पूंजी पर्याप्तता तथा बाजार अनुशासन पर विवेकपूर्ण मानदंड - नया पूंजी पर्याप्तता ढांचा (एनसीएएफ)- समांतर प्रयोग तथा विवेकपूर्ण न्यूनतम सीमा
|
RBI/2009-10/385 7 अप्रैल 2010 सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक महोदय पूंजी पर्याप्तता तथा बाजार अनुशासन पर विवेकपूर्ण मानदंड - कृपया उपर्युक्त विषय पर 08 फरवरी 2010 के हमारे मास्टर परिपत्र का पैराग्राफ 2.4 देखें जिसके अनुसार बैंकों को सूचित किया गया था कि वे तत्कालीन चालू ढांचे (बासल I) के साथ-साथ समानांतर रूप से संशोधित ढांचे का प्रयोग करें । इसके अतिरिक्त, उपर्युक्त परिपत्र के पैराग्राफ 4.1.2 के अनुसार बैंकों को यह भी सूचित किया गया था कि उनके द्वारा रखी जाने वाली न्यूनतम पूंजी उक्त पैरा में उल्लिखित विवेकपूर्ण न्यूनतम सीमाओं के अधीन होगी । 2. अभी तक के कार्यान्वयन की समीक्षा के उपरांत यह निर्णय लिया गया है कि अगली सूचना जारी होने तक इसी विवेकपूर्ण न्यूनतम सीमा को जारी रखा जाए । तदनुसार, भारत में कार्यरत विदेशी बैंक तक भारत के बाहर कार्यरत भारतीय बैंक नियत तारीख (अर्थात् 31 मार्च 2010) के बाद भी समांतर रूप से संशोधित ढांचे पर अमल करना जारी रखेंगे और वे यह सुनिश्चित करेंगे कि बासल II के अनुसार ऋण तथा बाजार जोखिम के लिए उनकी न्यूनतम पूंजी अपेक्षा बासल I ढांचे के अनुसार परिगणित न्यूनतम पूंजी अपेक्षा के 80% से अधिक बनी हुई है । 3. अन्य सभी वाणिज्य बैंक (स्थानीय क्षेत्र बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर ) भी नए पूंजी पर्याप्तता ढांचा पर मास्टर परिपत्र के पैराग्राफ 4.1.2 के अनुसार निर्धारित विवेकपूर्ण न्यूनतम सीमा का अनुपालन सुनिश्चित करना जारी रखेंगे । 4. बासल II के समानांतर प्रयोग पर उपर्युक्त परिपत्र के पैराग्राफ 2.4 में निहित अन्य सभी दिशानिर्देशों का सभी बैंकों द्वारा अनुपालन किया जाना चाहिए । भवदीय (बी. महापात्र) |
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: