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वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान भारत के भुगतान संतुलन की गतिविधियां

1 सितंबर 2014

वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के
दौरान भारत के भुगतान संतुलन की गतिविधियां

वित्तीय वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही अर्थात् अप्रैल-जून के लिए भारत के भुगतान संतुलन (बीओपी) पर प्रारंभिक आंकड़े अब उपलब्‍ध हो गए हैं और इन्‍हें विवरण I और II में प्रस्‍तुत किया गया है। जबकि विवरण I बीओपी आंकड़ो को बीपीएम 6 प्रारूप में प्रस्‍तुत करता है और विवरण II इन आंकड़ों को पुराने प्रारूप में उपलब्‍ध कराता है।

अप्रैल-जून 2014 के दौरान भारत के भुगतान संतुलन की गतिविधियां

  • भारत का वर्तमान चालू खाता घाटा (सीएडी) वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 21.8 बिलियन अमरीकी डॉलर (जीडीपी का 4.8 प्रतिशत) से काफी कम होकर वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 7.8 बिलियन अमरीकी डॉलर (जीडीपी का 1.7 प्रतिशत) हो गया। तथापि, यह वर्ष 2013-14 की चौथी तिमाही में 1.2 बिलियन अमरीकी डॉलर (जीडीपी का 0.2 प्रतिशत) से अधिक रहा। कम चालू खाता घाटा मुख्‍य रूप से व्‍यापार घाटे में कमी के कारण रहा जिसका श्रेय निर्यात में वृद्धि और आयात में कमी दोनों को जाता है।

  • भुगतान संतुलन आधार पर व्‍यापारिक वस्‍तुओं का निर्यात वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 1.5 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 10.5 प्रतिशत तक बढ़ा।

  • दूसरी तरफ व्‍यापारिक वस्‍तुओं का आयात (बीओपी आधार पर) वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 6.5 प्रतिशत तक सुधर कर 116.4 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया। आयात में गिरावट मुख्‍य रूप से स्‍वर्ण आयात में 57.2 प्रतिशत की भारी कमी के कारण हुई जो वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 16.5 बिलियन अमरीकी डॉलर की तुलना में काफी कम होकर 7.0 बिलियन अमरीकी डॉलर पहुंच गई। उल्‍लेखनीय रूप से गैर-स्‍वर्ण आयात में पिछले वर्ष की इस अवधि में 0.6 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में इस वर्ष 1.3 प्रतिशत की हल्‍की वृद्धि दर्ज की गई जो आर्थिक कार्यकलाप में कुछ पुनरूत्‍थान दर्शाती है।

  • परिणामस्‍वरूप, व्‍यापारिक वस्‍तुओं का व्‍यापार घाटा (बीओपी आधार पर) पिछले वर्ष की इस अवधि में 56.5 बिलियन अमरीकी डॉलर से लगभग 31.4 प्रतिशत कम होकर वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 34.6 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गया।

  • सेवाओं के उच्‍चतर निर्यात के कारण वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में निवल सेवा प्राप्‍तियों में थोड़ा सुधार हुआ। वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में निवल सेवाएं 1.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर 17.1 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गई हैं।

  • प्राथमिक आय (लाभ, लाभांश और ब्‍याज) के कारण निवल बहिर्वाह वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 6.7 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया जो वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 4.8 बिलियन अमरीकी डॉलर और पिछली तिमाही (6.4 बिलियन अमरीकी डॉलर) से अधिक रहा। वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में सकल निजी अंतरण प्राप्तियां 17.5 बिलियन अमरीकी डॉलर रही, फिर भी ये वर्ष 2013-14 की इस तिमाही की तुलना में थोड़ी कम रही। वास्‍तव में वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में निजी अंतरणों ने पिछली तिमाही से लगभग 6 प्रतिशत की उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्शाई, यह संभव‍त: रुपया के अवमूल्‍यन के प्रति सकारात्‍मक रवैया दर्शाती है।

  • निवल आधार पर वित्तीय खाते में वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश और संविभाग निवेश में अंतर्वाह दर्ज किया गया। जबकि संविभाग निवेश के कारण निवल अंतर्वाह वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 0.2 बिलियन अमरीकी डॉलर के बहिर्वाह की तुलना में इस वर्ष 12.4 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, निवल प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश अंतर्वाह काफी अधिक बढ़कर 8.2 बिलियन अमरीकी डॉलर (वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 6.5 बिलियन अमरीकी डॉलर) हो गया।

  • जमाराशि स्‍वीकार करने वाले निगमों (वाणिज्यिक बैंक) द्वारा लिए गए ऋण (निवल) में समुद्रपारीय उधारों के उच्‍चतर भुगतान तथा उनकी समुद्रपारीय विदेशी मुद्रा आस्तियों के निर्माण से वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 2.6 बिलियन अमरीकी डॉलर का बहिर्वाह देखा गया। ‘’मुद्रा और जमाराशियां’’ के अंतर्गत अनिवासी भारतीयों की जमाराशियों का निवल प्रवाह वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 5.5 बिलियन अमरीकी डॉलर तक रहा। अन्‍य क्षेत्रों (अर्थात बाह्य वाणिज्यिक उधार) का ऋण (निवल) वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 0.9 बिलियन अमरीकी डॉलर की तुलना में 1.7 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा। पिछली तीन तिमाहियों के निवल बहिर्वाह को दर्ज करने के बाद निवल व्‍यापार घाटा और अग्रिमों में 0.2 बिलियन निवल अंतर्वाह दर्ज किया गया जो वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 2.5 बिलियन अमरीकी डॉलर से कम था।

  • भुगतान संतुलन आधार पर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में वर्ष 2013-14 की पहली तिमाही में 0.3 बिलियन अमरीकी डॉलर के कम आहरण की तुलना में वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 11.2 बिलियन अमरीकी डॉलर की निवल अभिवृद्धि हुई (सारणी I)।

सारणी 1 : भारत के भुगतान संतुलन की प्रमुख मदें

(बिलियन अमरीकी $)

 

अप्रैल-जून 2014 (प्रा.)

अप्रैल-जून 2013 (आं.सं.)

जमा

नामे

निवल

जमा

नामे

निवल

ए. चालू खाता

139.2

147.0

-7.8

130.9

152.7

-21.8

1. सामान

81.7

116.4

-34.6

73.9

124.4

-50.5

जिसमें से:

           

पीओएल

15.8

40.8

-25.0

14.2

39.2

-25.0

2. सेवाएं

37.6

20.5

17.1

36.5

19.7

16.9

3. प्राथमिक आय

2.3

9.0

-6.7

2.5

7.4

-4.8

4. द्वितीय आय

17.6

1.1

16.4

18.0

1.3

16.7

बी. पूंजी खाता और वित्तीय खाता

147.3

138.6

8.6

135.1

114.2

20.9

जिसमें से:

           

आरक्षित निधियों में बदलाव (वृद्धि (-)/कमी (+))

 

11.2

-11.2

0.3

 

0.3

सी. भूल-चूक (-) (ए+बी)

   

-0.8

   

0.9

प्रा: प्रारंभिक; आं.सं. : आंशिक रूप से संशोधित
टिप्पणी: पूर्णांकन के कारण उप-घटकों का योग भिन्न हो सकता है।

अजीत प्रसाद
सहायक महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2014-2015/442

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