बैंकों के तुलनपत्रेतर एक्सपोजर के लिए विवेकपूर्ण मानदंड – आप्शन्स प्रीमियम का आस्थगन
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आरबीआई/2012-13/535
बैंपविवि.बीपी.बीसी.सं.102/21.04.157/2012-13
18 जून 2013
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक
(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर) और
अखिल भारतीय मीयादी ऋण और पुनर्वित्त देनेवाली संस्थाएं
महोदय/महोदया
बैंकों के तुलनपत्रेतर एक्सपोजर के लिए विवेकपूर्ण मानदंड – आप्शन्स प्रीमियम का आस्थगन
25 जनवरी 20121 से बैंकों को प्रयोक्ताओं को बेचे गए बिल्कुल सादा ऑप्शन्स के प्रीमियम को अपने विवेक से कुछ शर्तों के अधीन आस्थगित करने की अनुमति है। अब यह निर्णय लिया गया है कि यह सुविधा लागत में कमी लाने वाली फारेक्स आप्शन संरचनाओं को भी प्रदान किया जाए जिनमें किसी भी परिस्थिति में प्रयोक्ता की देनदारी बैंक को देय निवल प्रीमियम से कभी भी अधिक नहीं होती है। यह सुविधा निम्नलिखित शर्तों के अधीन दी जाएगीः
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बैंकों को चाहिए कि वे इस सुविधा को प्रयोक्ताओं को प्रदान करने से पहले इस संबंध में अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार प्रीमियम भुगतान अनुसूची का पालन करने की प्रयोक्ताओं की क्षमता के संबंध में आवश्यक छानबीन करें।
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ऑप्शन संरचना, जिसकी परिपक्वता 1 वर्ष से अधिक है, के प्रीमियम का भुगतान आस्थगित किया जा सकता है, बशर्ते प्रीमियम भुगतान की अवधि संविदा के परिपक्व होने की तिथि से परे न जाए।
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संविदा की परिपक्वता अवधि के दौरान प्रीमियम समान अंतराल पर समान रूप में प्राप्त किया जाना चाहिए तथा ऐसे भुगतान की आवधिकता कम से कम एक तिमाही में एक बार की होनी चाहिए।
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यह सुविधा उन संविदाओं के लिए अनुमत नहीं की जानी चाहिए जो अतीत के कार्यनिष्पादन पर आधारित हों।
2. ऐसी ऑप्शन संरचनाएं
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बैंकिंग परिचालन और विकास विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी 02 नवंबर 2011 के ‘डेरिवेटिव पर व्यापक दिशानिर्देशः संशोधन’ में निर्धारित संरचित डेरिवेटिव उत्पादों के संबंध में उपयुक्तता तथा औचित्यपूर्णता पर; और
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विदेशी मुद्रा विनिमय विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ‘जोखिम प्रबंधन और अंतर बैंक कारोबारों’ पर जारी 02 जुलाई 2012 के मास्टर परिपत्र में यथानिर्धारित लागत कटौती संरचनाओं पर
(समय-समय पर यथासंशोधित) अनुदेशों के अनुसार नियंत्रित होती रहेंगी।
भवदीय
(चंदन सिन्हा)
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक
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