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भारतीय रिज़र्व बैंक (जमा खातों, सुरक्षित जमा लॉकरों और बैंकों के पास सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई वस्तुओं में नामांकन सुविधा) निदेश 2025

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आरबीआई/2025-26/95
विवि.एमसीएस.आरईसी.59/01.01.003/2025-26

28 अक्तूबर 2025

भारतीय रिज़र्व बैंक (जमा खातों, सुरक्षित जमा लॉकरों और बैंकों के पास सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई वस्तुओं में नामांकन सुविधा) निदेश 2025

I. प्रस्तावना

नामांकन सुविधा का उद्देश्य ग्राहक की मृत्यु होने पर बैंकों द्वारा दावों का शीघ्र निपटान करना और परिवार के सदस्यों की कठिनाइयों को कम करना है। भारत सरकार ने बैंककारी विधि (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (अधिनियम) की धारा 45जेडए, 45जेडसी और 45जेडई में संशोधन किया गया है। बैंककारी कंपनी (नामांकन) नियमावली 2025 को भी अधिसूचित किया गया है, जो अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के साथ 1 नवंबर 2025 से लागू होगी। तदनुसार, संबंधित नामांकन नियमावली और बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 के संशोधित प्रावधानों के साथ विनियामक अनुदेशों को संरेखित करने के लिए, इस विषय पर मौजूदा अनुदेशों की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है।

II. प्रारंभिक

ए. प्रस्तावना

2. ये निदेश बैंकों को नामांकन सुविधा लागू करने हेतु विनियामक अनुदेश प्रदान करने के लिए जारी किए गए हैं और इन्हें बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 45जेडए से 45जेडजी (तथा सहकारी बैंकों पर लागू होने पर उक्त अधिनियम की धारा 56 के साथ) और उसके तहत बनाए गए नामांकन नियमों के साथ पढ़ा जाएगा।

बी. प्रयोग की गई शक्तियाँ

3. बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए (सहकारी बैंकों पर लागू होने पर उक्त अधिनियम की धारा 56 के साथ पठित) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक (जिसे इसके बाद रिज़र्व बैंक कहा जाएगा), इस बात से संतुष्ट होकर कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक और समीचीन है, एतद्द्वारा निम्नलिखित निदेश जारी करता है।

सी. संक्षिप्त शीर्षक

4. इन निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (जमा खातों, सुरक्षित जमा लॉकरों और बैंकों के पास सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई वस्तुओं में नामांकन सुविधा) निदेश, 2025 कहा जाएगा।

डी. प्रभावी तिथि

5. यह निदेश दिनांक 1 नवंबर 2025 से प्रभावी होंगे।

ई. प्रयोज्यता

6. यह निदेश सभी बैंकों पर लागू होंगे।

एफ. परिभाषाएँ

7. इन निदेशों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,

(ए)अधिनियम’ से तात्पर्य बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 से है।

(बी)बैंक’ से तात्पर्य बैंकिंग कंपनी, तत्संबंधी नए बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक से है, जैसा कि अधिनियम में परिभाषित किया गया है।

(सी) नियमावली’ से तात्पर्य बैंककारी कंपनी (नामांकन) नियमावली 2025 से है।

III. जमा खातों, सुरक्षित जमा लॉकरों और सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई वस्तुओं में नामांकन सुविधा

जी. नामांकन सुविधा

8.(1) बैंक अधिनियम की धारा 45जेडए, 45जेडबी और 45जेडजी (सहकारी बैंकों पर लागू होने पर अधिनियम की धारा 56 के साथ पठित) और नियमावली के प्रावधानों के अनुसार जमा खातों में नामांकन सुविधा प्रदान करेगा।

(2) बैंक को सुरक्षित जमा लॉकरों और सुरक्षित अभिरक्षा में रखी वस्तुओं में नामांकन के मामले में अधिनियम की धारा 45जेडसी से 45जेडजी (सहकारी बैंकों पर लागू होने पर अधिनियम की धारा 56 के साथ पठित) और नियमावली के प्रावधानों द्वारा निर्देशित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण: इन निदेशों के प्रयोजन के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि कोई व्यक्ति अपने स्वामित्व वाले व्यवसाय के लिए खाता रख रहा है, तो इसे उस व्यक्ति का खाता माना जाएगा और ऐसे खातों में नामांकन सुविधा प्रदान की जाएगी।

