कृषि को छोड़कर अन्य प्रकार के अंतिम उपयोग के लिए स्वर्ण आभूषण और जवाहरात की प्रतिभूति पर ऋण
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आरबीआई/2014-15/142 22 जुलाई 2014 अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी महोदया/महोदय कृषि को छोड़कर अन्य प्रकार के अंतिम उपयोग के लिए कृपया उपर्युक्त विषय पर 30 दिसंबर 2013 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. 79/21.04.048/2013-14 तथा 20 जनवरी 2014 का परिपत्र बैंपविवि. बीपी. बीसी. सं. 86/21.01.023/2013-14 देखें। 2. हमें बैंकों से अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें स्वर्ण आभूषणों और जवाहरात की गिरवी पर कृषीतर ऋणों, जहां ब्याज और मूलधन दोनों ऋण की परिपक्वता पर देय होते हैं, की निर्धारित उच्चतम सीमा बढ़ाने तथा अन्य शर्तों की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है। विशेषतः यह देखते हुए कि इन ऋणों पर हमारे 20 जनवरी 2014 के परिपत्र द्वारा मूल्य के प्रति ऋण अनुपात (एलटीवी) सीमा लागू की गई है। इस मामले की समीक्षा की गई तथा अब यह निर्णय लिया गया है कि कृषीतर प्रयोजन के लिए स्वर्ण आभूषणों और जवाहरात की गिरवी पर दिये गये ऋण, जहां ब्याज और मूलधन, दोनों ऋण की परिपक्वता पर देय हैं, निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहेंगे
3. इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया जाता है कि कृषीतर अंतिम उपयोगों के लिए स्वर्ण आभूषणों और जवाहरात की गिरवी पर दिए गए सभी ऋणों के लिए ऋण की संपूर्ण अवधि के दौरान 75 प्रतिशत एलटीवी बनाए रखा जाएगा। एलटीवी अनुपात की गणना उपचित ब्याज सहित खाते में कुल बकाया राशि तथा जमानत/संपार्श्विक के रूप में स्वीकार किए गए स्वर्ण आभूषणों के वर्तमान मूल्य, जिसका निर्धारण हमारे 20 जनवरी 2014 के परिपत्र में निर्धारित पद्धति के आधार पर किया जायेगा । 4. स्वर्ण के मूल्य निर्धारण के प्रयोजन से, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लि. द्वारा प्रसारित कीमतों के अलावा, बैंक अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार फॉरवर्ड मार्केट्स कमीशन द्वारा विनियमित किसी कमोडिटी एक्सचेंज द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रसारित ऐतिहासिक स्पॉट स्वर्ण मूल्य आंकड़ों का भी प्रयोग कर सकते हैं। भवदीय (सुदर्शन सेन) |
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