अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) जमाराशियों पर ब्याज दरें
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अप्रैल 26, 2007.
आरबीआइ/2006-07/353
सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
महोदय
अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) जमाराशियों पर ब्याज दरें
कृपया गवर्नर महोदय द्वारा 24 अप्रैल 2007 को वर्ष 2007-08 के लिए घोषित वार्षिक नीति वक्तव्य के पैरा 114 और 116 (पैराओं की प्रतियां संलग्न) देखें। 2. अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) जमाराशियों पर ब्याज दरें अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) खातों में रखी जमाराशियों पर ब्याज दरों के बारे में हमारे दिनांक 9 फरवरी 2007 के परिपत्र ग्राआऋवि.सं.आरआरबी.48/ 03.05.33 (सी)/2006-07 के पैरा 2 में निहित अनुदेशों की समीक्षा करने के बाद यह निर्णय किया गया हैं कि 24 अप्रैल 2007 को काराबार की समाप्ति से , अगली सूचना जारी होने तक अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) मीयादी जमाराशियों पर ब्याज दरें निम्नानुसार हेंगी :
एक से तीन वर्ष की परिपक्वतावाली नई अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) मीयादी जमाराशियों पर ब्याज दर पिछले माह के अंतिम कार्यदिवस की स्थिति के अनुसार अमरीकी डालर के लिए उसी परिपक्वतावाली लाइबोर/स्वैप दरों (31 जनवरी 2007 को कारोबार की समाप्ति से लागू लाइबोर/स्वैप दरों से 50 आधार अंक अधिक की तुलना में) से अधिक नही होनी चाहिए। तीन वर्ष की जमाराशियों के लिए उपर्युक्तानुसार निर्धारित ब्याज दरें तीन वर्ष से अधिक परिपक्वता वाली जमाराशियों के लिए भी लागू होंगी। ब्याज दरों में परिवर्तन उन एनआरई जमाराशियों पर भी लागू होंगे जो अपनी वर्तमान परिपक्वता अवधि के बाद नवीकृत की जाएंगी।
3.पहले जारी किए गए सभी अनुदेश यथावत बने रहेंगे। दिनांक 26 अप्रैल 2007 का संशोधनकारी निदेश ग्राआऋवि.सं.आरआरबी./डीआइआर.10053/03.05.33(सी)/2006-07 संलग्न है।
4. कृपया प्राप्ति सूचना हमारे संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को दें।
भवदीय
(सी.एस. मूर्ति) वर्ष 2007-08 के लिए वार्षिक नीति वक्तव्य के पैराग्राफ 114 और 116 ब्याज दर निर्धारण 114. अत्यधिक पूंजी आगम तथा उसके चलनिधि तथा मौद्रिक प्रबंधन पर होने वाले प्रभाव के परिप्रेक्ष्य में खासकर मुद्रास्फिति तथा भारत और शेष विश्व के बीच ब्याज दरों की भिन्नताओं को देखते हुए अनिवासी जमाराशियों अर्थात् विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) एफसीएनआर (बी) जमाराशियों तथा अनिवासी (बाह्य) रुपया खाता एनआर (ई) आरए जमाराशियों से संबंधित ब्याज दर निर्धारण की समीक्षा करना आवश्यक है। इस परिप्रेक्ष्य में निम्नलिखित उपाय प्रस्तावित हैं :
(ख) एनआर (ई) आरए जमाराशियों पर ब्याज दर 116. वर्तमान में एक से तीन वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली एनआर (ई) आरए जमाराशियों पर ब्याज दर की सीमा अमरीकी डालर के लिए तदनुरूपी परिपक्वता अवधि पर लागू लाइबोर /स्वैप दरों से 50 आधार अंक से अधिक नहीं होनी चाहिए। विद्यमान मौद्रिक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्ताव है कि :
ग्राआऋवि.सं.आरआरबी.डीआइआर.10053/03.05.33(सी)/2006-07 अप्रैल 26, 2007 अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) जमाराशियों पर ब्याज की दर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35 क द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा अनिवासी (बाह्य) (एनआरई) खातों मे धारित जमाराशियों पर ब्याज दर संबंधी दिनांक 9 फरवरी 2007 के निदेश ग्राआऋवि.सं.आरआरबी. डीआइआर/7240/03.05. 33(सी)/2006-07 में आंशिक संशोधन करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट होने पर कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक तथा समीचीन है, एतद्द्वारा निदेश देता है कि अनिवासी (बाह्य) रुपया जमाराशियों पर ब्याज की दरें निम्नानुसार होंगी : "24 अप्रैल 2007 को कारोबार की समाप्ति से एक से तीन वर्ष तक की परिपक्वतावाली अनिवासी (बाह्य) रुपया (एनआरई) मीयादी जमाराशियों पर ब्याज दर पिछले माह के अंतिम कार्य दिवस की स्थिति के अनुसार, अमरीकी डालर के लिए उसी परिपक्वतावाली लाइबोर/स्वैप दरों(31 जनवरी 2007 को कारोबार की समाप्ति से प्रभावी लाइबोर/स्वैप दरों से 50 आधार अंको की तुलना में) से अधिक नही होना चाहिए। तीन वर्ष तक की जमाराशियों के लिए उपर्युक्त निर्धारित ब्याज दरें उन जमाराशियों पर भी लागू होगीं जिनकी परिपक्वता अवधि तीन वर्ष से अधिक हो जाती है। ब्याज दरों में परिवर्तन उन एनआरई जमाराशियों पर भी लागू होंगे जो अपनी वर्तमान परिपक्वता अवधि के बाद नवीकृत की जाएंगी।" (वी. एस. दास ) |
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