छोटे उधारखातों के लिए एकबारगी समझौता योजना और नए ऋण हेतु पात्रता
|
भारिबैं / 2005-06 / 241 दिसंबर 27, 2005 अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक छोटे उधारखातों के लिए एकबारगी समझौता योजना और नए ऋण हेतु पात्रता छोटे उधारकर्ताओं को बैंकों के पास उनके अनर्जक आस्ति खातों का निपटान करने और नए वित्त का पात्र होने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंकों को (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों सहित) सूचित किया जाता है कि वे उन सभी ऋणों को एकबारगी समझौते हेतु सरलीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराएँ जिनका मूलधन 25000/- रु. के समकक्ष अथवा उससे कम हो तथा जो दिनांक 30 सितंबर 2005 को संदिग्ध और हानिवाली आस्तियाँ हो गए हों ।
2. सरकार द्वारा प्रायेाजित योजनाओं के अन्तर्गत प्रदान किए गए ऋणों के संबंध में बैंक राज्य स्तरीय बैंकर समिति द्वारा राज्य विशिष्ट दृष्टिकोण का पालन करते हुए पृथक दिशानिर्देश तैयार कर सकते हैं । 3. तथापि, इस व्यवस्था में धोखाधड़ी और धाँधली वाले मामलों को शामिल नहीं किया जाएगा । 4.वे उधारकर्ता जिनके खाते इस व्यवस्था में निपटाए गए हों, पूर्ण रुप से नए ऋण के पात्र होंगे । 5. बैंक एक उचित योजना तैयार करें और उसके कार्यान्वयन हेतु उपाय आरंभ करें । 6. कृपया पावती दें । भवदीय
( जी.श्रीनिवासन ) मुख्य महाप्रबंधक |
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: