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विदेशी मुद्रा प्रबंध - (भारत से बाहर निवासी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (पांचवां संशोधन) विनियमावली, 2004

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई 400 001.

अधिसूचना सं.फेमा.125/2004-आरबी

दिनांक :27 नवंबर, 2004

विदेशी मुद्रा प्रबंध - (भारत से बाहर निवासी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का
अंतरण अथवा निर्गम) (पांचवां संशोधन) विनियमावली, 2004

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 (1999 का 42) की धारा 47 की धारा 6 और उपधारा (3) के खंड (ख) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग तथा दिनांक 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा 20/2000-आरबी में आंशिक संशोधन करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर निवासी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली 2000, में निम्नलिखित संशोधन करता है, अर्थात्,

1. संक्षिप्त नाम और प्रारं

(i) यह विनियमावली विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर निवासी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम)(पांचवां संशोधन) विनियमावली 2004 कहलाएगी।

(ii) ये संशोधन 01 अक्तूबर, 2004 से लागू होंगे।

2. विनियमावली में संशोधन

(i) अनुसूची-I के पैराग्राफ 2 में, उप-पैराग्राफ (4) के बाद निम्नलिखित उप-पैराग्राफ जोड़ा जाएगा :

"(5) भारतीय कंपनी, जो इस अनुसूची के अंतर्गत अन्यथा शेयर जारी करने के लिए पात्र है, इस सूची के पैराग्राफ 5 में दिए गए मूल्य निर्धारण दिशा-निर्देशों के अधीन, भारत से बाहर निवासी व्यक्ति को, ईक्विटी/ अधिमानीय शेयर जारी कर सकते हैं,

(i) भुगतान के लिए देय रॉयल्टी/ एकमुश्त शुल्क पर प्रौद्योगिकी/तकनीकी जानकारी देनेवाला हो,

(ii) चुकौती के लिए देय बाह्य वाणिज्यिक उधार पर उधारकर्ता हो (भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देश के अनुसार बाह्य वाणिज्यिक उधार अथवा व्यापार ऋण माने जानेवाले आयात देय से इतर)

बशर्ते रॉयल्टी/ एकमुश्त शुल्क/ बाह्य वाणिज्यिक उधार के ईक्विटी में परिवर्तन के बाद कंपनी में विदेशी ईक्विटी, यदि कोई हो, अधिसूचित क्षेत्रीय सीमा के अंदर है। "

(ii) पैराग्राफ 3 में "संलग्नक आ में निर्दिष्ट क्षेत्रीय सीमाओं से परे" शब्दों के बाद "सीधे अथवा बाह्य वाणिज्यिक उधार/रॉयल्टी/ एकमुश्त शुल्क के परिवर्तन द्वारा" शब्द जोड़ा जाए।

(iii) पैराग्राफ 8 में उप-पैराग्राफ (ii) के बाद निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाए :

"स्पष्टीकरण : इस अनुसूची में अन्यत्र दिए गए अनुसार भुगतान के लिए देय रॉयल्टी/ एकमुश्त शुल्क अथवा विदेशी वाणिज्यिक उधार के परिवर्तन को इस पैराग्राफ के अर्थ में शेयरों के निर्गम के लिए प्रतिफल के रूप में माना जाएगा"

(iv) पैराग्राफ 9, उप-पैराग्राफ (1)(आ) में निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाए :

"बशर्ते, उपर्युक्त के अलावा, बाह्य वाणिज्यिक उधार को ईक्विटी में परिवर्तन को कंपनी संबंधित माह के फार्म ईसीबी 2 विवरणी में रिपोर्ट करेगी। बाह्य वाणिज्यिक उधार के आंशिक परिवर्तन के मामले में परिवर्तित अंश की सूचना फार्म ईसी-जीपीआर और अपरिवर्तित अंश की सूचना फार्म ईसीबी-2 में रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को दी जाएगी।"

(श्यामला गोपीनाथ)
उप गवर्नर


पाद टिप्पणी :

(i) यह उस तारीख के रूप में उल्लिखित किया गया है जिस में प्राधिकृत व्यापारियों को निदेश जारी किए गए, देखें अक्तूबर 1, 2004 का ए.पी.(डीआइआर सिरीज़) परिपत्र सं.15

(ii) मूल विनियमावली सरकारी राजपत्र में दिनांक मई 3, 2000 के जी.एस.आर. सं.406(E) में भाग II, धारा 3, उप-धारा (i) में प्रकाशित किए गए हैं और तत्पश्चात् निम्नानुसार संशोधित किया गया है :-

दिनांक 13/3/2001 का जीएसआर सं.175(E)
दिनांक 14/3/2001 का जीएसआर सं.182(E)
दिनांक 2/3/2001 का जीएसआर सं.158(E)
दिनांक 19/8/2002 का जीएसआर सं.574(E)
दिनांक 2/1/2002 का जीएसआर सं.4(E)
दिनांक 18/3/2003 का जीएसआर सं.223(E)
दिनांक 18/3/2003 का जीएसआर सं.225(E)
दिनांक 22/7/2003 का जीएसआर सं.558(E)
दिनांक 23/10/2003 का जीएसआर सं.835(E)
दिनांक 22/11/2003 का जीएसआर सं.899(E)
दिनांक 7/1/2004 का जीएसआर सं.12(E)
दिनांक 23/04/2004 का जीएसआर सं.278(E)
दिनांक 21/09/2004 का जीएसआर सं.625(E)

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