संपूर्ण प्रणाली की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का वित्तीय विनियमन तथा बैंकों से उनका संबंध
भारिबैं / 2006-07/202संदर्भ : ग्राआऋवि.केका.आरएफ.बीसी. 38 /07.02.01/2006-07
11 दिसंबर 2006
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सभी अनुसूचित राज्य सहकारी बैंक तथा महोदय भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 42 (1) - सीआरआर बनाए रखना कृपया उपर्युकमत विषय पर 22 जून 2006 का हमारा परिपत्र ग्राआऋवि. आरएफ. बीसी. 93/ 07.02.01/ 2005-06 (भारिबैं/2005-06/424) देखें । वर्तमान समष्टि अर्थिक और मौद्रिक परिस्थितियों की समीक्षा करने पर, यह निर्णय लिया गया है कि सभी अनुसूचित राज्य सहकारी बैंकों तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर) में उनके निवल मांग तथा मीयादी देयताओं (एनडीटीएल) के आधे प्रतिशत की दो चरणों में वृद्धि की जाए , जो नीचे उल्लिखित पखवाड़ों से लागू होगी :
इससे संबंधित 11 दिसंबर 2006 की अधिसूचना ग्राआऋवि.आरएफ.सं. 5541/ 07.02.01/ 2006-2007 की प्रतिलिपि संलग्न है। कृपया हमारे संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों को प्राप्ति-सूचना दें । भवदीय (के.भट्टाचार्य)महाप्रबंधक ग्राआऋवि.आरएफ.सं. 5541 /07.02.01/2006-2007 11 दिसंबर 2006 अधिसूचना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 42 की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शकिमतयों का उपयोग करते हुए तथा 22 जून 2006 की अपनी अधिसूचना ग्राआऋवि.आरएफ.सं. 6106 /07.02.01/2005-2006 का अधिक्रमण करते हुए , भारतीय रिज़र्व बैंक एतद्वारा विनिर्दिष्ट करता है कि अनुसूचित राज्य सहकारी बैंकों तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा रखा जानेवाला अपेक्षित औसत आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर) नीचे उल्लिखित प्रभावी तारीखों से, उनके समक्ष दर्शाए गए अनुसार होगा।
(वी.एस.दास) कार्यपालक निदेशक |
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