एच. ग्राहकों को नामांकन नहीं करने का विकल्प

9.(1) खाता खोलते समय, बैंक भावी ग्राहक को नामांकन सुविधा की उपलब्धता और प्रयोजन के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करेगा और उसे इसका लाभ उठाने का विकल्प प्रदान करेगा। बैंक भावी ग्राहक को नामांकन सुविधा के लाभों के बारे में भी स्पष्ट रूप से व्याख्या करेगा, जिसमें खाताधारक के निधन की स्थिति में दावा प्रक्रिया का सरलीकरण और बिना किसी विधिक जटिलता के नामिती को निधि का सुचारू तथा त्वरित अंतरण शामिल है, लेकिन जो इन्हीं तक सीमित नहीं है।

(2) यदि भावी ग्राहक पूरी जानकारी होने के बावजूद नामांकन सुविधा का लाभ नहीं उठाना चाहता है, तो बैंक, खाता खोलते समय व्यक्ति से लिखित घोषणा प्राप्त करने के बाद, कि उसे नामांकन सुविधा की आवश्यकता नहीं है, किसी प्रतिबंध को लगाए बिना, यदि अन्यथा पात्र पाया जाता है, जमा खाता खोलने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। यदि वह लिखित घोषणा देने से इनकार करता है, तो बैंक लिखित पुष्टि प्रस्तुत करने से इनकार करने के तथ्य को खाता खोलने के रिकॉर्ड में दर्ज करेगा।

(3) किसी भी परिस्थिति में किसी भावी ग्राहक को केवल नामांकन करने से इनकार करने के आधार पर खाता खोलने में विलंब अथवा खाता खोलने से मना नहीं किया जाएगा, बशर्ते खाता खोलने के लिए अन्य सभी आवश्यकताएं संतोषजनक रूप से पूरी की गई हों।

आई. प्रासंगिक मामले

10. समकालिक नामांकन के मामले में, यदि किसी नामिती की बैंक से जमा राशि प्राप्त करने से पहले मृत्यु हो जाती है, तो अकेले ऐसे नामिती के संबंध में नामांकन अप्रभावी हो जाएगा। तदनुसार, बैंक ऐसे नामिती के पक्ष में जमा राशि के दावों का निपटान, समय-समय पर संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक (बैंकों के दिवंगत ग्राहकों के संबंध में दावों का निपटान) निदेश, 2025 में निहित नामिती खंड रहित खातों के लिए लागू प्रावधानों के अनुसार करेगा।

11. यदि किसी व्यक्ति को भुगतान किसी अन्य विधि के तहत विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए किए गए नामांकन के आधार पर किया जाता है, तो बैंक अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैध निर्वहन का दावा नहीं कर सकता है।

12. बैंक के पास ग्राहकों के अनुरोध के अनुसार नामांकन के पंजीकरण, निरस्तीकरण और परिवर्तन को अपनी बहियों में दर्ज करने के लिए उपयुक्त प्रणालियां और प्रक्रियाएं होनी चाहिए।

13.(1) बैंक को नामांकन के पंजीकरण, निरस्तीकरण और/या परिवर्तन के विधिवत भरे गए प्रपत्रों की प्राप्ति की पावती देने के लिए उचित प्रणालियां विकसित करनी होंगी।

(2) बैंक अपने ग्राहकों को पावती प्रदान करने से पहले यह सत्यापित और सुनिश्चित करेगा कि उनके द्वारा किया गया नामांकन अधिनियम और नियमों के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार है।

(3) ऐसी पावती ग्राहकों को पंजीकरण, नामांकन के निरस्तीकरण और/या परिवर्तन के प्रपत्र प्राप्त होने के तीन कार्य दिवसों के भीतर दी जाएगी, चाहे ग्राहक द्वारा इसके लिए कहा गया हो या नहीं।

(4) जहां नामांकन अनुरोध अधिनियम या नियमों के प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाया जाता है और परिणामस्वरूप उसे अस्वीकार कर दिया जाता है, बैंक अनुरोध प्रपत्र प्राप्त होने के तीन कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक को लिखित रूप में सूचित करेगा, जिसमें अस्वीकृति के कारणों का स्पष्ट उल्लेख होगा।

जे. पासबुक/खाता विवरण और सावधि जमा रसीद (टीडीआर) में नामांकन का विवरण और नामिती का नाम

14.(1) बैंक पासबुक/खाता विवरण और टीडीआर के मुखपृष्ठ पर नामांकन पंजीकरण की स्थिति को "नामांकन पंजीकृत" के साथ दर्ज करेगा।

(2) ऐसे मामलों में बैंक को पासबुक/खाता विवरण और टीडीआर में नामिती(यों) का नाम भी दर्शाना होगा।

