भारतीय रिज़र्व बैंक ने संख्या फाइनेंशियल सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई पर मौद्रिक दंड लगाया
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने 29 दिसंबर 2025 के आदेश द्वारा, संख्या फाइनेंशियल सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड (कंपनी) पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी 'अनर्जक आस्तियों की खरीद/बिक्री पर दिशानिर्देश' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹40,000 (चालीस हज़ार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58बी की उप-धारा (5) के खंड (एए) के साथ पठित धारा 58जी की उप-धारा (1) के खंड (बी) के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने, एक अपात्र संस्था को दबाव-ग्रस्त आस्तियां सौंपने संबंधी एक शिकायत के संबंध में कंपनी की जांच की जिससे यह पता चला कि कंपनी ने भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों का अननुपालन किया है। इसी आधार पर कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर कंपनी के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है : कंपनी ने एक अपात्र संस्था को अनर्जक आस्ति सौंपी थी। यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। (ब्रिज राज) प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1854 |
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