भारत की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति: सितंबर 2013 तिमाही
31 दिसंबर 2013 भारत की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति: सितंबर 2013 तिमाही अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति, एक सांख्यिकीय विवरण है जो एक कालावधि के अंत तक, किसी अर्थव्यवस्था के (अ) निवासियों की वित्तीय आस्तियों का, जो अनिवासियों पर दावे होते हैं, तथा आरक्षित आस्तियों के रूप में धारित स्वर्ण बुलियन का और (ब) निवासियों की अनिवासियों के प्रति वित्तीय देयताओं के मूल्य और संरचना बताती है। एक अर्थव्यवस्था की बाह्य वित्तीय आस्तियों और देयताओं के बीच का अंतर उस अर्थव्यवस्था की शुद्ध अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति होती है। इस प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय लेखों का तुलन पत्र विश्लेषण, अर्थव्यवस्था के बाह्य क्षेत्र के टिकने की क्षमताओं और दुर्बलताओं को समझने में मदद करता है। सितंबर 2013 को समाप्त तिमाही की भारत की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति के मुख्य अंश नीचे प्रस्तुत हैं: अनिवासियों के भारत पर शुद्ध दावे (जो शुद्ध अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति दर्शाती है), पिछली तिमाही से 12.8 बिलियन अमरीकी डॉलर कम हो कर सितंबर 2013 अंत तक 296.2 बिलियन अमरीकी डॉलर हुए। शुद्ध स्थिति में यह परिवर्तन, भारत में विदेशी-स्वाधिकृत आस्तियों के मूल्य में 10.6 बिलियन अमरीकी डॉलर की गिरावट की तुलना में, भारतीय निवासियों की विदेश में वित्तीय आस्तियों के मूल्य में 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर की वृद्धि को प्रतिबिंबित करता है (तालिका 1)। भारतीय निवासियों की विदेश में वित्तीय आस्तियाँ, सितंबर 2013 के अंत तक, पिछली तिमाही से 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर की अत्यल्प बढ़ोतरी से 436.7 बिलियन अमरीकी डॉलर रहीं, जो मुख्यत: विदेश में अन्य निवेश में (व्यापार ऋण, ऋण और मुद्रा और जमा राशियों को मिला कर) 6.8 बिलियन अमरीकी डॉलर की वृद्धि के कारण था। आरक्षित आस्तियाँ सितंबर 2013 अंत तक 5.3 बिलियन अमरीकी डॉलर की क्षति से 277.2 बिलियन अमरीकी डॉलर हुईं। प्रत्यक्ष निवेश 0.6 बिलियन अमरीकी डॉलर से मामूली बढ़ा। भारत में विदेशी-स्वाधिकृत आस्तियों में पिछली तिमाही से 10.6 बिलियन अमरीकी डॉलर की कमी हो कर वे सितंबर 2013 के अंत तक 732.9 बिलियन अमरीकी डॉलर हुईं। भारत में प्रत्यक्ष निवेश और संविभाग निवेश क्रमश: 2.9 बिलियन अमरीकी डॉलर और 13.3 बिलियन अमरीकी डॉलर से कम हुए। अन्य निवेश देयताओं में, व्यापार ऋण में 1.9 बिलियन अमरीकी डॉलर से गिरावट हुई और ऋण 2.8 बिलियन अमरीकी डॉलर बढ़े। रुपया अवमूल्यन के प्रभाव: रुपये के विनिमय दर में अन्य मुद्राओं की तुलना में परिवर्तन ने, देयताओं को अमरीकी डॉलर में मूल्यांकन करने पर, उन में बदलाव को प्रभावित किया। यद्यपि, अवधि में, 6.6 बिलियन अमरीकी डॉलर का शुद्ध अंतर्वाह था, रुपया अवमूल्यन के परिणामस्वरूप स्टॉक मूल्यांकन प्रभाव के कारण, इक्विटी देयताएँ अमरीकी डॉलर में, जून 2013 अंत तक 340.7 बिलियन अमरीकी डॉलर से, सितंबर 2013 अंत तक 330.5 बिलियन अमरीकी डॉलर पर 10.2 बिलियन अमरीकी डॉलर से कम हुईं। बाह्य वित्तीय आस्तियों और देयताओं की रचना: भारत की अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय आस्तियों में सितंबर 2013 में, आरक्षित आस्तियों का प्रमुख भाग (63.5 प्रतिशत) बना रहा, जिस के बाद विदेश में प्रत्यक्ष निवेश का हिस्सा (27.5 प्रतिशत) रहा। प्रत्यक्ष निवेश (29.6 प्रतिशत), संविभाग निवेश (23.1 प्रतिशत), ऋण [मुख्यत: ईसीबी] (23.1 प्रतिशत), व्यापार ऋण (12.2 प्रतिशत) और मुद्रा और जमा राशियाँ (10.3 प्रतिशत) देश की वित्तीय देयताओं के प्रमुख घटक थे (तालिका 2) । बाह्य ऋण देयताओं की तुलना में बाह्य ऋणेतर देयताएँ: ऋणेतर देयताओं का भाग सितंबर 2013 अंत में 45.1 प्रतिशत पर, जून 2013 अंत के 45.8 प्रतिशत से मामूली कम हुआ (तालिका 3)।
अल्पना किल्लावाला प्रेस प्रकाशनी : 2013-2014/1307 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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