के. ग्राहक मार्गदर्शन और नामांकन के लाभों का प्रचार

15.(1) बैंक नामांकन सुविधा के लाभों के बारे में जमा खाताधारकों, लॉकर किरायेदारों और सुरक्षित अभिरक्षा में रखी वस्तुओं के जमाकर्ताओं को व्यापक प्रचार तथा मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इसमें चेक बुक, पासबुक और अन्य साहित्य पर अनुकूल संदेश छापकर ग्राहकों तक पहुंचाना तथा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाना शामिल हो सकता है।

(2) बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि जमा खाते खोलने, सुरक्षित जमा लॉकर किराए पर लेने और सुरक्षित अभिरक्षा में सामान जमा करने के लिए प्रपत्र में नामांकन का विवरण प्राप्त करने के लिए स्थान हो, जो ग्राहकों को ऐसी सुविधा की उपलब्धता के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से भी कार्य करता है।

IV. विविध

एल. निरसन प्रावधान

16.(1) इन निदेशों के जारी होने के साथ ही, रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुबंध में उल्लिखित परिपत्रों में निहित अनुदेश इन निदेशों की प्रभावी तिथि से निरस्त हो जाएंगे।

(2) निरसन प्रावधानों के बावजूद, निरसित अनुदेशों के अंतर्गत किया गया कोई भी कार्य या की गई कोई भी कार्रवाई वैध मानी जाएगी, जब तक कि वह उन अनुदेशों के अनुरूप किया गया हो।

(वीणा श्रीवास्तव)
मुख्य महाप्रबंधक


अनुबंध

निरस्त किए गए परिपत्रों की सूची

सं.क्र.

परि.सं.

दिनांक

विषय

1

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.37/सी.233ए-86

21 मार्च 1986

बैंककारी विधि (संशोधन) अधिनियम, 1983 - बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 45ज़ेडए से 45ज़ेडएफ़ और बैंककारी कंपनियां (नामांकन) नियम, 1985 - नामांकन सुविधाएं
(i) जमाकर्ता की मृत्यु का प्रमाण और
(ii) नामांकित व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए दावा प्रारूप

2

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.36/सी.90(एच)(डी)-86   

21 मार्च 1986

बैंककारी कंपनियां (नामांकन) नियम, 1985

3

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.58.सी.233ए-86     

14 मई 1986

बैंककारी विधि (संशोधन) अधिनियम, 1983 और
बैंकिंग कंपनियां (नामांकन) नियम, 1985

4

यूबीडी.बीआर.13/ए6-86/87

11 अगस्त 1986

बैंककारी विधि (संशोधन) अधिनियम, 1983 – बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 45ज़ेडए से 45ज़ेडएफ़ -
सहकारी बैंक (नामांकन) नियम, 1985 - नामांकन सुविधाएँ

5

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.98/सी.90(एच)(डी)-88

25 फरबरी 1988

 नामांकन सुविधाएं

6

आरपीसीडी.सं.आरएफ़.बीसी.110/डी.1-87/98

26 मई 1988

मृत ग्राहकों के खातों में शेष राशि का भुगतान उत्तरजीवी/दावेदारों और नामांकन सुविधाओं को करना

7

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.90/सी466(IV)-91 

28 फरबरी 1991

बैंकों में ग्राहक सेवा पर कार्य समूह
(सिफारिश संख्या 30) और नामांकन सुविधा का लोकप्रियकरण

8

यूबीडी.सं.पीओटी.19/यूबी.38-92/93

 06 अक्तूबर 1992

बैंकों में ग्राहक सेवा पर समिति - सिफारिशों का कार्यान्वयन

9

आरपीसीडी.सं.डीसी.111/07.38.01-92/93

12 मई 1993

'ग्राहक सेवा' पर परिपत्र के अनुलग्नक में 'जमा और अन्य खाते - नामांकन सुविधाएं' पर क्रम संख्या 5, 6 और 7

10

यूबीडी.सं.पीओटी.65/09.39.00/93-94

7 मार्च 1994

बैंकों में ग्राहक सेवा पर समिति - गोइपोरिया समिति की सिफारिशों का कार्यान्वयन - शिकायत पुस्तिका का रखरखाव

11

डीबीओडी.सं.बीसी.15/09.08.004/96-97

28 फरबरी 1997

बैंककारी विधि (संशोधन) अधिनियम, 1983 और
बैंककारी कंपनियां (नामांकन) नियम, 1985

12

डीबीओडी.बीसी.सं.59/09.07.007/98-99 

28 मई 1999

एकल जमा खातों में नामांकन सुविधा

13

यूबीडी.सं.बीआर.32/16.04.00/98-99

28 दिसंबर 1999

एकल जमा खातों में नामांकन सुविधा

14

डीबीओडी.सं.एलईजी.5049/09.07.005/2006-07   

4 दिसंबर 2006

सुरक्षित जमा लॉकर/सुरक्षित अभिरक्षा लेख सुविधा का विस्तार और बैंकों द्वारा सुरक्षित जमा लॉकरों तक पहुंच/सुरक्षित अभिरक्षा लेखों की वापसी

