भारत सरकार द्वारा जारी गैर-एसएलआर प्रतिभूतियों का मूल्यांकन
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आरबीआइ/2007-08/356 4 जून 2008 अखिल भारतीय मीयादी ऋणदात्री और पुनर्वित्त प्रदान करनेवाली संस्थाओं महोदय भारत सरकार द्वारा जारी गैर-एसएलआर प्रतिभूतियों का मूल्यांकन
कृपया ‘वित्तीय संस्थाओं द्वारा निवेश संविभाग के वर्गीकरण, मूल्यांकन और परिचालन के लिए विवेकपूर्ण मानदंड’ पर 2 जुलाई 2007 का हमारा मास्टर परिपत्र बैंपविवि. सं. एफआइडी. एफआइसी. 3/01.02.00/ 2007-08 देखें । 2. ऐसा देखा गया है कि भारत सरकार ने पिछले कई वर्षो से समय-समय पर ऐसी अनेक विशेष प्रतिभूतियाँ जारी की हैं जो बैंकों की एसएलआर अपेक्षाओं के अनुपालन के प्रयोजन के लिए पात्र नहीं हैं। ऐसी सरकारी प्रतिभूतियों पर अलग निबंधन और शर्तें लागू हैं तथा इनमें गैर-चलनिधि स्प्रेड उच्चतर रहता है। वर्तमान में ऐसी गैर-एसएलआर ऋण प्रतिभूतियों के मूल्यांकन के संबंध में फिम्मडा द्वारा जारी दिशानिर्देशों में यह प्रावधान है कि ऐसी प्रतिभूतियों का मूल्यांकन भारत सरकार प्रतिभूतियों के तदनुरूप प्रतिफल पर 50 आधार अंकों का ‘मार्क-अप’ लागू कर किया जाए । 3. ऐसी विशेष प्रतिभूतियों के मूल्यांकन के मुद्दे की जाँच की गयी है। यह निर्णय लिया गया है कि मूल्यांकन के सीमित प्रयोजन के लिए, भारत सरकार द्वारा सीधे लाभार्थी संस्थाओं को जारी सभी विशेष प्रतिभूतियों, जिन्हें एसएलआर का दर्जा नहीं है, का मूल्यांकन भारत सरकार प्रतिभूतियों के तदनुरूपी प्रतिफल के ऊपर 25 आधार अंक स्प्रेड पर किया जाएगा। यह संशोधन वित्तीय वर्ष 2008-09 से लागू होगा। 4. यह नोट किया जाए कि वर्तमान में ऐसी विशेष प्रतिभूतियों में निम्नलिखित शामिल हैं : तेल बांड, उर्वरक बांड तथा भारतीय यूनिट ट्रस्ट, आइएफसीआइ लिमिटेड, भारतीय खाद्य निगम, भारतीय औद्योगिक निवेश बैंक लिमिटेड, पूर्ववर्ती भारतीय औद्योगिक विकास बैंक और पूर्ववर्ती जहाजरानी विकास वित्त निगम को जारी बांड। भवदीय
(विनय बैजल)
मुख्य महाप्रबंधक |
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