार, व्यापार ऋण तथा संरचित प्रतिबद्धताएं विषय पर दिनांक 26 मार्च 2019 को जारी मास्टर निदेश सं.5 (एमडी) के पैराग्राफ 1.11 में परिभाषित किए गए अनुसार विदेशी इक्विटि धारक उक्त मास्टर निदेश के पैराग्राफ 2.1.viii(डी), 2.1.viii (ई) तथा 2.1.वी(एफ़) में दिए गए अंतिम उपयोग के लिए उधार देने के लिए पात्र हैं। नकारात्मक सूची में दिए गए अंतिम उपयोगों से भिन्न अन्य अंतिम उपयोगों के लिए मान्यताप्राप्त उधारदाताओं को उल्लिखित मास्टर निदेश के पैराग्राफ 2.1.iv में निर्दिष्ट किया गया है।

उत्तर: नहीं, ईसीबी संबंधी सभी दिशानिर्देशों, जिनमें न्यूनतम इक्विटि धारिता से संबंधित दिशानिर्देश शामिल हैं, को केवल ईसीबी का कांट्रैक्ट बनाते समय ही नहीं बल्कि ईसीबी की पूर्ण अवधि के दौरान पूर्ण करना अपेक्षित है ।

उत्तर: भारतीय बैंक प्राथमिक बाज़ार में विदेशों में निर्गमित आरडीबी में अभिदान नहीं कर सकते लेकिन विवेकपूर्ण मानदंडों के अनुपालन की शर्त के अधीन अरैंजर/ हामीदार/ बाज़ार निर्माता/ व्यापारी हो सकते हैं।

उत्तर: नहीं। प्राधिकृत व्यापारी (एडी) बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं/ विदेश स्थित अनुषंगी कंपनियों अथवा कोई अन्य अनुमत कंपनियों को छोड़कर भारत के निवासी व्यक्तियों का इस ढांचे के अंतर्गत पात्र एंटिटियों के उधारों में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष एक्सपोजर नहीं है। साथ ही दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले उधार ढांचे/ साधन स्थापित करने से वे फेमा के अंतर्गत निर्धारित दंडात्मक कार्रवाई के लिए पात्र होंगे।

उत्तर: हाँ।

ई. औसत परिपक्वता अवधि

उत्तर: आप उदाहरण के लिए /documents/87730/39016390/12EC160712_A6.pdf से संदर्भ कर सकते हैं।

उत्तर: नहीं।

उत्तर: हां, तथापि ईसीबी की न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि पाँच वर्ष की होनी चाहिए।

एफ़. लेवरेज मानदंड तथा उधार सीमा

उत्तर: हां, पुनर्वित्त के लिए जुटाई गई ईसीबी को छोड़कर, जहां दोहरी गिनती से बचने के लिए प्रस्तावित ईसीबी की राशि को ध्यान में नहीं लिया जाएगा।

उत्तर: नहीं। इसमें अधिमान्य पूंजी शामिल नहीं है।

उत्तर: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत ईसीबी को जुटाने के लिए व्यक्तिगत सीमा में प्रस्तावित ईसीबी सहित वित्तीय वर्ष के दौरान जुटाई गई सभी ईसीबी को ध्यान में लिया जाएगा। तथापि, ईसीबी राशि के पुनर्वित्त को प्रति वित्तीय वर्ष की व्यक्तिगत सीमा की गणना करने के लिए ध्यान में नहीं लिया जाएगा। साथ ही नए वित्तीय वर्ष के परंभ में उक्त सीमा को पुनःस्थापित किया जाएगा।

उत्तर: हां। पात्र उधारकर्ता के लेखा परीक्षित तुलन-पत्र के अनुसार लाभ हानि खाते में कोई भी डेबिट जमा-शेष को ईसीबी देयता–इक्विटि अनुपात की गणना के लिए इक्विटि से घटाना होगा।

उत्तर: हां, इस शर्त पर कि दोनों ईसीबी भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार संबंधित मुद्राओं के लिए निर्धारित ईसीबी दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हों। व्यक्तिगत सीमाओं में जुटाई गई सभी ईसीबी, विदेशी मुद्रा में तथा भारतीय रुपये में, दोनों शामिल होंगी।

उत्तर: हां, बशर्ते वर्धित राशि वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए स्वचालित मार्ग के अंतर्गत यथा लागू वार्षिक सीमा का उल्लंघन नहीं करती हो तथा ईसीबी के अन्य मापदंड मौजूदा ईसीबी दिशानिर्देशों का पालन भी करते हों। चूंकि इसे उसी ईसीबी में किया गया परिवर्तन समझा जाएगा इसलिए वर्धित राशि के लिए कोई अलग एलआरएन की आवश्यकता नहीं होगी।

जी. समग्र लागत

उत्तर: समग्र लागत को हर समय यथा लागू सीमा के भीतर होना चाहिए, उदाहरण के लिए पहले वर्ष में समग्र सीमा का उल्लंघन तथा औसत रूप से अनुपालन करने के लिए दूसरे वर्ष में कुछ ज्यादा ही कम समग्र लागत अनुमत नहीं है।

उत्तर: समग्र लागत की वह परिभाषा जिसके अनुसार ईसीबी से आगम राशि के ब्याज/ प्रभारों के भुगतान के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा, परियोजना वित्त के लिए जुटाई गई तथा निर्माण के दौरान गारंटी शुल्क (जैसे ईसीए प्रीमियम) तथा ब्याज के भुगतान के लिए उपयोग में लाई जाने वाली ईसीबी पर लागू नहीं है; बशर्ते उक्त घटक परियोजना लागत का एक भाग हैं तथा उधारकर्ता द्वारा पंजीकृत किए गए हैं।

जी. अंतिम उपयोग

उत्तर: पूर्व में किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति ईसीबी ढांचे के अंतर्गत अनुमत अंतिम-उपयोग नहीं है।

उत्तर: नहीं। प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष (सुनाम की खरीद के माध्यम से) रूप में इक्विटि निवेश अनुमत नहीं है।

उत्तर: नहीं, इसके लिए अनुमति नहीं है।

उत्तर: रुपये में मूल्यवर्गीकृत ईसीबी के विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गीकृत ईसीबी से पुनर्वित्तपोषण की अनुमति नहीं है।

उत्तर: हां। समुद्रपारीय निवेश संबंधी दिशानिर्देशों में अनुमत किए गए अनुसार ईसीबी की आगम राशि को समुद्रपारीय निवेश के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

उत्तर: ईसीबी के प्रयोजन के लिए आगे-उधार देने के कारोबार में लिप्त उधारकर्ताओं के लिए आगे-उधार देने को कार्यशील पूंजी नहीं समझा जाता है। इसके अतिरिक्त उधारकर्ताओं को इस संबंध में संबंधित क्षेत्र विशेष अथवा विवेकपूर्ण विनियामक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

उत्तर: हां।

एच. ईसीबी का पुनर्वित्त

उत्तर: हां, बशर्ते उधारकर्ता का विद्यमान ईसीबी ढांचे के अंतर्गत ईसीबी जुटाने के लिए पात्र होना जारी रहता है, समग्र लागत विद्यमान ईसीबी की समग्र लागत से कम है, अवशिष्ट परिपक्वता को घटाया नहीं गया है, तथा नई ईसीबी विद्यमान ईसीबी ढांचे का भी अनुपालन करती है।

उत्तर: हां।

उत्तर: हां। तथापि ईसीबी के नए उधारदाताओं को भी ईसीबी ढांचे में परिभाषित किए गए अनुसार विदेशी इक्विटि धारक होना चाहिए तथा यह पुनर्वित्त पोषण संबंधी यथालागू दिशानिर्देशों के अधीन होना चाहिए।

आई. ईसीबी ढांचे के अंतर्गत हेजिंग

उत्तर: कोई भी एंटीटी जो भारतीय रुपये में ईसीबी (विदेश में रुपया में मूल्यवर्गित बॉन्डों का निर्गम करने सहित) जुटती है, को इस प्रकार से उठाने वाली देयता को किसी भी प्रकार से विदेशी मुद्रा देयता में परिवर्तित करने अथवा डेरिवेटिव कांट्रैक्ट अथवा अन्यथा में शामिल होकर किसी प्रकार का विदेशी मुद्रा जोखिम भी उठाने की अनुमति नहीं है।

उत्तर: हां। न्यूनतम अनिवार्य हेज की शर्त है।

उत्तर: उपयोगकर्ता समय-समय पर संशोधित जोखिम प्रबंधन तथा अंतर-बैंक लेनदेन पर 5 जुलाई 2016 का मास्टर निदेश देखें।

जे. रिपोर्टिंग

उत्तर: किसी ईसीबी के संबंध में कोई ड्रा-डाउन है तो वह रिज़र्व बैंक से एलआरएन मिलने के बाद ही किया जाना चाहिए। एल आर एन प्राप्त करने के लिए उधारकर्ताओं को विधिवत रूप से प्रमाणित फार्म ईसीबी निदेशक, भुगतान संतुलन सांख्यिकीय प्रभाग, सांख्यिकीय और सूचना प्रबंध विभाग (डीएसआईएम), भारतीय रिज़र्व बैंक, बांद्रा–कुर्ला काम्प्लेक्स, मुंबई – 400051 को प्रस्तुत करेगा। यह सुनिश्चित किया जाए कि फॉर्म ईसीबी में ईसीबी की सभी शर्तें सही ढंग से रिपोर्ट की गई हैं तथा कोई कॉलम खाली नहीं रखा गया है (ऐसे कॉलम जो उधार पर लागू नहीं होते हैं अथवा जिनके समक्ष “कुछ नहीं” जानकारी देनी है, को भी उचित रूप से शामिल किया जाए)। ईसीबी के मानदंडों में परिवर्तन फिर वे स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I के अनुमोदन से हो अथवा अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से हो, संशोधित फार्म ईसीबी में यथाशीघ्र लेकिन परिवर्तन किये जाने के अधिकतम सात दिनों के भीतर डीएसआईएम को रिपोर्ट की जानी चाहिए। संशोधित फार्म ईसीबी प्रस्तुत करते समय पत्र में उन परिवर्तनों का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए । ईसीबी कए लिए फॉर्म ईसीबी के संबंध में रिपोर्टिंग दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर फेमा के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

