धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) करने संबंधी मानक - मुद्रा अंतरण सेवा योजना के तहत सीमापार (क्रास बॉर्डर) आवक धनप्रेषण - आरबीआई - Reserve Bank of India
धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) करने संबंधी मानक - मुद्रा अंतरण सेवा योजना के तहत सीमापार (क्रास बॉर्डर) आवक धनप्रेषण
भारिबैंक/2011-12/188 ए.पी.(डीआइआर सिरीज) परिपत्र सं.24 19 सितंबर 2011 सभी प्राधिकृत व्यक्ति जो मुद्रा अंतरण सेवा योजना के तहत भारतीय एजेंट हैं महोदया/महोदय, धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) करने संबंधी मानक - मुद्रा अंतरण सेवा योजना के तहत सीमापार (क्रास बॉर्डर) आवक धनप्रेषण प्राधिकृत व्यक्तियों, जो मुद्रा अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस) के तहत भारतीय एजेंट हैं, का ध्यान 20 मई 2011 के ए.पी. (डीआइआर सिरीज) परिपत्र सं.66 की ओर आकृष्ट किया जाता है, जिसके साथ वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का विवरण प्रेषित किया गया था, जिसमें एएमएल/सीएफटी प्रणाली में समय समय पर पायी गयी कमियों वाले क्षेत्राधिकारों की सूची दी गयी थी । 2. वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने इस विषय पर 24 जून 2011 को एक और विवरण जारी किया है (प्रतिलिपि संलग्न) जिसमें अपने सदस्यों तथा अन्य क्षेत्राधिकारों से अपील किया है कि वे ईरान और डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) से उत्पन्न होने वाले धन शोधन और आतंकवाद के लगातार भारी वित्तपोषण एवं जोखिम से अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के संरक्षण के लिए प्रत्युपाय लागू करें । 3. तदनुसार प्राधिकृत व्यक्तियों (भारतीय एजेंट) को सूचित किया जाता है कि वे संलग्न विवरण में दी गयी सूचना पर विचार करें/ध्यान दें । 4. प्राधिकृत व्यक्ति (भारतीय एजेंट) इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने संबंधित घटकों/ग्राहकों को अवगत करायें । 5. कृपया आप अपने प्रधान अधिकारी को इस परिपत्र की प्राप्ति सूचना देने के लिए सूचित करें । 6. इस परिपत्र में निहित निर्देश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और धारा 11 (1) और धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2009 द्वारा यथा संशोधित धन शोधन निवारण अधिनियम, (पीएमएलए), 2002 और समय समय पर यथा संशोधित धन शोधन निवारण (लेनदेनों के स्वरुप और मूल्य संबंधी अभिलेखों के रखरखाव, रखरखाव की प्रक्रिया और पद्धति तथा जानकारी प्रस्तुत करने के लिए समय और बैंकिंग कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और मध्यवर्ती संस्थाओं के ग्राहकों की पहचान के अभिलेखों का सत्यापन और रखरखाव) नियम, 2005 के तहत जारी किये गये हैं । इन दिशा-निर्देशों का अनुपालन न करने पर संबंधित अधिनियमों अथवा उसके तहत बनाये गये नियमों के दंडात्मक प्रावधानों को लागू किया जा सकता है । भवदीया, ( मीना हेमचंद्र) |