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भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि बेलगावी डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 23 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा, दि बेलगावी डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल  को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 20 के प्रावधानों का उल्लंघन करने तथा आरबीआई द्वारा जारी ‘स्वर्ण ऋण – एकमुश्त पुनर्भुगतान’ और ‘वाणिज्यिक स्थावर संपदा’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹2 लाख (दो लाख  रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1) (सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)  द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। सांविधिक प्रावधानों के उल्लेंघन / आरबीआई के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों  और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह  पूछा गया कि उक्त प्रावधानों और निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है: 

बैंक ने:

i) निदेशक से संबंधित ऋण स्वीकृत किए;

ii) निर्धारित विनियामक सीमा से अधिक एकमुश्त पुनर्भुगतान  योजना के तहत स्वर्ण ऋण स्वीकृत किए; तथा

iii) गैर-आवासीय वाणिज्यिक स्थावर संपदा  परियोजना को ऋण स्वीकृत किया।

यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।  

 

(ब्रिज राज)     
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2176

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