15

डीबीओडी.सं.एलईजी बीसी.75/ 09.07.005/2006-07 

5 अप्रैल 2007

एकल जमा खातों में नामांकन सुविधा

16

आरपीसीडी.केंका.आरएफ़.बीसी.सं.70/07.38.01/2006-07  

12 अप्रैल 2007

एकल जमा खातों में नामांकन सुविधा

17

आरपीसीडी. केंका.आरआरबी.बीसी.सं.71/03.05.33/2006-07

13 अप्रैल 2007

एकल जमा खातों में नामांकन सुविधा

18

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.78/09.07.005/2006-07  

17 अप्रैल 2007

सुरक्षित जमा लॉकर/सुरक्षित अभिरक्षा लेख सुविधा का विस्तार और
बैंकों द्वारा सुरक्षित जमा लॉकरों तक पहुँच/सुरक्षित अभिरक्षा लेखों की वापसी

19

यूबीडी.केंका.बीपीडी.परि सं.36/ 13.01.000/ 2006-07

19 अप्रैल 2007

एकल जमा खातों में नामांकन सुविधा - शहरी सहकारी बैंक

20

आरपीसीडी.केंका.आरएफ़.बीसी.सं.95/07.38.01/2006-07

18 मई 2007

सुरक्षित जमा लॉकर/सुरक्षित अभिरक्षा लेख सुविधा का विस्तार और
सुरक्षित जमा लॉकरों तक पहुँच/बैंकों द्वारा सुरक्षित अभिरक्षा लेखों की वापसी

21

यूबीडी.केंका.बीपीडी.सं.47/12.05.001/2006-07

21 जून 2007

सुरक्षित जमा लॉकर/सुरक्षित अभिरक्षा लेख सुविधा का विस्तार और
बैंकों द्वारा सुरक्षित जमा लॉकरों तक पहुँच/सुरक्षित अभिरक्षा लेखों की वापसी

22

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.114/09.07.005/2008-09 

 9 मार्च 2009

बैंककारी कंपनियाँ (नामांकन) नियम, 1985 - नामांकन की पावती और
पासबुक/सावधि जमा रसीदों में नामिती का नाम दर्शाना

23

यूबीडी.केंका.बीपीडी.(पीसीबी).परि.सं.56/09.39.000/2008-09  

 12 मार्च 2009

 

सहकारी बैंक (नामांकन) नियम, 1985- नामांकन की पावती और पासबुक/सावधि जमा रसीदों में नामिती का नाम दर्शाना

24

आरपीसीडी.केंका.आरआरबी.बीसी.स.103/03.05.28-ए/2008-09

 13 मार्च 2009

बैंककारी कंपनी (नामांकन) नियम, 1985- नामांकन की पावती और पासबुक/सावधि जमा रसीदों में नामिती का नाम दर्शाना

25

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.83/09.07.005/2010-11               

 30 मार्च 2011

बैंककारी कंपनी (नामांकन) नियम, 1985 - स्पष्टीकरण

26

डीबीओडी.सं.एलईजी.बीसी.89/09.07.005/2011-12   

 26 मार्च 2012

बैंककारी कंपनी (नामांकन) नियम, 1985 - स्पष्टीकरण

27

यूबीडी.बीपीडी (पीसीबी) परि.सं. 25/13.01.000/2012-13

 3 दिसंबर 2012

सहकारी बैंक (नामांकन) नियम, 1985 - स्पष्टीकरण

28

आरपीसीडी.आरआरबी.बीसी.सं.51/03.05.33/2012-13

 12 दिसंबर 2012

बैंककारी कंपनी (नामांकन) नियम, 1985 - स्पष्टीकरण

29

आरपीसीडी.केंका.आरसीबी.बीसी.सं.53/07.51.010/2012-13

 24 दिसंबर 2012

सहकारी बैंक (नामांकन) नियम, 1985 - स्पष्टीकरण

30

आरपीसीडी.केंका.आरसीबी.बीसी.सं.6335/07.51.010/2012-13 

 24 दिसंबर 2012

सहकारी बैंक (नामांकन) नियम, 1985 - स्पष्टीकरण

31

विवि.एलईजी.आरईसी/40/09.07.005/2021-22

 18 अगस्त 2021

पैरा 5.1: नामांकन सुविधा

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