वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एफएसडीसी उप-समिति की 24 वीं बैठक
18 जून 2020 वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एफएसडीसी उप-समिति की 24 वीं बैठक आज वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित की गई। श्री शक्तिकान्त दास, गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक ने बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उप-समिति के सदस्य- श्री अजय भूषण पांडे, वित्त सचिव और सचिव, राजस्व विभाग; श्री अजय प्रकाश साहनी, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय श्री देबाशीष पांडा, सचिव, वित्तीय सेवा विभाग; श्री राजेश वर्मा, सचिव, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय; श्री तरुण बजाज, सचिव, आर्थिक कार्य विभाग; डॉ. कृष्णमूर्ति सुब्रमणियन, मुख्य आर्थिक सलाहकार; श्री अजय त्यागी, अध्यक्ष, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड; डॉ. सुभाष चंद्र खुंटिया, अध्यक्ष, बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई); श्री सुप्रतिम बंद्योपाध्याय,अध्यक्ष, पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) डॉ.एम.एस. साहू, अध्यक्ष, भारतीय दिवाला एवं धन शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई); रिजर्व बैंक के उप-गवर्नर - श्री बी.पी. कानूनगो, श्री महेश कुमार जैन और डॉ माइकल देबवत्र पात्र; डॉ. शशांक सक्सेना, सचिव, वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद; और डॉ. ओ.पी.मल्ल, कार्यपालक निदेशक, रिज़र्व बैंक ने भाग लिया। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए गवर्नर ने अपने परिचयात्मक संबोधन में इस बैठक के महत्व को रेखांकित किया, जो महामारी के आरंभ होने के बाद पहली बार और माननीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में 28 मई 2020 को आयोजित अंतिम एफएसडीसी बैठक की अनुवर्ती बैठक के रूप में आयोजित की गई थी। गवर्नर ने यह भी उल्लेख किया कि बीच में नियामकों और मंत्रालयों के बीच लगातार बातचीत हुई है। एफएसडीसी-एससी सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और नियामकों के बीच और साथ ही नियामकों के बीच चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में बना हुआ है। उप-समिति ने वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करने वाली प्रमुख गतिविधियों की समीक्षा की। अन्य बातों के अलावा, उप-समिति ने फिनटेक (आईआरटीजी-फिनटेक) और वित्तीय शिक्षा पर राष्ट्रीय कार्यनीति (एनएसएफई) 2020-2025 पर एक अंतर नियामक तकनीकी समूह की स्थापना के प्रस्ताव के बारे में भी चर्चा की। इसने दिवाला एवं धन शोधन अक्षमता कोड (आईबीसी), 2016 और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली के तहत स्थिति और विकास पर विचार-विमर्श किया। कुल मिलाकर, प्रचलित असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए, उप समिति ने सर्वसम्मति से संकल्प लिया कि (क) प्रत्येक प्रतिभागी नियामक और मंत्रालय उभरती चुनौतियों के प्रति सजग और सतर्क रहेंगे; (ख) औपचारिक और अनौपचारिक रूप से, साथ ही सामूहिक रूप से और अधिक बार बातचीत करेंगे; और (ग) अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और वित्तीय स्थिरता को संरक्षित करने के लिए जो कुछ भी आवश्यक है वह करेंगे। (योगेश दयाल) प्रेस प्रकाशनी: 2019-2020/2513 |
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