विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 - वस्तु और सेवाओं के निर्यात - आरबीआई - Reserve Bank of India
विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 - वस्तु और सेवाओं के निर्यात
भारतीय रिज़र्व बैंक ए.पी.(डीआइआर सिरीज़) परिपत्र सं. 12 सितंबर 9, 2000 प्रति प्रिय महोदय, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 - वस्तु और सेवाओं के निर्यात प्राधिकृत व्यापारीयों का ध्यान विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 7 की उपधारा (1) के खण्ड (ए), उपधारा (3) और धारा 47 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए रिज़र्व बैंक द्वारा जारी 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा 23/2000-आरबी की ओर आकृष्ट किया जाता है जिसके अंतर्गत "विदेशी मुद्रा प्रबंध (वस्तु और सेवाओं के निर्यात) विनियम 2000 बनाये गये है । इन विनियमों के संक्षेप को दिनां 16 मई 2000 के ए.डी (एम.ए. सिरीज) परिपत्र सं. 11 के अनुबंध III द्वारा पहले ही सूचित किया गया है । इस परिपत्र के साथ संलग्न अनुबंध में प्राधिकृत व्यापारियों के अपने निर्यातक ग्राहकों के साथ किये जानेवाले व्यवहार के बारे में विस्तृत दिशा निर्देश अंतर्विष्ट है । ये दिशानिर्देश विदेशी मुद्रा नियंत्रण मैन्युअल, संस्करण 1993 के अध्याय 6 में अंतर्विष्ट वर्तमान अनुदेशों का अधिक्रमण करता है । 2. विदेश व्यापार का नियंत्रण विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा किया जाता है जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, वाणिज्य विभाग, भारत सरकार के अधीन कार्य करता है । निर्यातकों के लिए समय-समय पर विदेशी व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी अधिसूचनाओं/निदेशों का पालन करना आवश्यक है । 3. रिज़र्व बैंक ने दिनांक 3 मई 2000 की उसकी अधिसूचना सं. फेमा 6/आरबी 2000 द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा का निर्यात और आयात) विनियम, 2000 बनाये गये है । कोई भी भारतीय मुद्रा के निर्यातक के लिए विनियमावली के अधीन दी गई किसी सामान्य अनुमति के अंतर्गत अनुमन मात्रा तक छोडकर, रिज़र्व बैंक की पुर्वानुमति आवश्यक है । 4. रिज़र्व बैंक ने दिनांक 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा 8 /2000-आरबी द्वारा अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (गारंटी) विनियमावली, 2000 विनियम 4 के अनुसार प्राधिकृत व्यपारियों को भारत से बाहर निर्यातों के कारण निर्यातक ग्राहकों की ओर से गारंटी जारी करने के लिए अनुमति दी गई है । 5. भूतपूर्व साविएत युनियन द्वारा प्रदान राज्य ऋणों के चुकौती पर वस्तु और सेवाओं के निर्यात रिज़र्व बैंक द्वारा जारी, समय-समय पर यथा संशोधित वर्तमान निदेशों द्वारा पूर्ववत शासित होंगे । इसके अलावा, रिज़र्व बैंक अब तक के अनुसार संबंधित पार्टियों के बीच स्वेच्छा से निष्पादित करार के अनुसार भारत को किये गये आयातों के मूल्य के सामने भारत से किये गये निर्यातों के मूल्य का समायोजन अंतर्भूत रुमानिया के जबाबी व्यापार प्रस्तावों पर पूर्ववत विचार करेगा । 6. आगे यह स्पष्ट किया जाता है कि अनुबंध में अंतर्विष्ट निदेश रिज़र्व बैंक द्वारा संदर्भित दिनांक 3 मई 2000 की उसकी अधिसूचना सं. फेमा 23/2000 द्वारा अधिसूचित विनियमों के साथ पढ़ना चाहिए । 7. प्राधिकृत व्यापारी इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने संबंधित ग्राहकों को अवगत कराएं । 8. इस परिपत्र में अंतर्विष्ट निदेश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम , 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और 11 (1) के अंतर्गत जारी किए गये है और इन निदेशों का किसी भी तरह से उल्लंघन किया जाना अथवा अनुपालन न किया जाना अधिनियम के अधीन निर्धारित जुर्माने से दंडनीय है । भवदीय (बी. महेश्वरन) |