भारत की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति (आईआईपी) : जून 2014
30 सितंबर 2014 भारत की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति (आईआईपी) : जून 20141 अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति, एक सांख्यिकीय विवरण है जो एक कालावधि के अंत तक, किसी अर्थव्यवस्था के (अ) निवासियों की वित्तीय आस्तियों का, जो अनिवासियों पर दावे होते हैं, तथा आरक्षित आस्तियों के रूप में धारित स्वर्ण बुलियन का और (ब) निवासियों की अनिवासियों के प्रति वित्तीय देयताओं के मूल्य और संरचना बताती है। एक अर्थव्यवस्था की बाह्य वित्तीय आस्तियों और देयताओं के बीच का अंतर उस अर्थव्यवस्था की शुद्ध अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति होती है जो धनात्मक अथवा ऋणात्मक हो सकती है। इस प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय लेखों का तुलन पत्र विश्लेषण, अर्थव्यवस्था के बाह्य क्षेत्र में टिकने की क्षमताओं और दुर्बलताओं को समझने और उसका विश्लेषण करने में मदद करता है। जून 2014 को समाप्त तिमाही की भारत की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति के मुख्य अंश नीचे प्रस्तुत हैं:
IV. ऋण देयताओं की तुलना में ऋणेतर देयताएँ
अजीत प्रसाद प्रेस प्रकाशनी : 2014-2015/679 1भारत की तिमाही अंतर्राष्ट्रीय स्थिति एक तिमाही के अंतराल के साथ प्रसारित की जा रही है और मार्च 2014 के अंत में पिछली तिमाही की आईआईपी 30 जून 2014 को वेबसाइट पर डाली गई थी। | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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