उत्तर: उधारकर्ताओं को वास्तविक ईसीबी लेनदेनों की रिपोर्ट सही तथा पूर्ण रूप में विधिवत रूप से प्रमाणित फॉर्म ईसीबी 2 में एडी श्रेणी -I बैंक के माध्यम भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट आवधिकता के अनुसार डीएसआईएम को प्रस्तुत करनी है। फॉर्म ईसीबी 2 में से कोई भी स्तम्भ खाली नहीं रखा जाएगा (ऐसे स्तम्भ जो कि उधार पर लागू नहीं हैं अथवा जिनके समक्ष “कुछ नहीं” सूचना देनी है को भी पर्याप्त रूप से शामिल किया जाना चाहिए) । फॉर्म ईसीबी 2 संबंधित महीने के समाप्त होने के बाद सात कामकाजी दिनों के भीतर डीएसआईएम के पास पहुँच जानी चाहिए। ईसीबी के मानदंडों में यदि कोई परिवर्तन किया जाता है तो उन्हें भी फॉर्म ईसीबी-2 में शामिल किया जाना चाहिए। फॉर्म ईसीबी-2 के संबंध में रिपोर्टिंग दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं किए जाने जिसमें रिपोर्टिंग की आवधिकता का पालन करने में की गई चूक शामिल है, पर फेमा के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई कि जा सकती है।

उत्तर: नहीं। यदि ईसीबी की शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, तो संशोधित फॉर्म ईसीबी (पूर्व का फॉर्म 83) फ़ाइल करना आवश्यक नहीं है।

उत्तर: नहीं। एलएसएफ़ के प्रावधान फरवरी 2019 से प्रस्तुत ईसीबी-2 विवरणियों पर लागू होंगे, अर्थात जनवरी 2019 के माह में किए गए लेनदेन के लिए फरवरी के माह में प्रस्तुत ईसीबी-2 विवरणियों पर लागू होंगे।

उत्तर: हां। एलएसएफ़ शून्य विवरणियों सहित प्रत्येक फॉर्म ईसीबी को प्रस्तुत नहीं करने पर लागू है ।

के. विविध

उत्तर: हां। मौजूदा मानदंडों के अंतर्गत ईसीबी की मूल राशि तथा ब्याज, दोनों को इक्विटि में परिवर्तित करने की अनुमति है। यह अनुमति “बाह्य वाणिज्यिक उधार, व्यापार ऋण, तथा संरचित प्रतिबद्धता” पर दिनांक 26 मार्च 2019 के मास्टर निदेश सं. 5 के पैराग्राफ 7.4 में दिए गए अनुसार यथालागू शर्तों के अधीन होगी।

उत्तर: हां। ईसीबी का इक्विटि में आंशिक परिवर्तन करने के लिए मुक्त रूप से अनुमति तब ही दी जाएगी जब ईसीबी के रुप में रहनेवाली शेष राशि ईसीबी संबंधी सभी दिशानिर्देशों का अनुपालन करती हो।

उत्तर: नहीं ।

भाग II: व्यापार ऋण (टीसी)

उत्तर: एडी बैंक विदेशी मुद्रा में समुद्रपारीय उधारदाताओं से अल्पावधि व्यापार वित्त का लाभ उठाने के लिए अपने ग्रहकों की ओर से एसबीएलसी जारी कर सकते हैं लेकिन इस शर्त के अधीन कि इस प्रकार से जारी की गई एसबीएलसी समय-समय पर संशोधित “गारंटियां तथा सहस्वीकृतियां” पर बैंकिंग विनियमन विभाग के दिनांक 1 जुलाई 2015 के मास्टर परिपत्र सं.डीबीआर.सं.डीआईआर.बीसी.11/13.03.00/2015-16 में निहित प्रावधानों का अनुपालन करती हो ।

उत्तर: एडी बैंकों को एडी बैंकों/ रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा विलंबित आयात देयताओं के निपटान के लिए प्रदान की गई सभी अनुमतियों की रिपोर्ट करनी होती है।

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 10, 2022

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