बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 - सांविधिक चलनिधि अनुपात बनाये रखना
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आरबीआइ/2007-08/236 13 फरवरी 2008 सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक आदरणीय महोदय/महोदया बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 - सांविधिक चलनिधि अनुपात बनाये रखना कृपया उपर्युक्त विषय पर 21 अक्तूबर 1997 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीसी. 137/ 12.02.001/ 97-98 देखें । बैंककारी विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2007 के स्थान पर बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2007, 23 जनवरी 2007 से लागू हुआ था। बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 में संशोधन के परिणामस्वरूप सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक 13 फरवरी 2008 की हमारी संलग्न अधिसूचना सं. बैंपविवि. बीसी. 61/12.02.001/2007-08 में यथा उल्लिखित आस्तियों में अपनी समस्त निवल मांग और मीयादी देयताओं पर 25 प्रतिशत का एकसमान सांविधिक चलनिधि अनुपात बनाये रखेंगे । भवदीय
(विनय बैजल)
संदर्भ : बैंपविवि. सं.आरईटी. बीसी.61/12.02.001/2007-08 13 फरवरी 2008
अधिसूचना
भारतीय रिज़र्व बैंक बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 24 की उप धारा (2क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा 21 अक्तूबर 1997 की अधिसूचना बैंपविवि. सं. बीसी. 117/11.02.001/97-98 में आंशिक संशोधन करते हुए एतद्वारा यह निर्दिष्ट करता है कि प्रत्येक अनुसूचित वाणिज्य बैंक भारत में निम्नानुसार आस्तियां रखना जारी रखेंगे जिनका मूल्य किसी भी दिन कारोबार की समाप्ति पर दूसरे पूर्ववर्ती पखवाड़े के अंतिम शुक्रवार को भारत में कुल निवल मांग और मीयादी देयताओं के 25 प्रतिशत से कम नहीं होगा। आस्तियों का मूल्य भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट की गयी मूल्यांकन विधि के अनुसार लगाया जाएगा । (क) नकदी, अथवा i. अनुबंध में दी गयी सूची के अनुसार दिनांकित प्रतिभूतियां ।
स्पष्टीकरण : किसी बैंकिंग कंपनी के "भाररहित निवेश" में अग्रिम अथवा किसी अन्य ऋण व्यवस्था के लिए किसी अन्य संस्था के पास रखी गयी उपर्युक्त प्रतिभूतियों में निवेश उस सीमा तक शामिल होगा जिस सीमा तक उन प्रतिभूतियों के बदले कोई आहरण न किया गया हो । उपर्युक्त प्रयोजन के लिए राशि की गणना हेतु निम्नलिखित को भारत में रखी गयी नकदी के रूप में माना जाएगा : i. भारत से बाहर निगमित किसी बैंकिंग कंपनी द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के पास बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 11 की उप धारा (2) के अंतर्गत रखे जाने के लिए अपेक्षित जमाराशियां;
iii. भारत में अन्य अनुसूचित वाणिज्य बैंकों के पास चालू खातों में निवल शेष । (आनंद सिन्हा) |
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