विभेदक ब्याज दर (डीआरआइ) योजना - आय सीमा में संशोधन
आरबीआइ / 2007 - 08 / 279
आरपीसीडी.एसपी.बीसी.सं. 55 / 09.07.01/2007-08
10 अप्रैल 2008
अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक
भारतीय अनुसूचित वाणिज्य बैंक
( क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर )
महोदय,
विभेदक ब्याज दर (डीआरआइ) योजना - आय सीमा में संशोधन
कृपया दिनांक 13 जून 2007 का हमारा परिपत्र आरपीसीडी.एसपी.बीसी.सं. 101 / 09.07.01 /2006-07 देखें जिसमें उपर्युक्त योजना की संशोधित ऋण सीमाओं के बारे में सूचित किया गया है जिसे वर्तमान में सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंकों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है ।
2. माननीय वित्त मंत्री ने वर्ष 2008-09 के अपने बजट भाषण के पैरा 95 में डीआरआइ योजना के अंतर्गत ऋण लेने वाले उधारकर्ताओं के पात्रता मानदंड को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है । तदनुसार, भारत सरकार द्वारा पहले निर्धारित ग्रामीण क्षेत्रों में रु. 6400 तथा शहरी क्षेत्रों में रु. 7200 के वार्षिक आय मानदंड के स्थान पर, अब ग्रामीण क्षेत्रों में रु.18,000 और शहरी क्षेत्रों में रु. 24,000 की वार्षिक पारिवारिक आय वाले उधारकर्ता इस सुविधा का लाभ उठाने के पात्र होंगे।
3. अत: आप कृपया उधारकर्ताओं के पात्रता संबंधी मानदंड के संशोधित दिशा-निर्देशों का तुंत कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु अपने नियंत्रक कार्यालयों और शाखा कार्यालयों को आवश्यक अनुदेश जारी करें । डीआरआइ योजना की अन्य शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं है ।
4. डीआरआइ योजना के अंतर्गत उधार का लक्ष्य अब तक की तरह पिछले वर्ष के कुल अग्रिम का 1 प्रतिशत बना रहेगा (दिनांक 30 अप्रैल 2007 के हमारे परिपत्र आरपीसीडी.सं.प्लान.बीसी. 84 / 04.09.01/2006-07 का पैरा III ) ।
5. कृपया प्राप्ति-सूचना दें ।
भवदीय
( जी.श्रीनिवासन )
मुख्य महाप्रबंधक
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