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तिमाही आधारभूत सांख्यिकी विवरणियाँ (बीएसआर)-2: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास जमाराशि– सितंबर 2025

आज, भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों1 के पास जमाराशि संबंधी तिमाही आधारभूत सांख्यिकी विवरणियाँ (बीएसआर)-2 – सितंबर 20252’ शीर्षक से अपना वेब प्रकाशन, भारतीय अर्थव्यवस्था पर डेटाबेस पोर्टल3 (https://data.rbi.org.in Homepage > Publications) पर जारी किया।

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को छोड़कर, ‘आधारभूत सांख्यिकी विवरणियाँ’ (बीएसआर) - 2 में, जमाराशि के प्रकार (चालू, बचत और मियादी), इसके संस्थागत क्षेत्र-वार स्वामित्व, व्यक्तियों से संबंधित जमाराशियों के आयु-वार वितरण, परिपक्वता पैटर्न, आकार और मीयादी जमाराशियों के ब्याज दर सीमा-वार वितरण के साथ-साथ कर्मचारियों की संख्या पर त्रैमासिक शाखा-वार आंकड़े प्रस्तुत करते हैं। ये आंकड़े अलग-अलग स्तर अर्थात, जनसंख्या समूह4,बैंक समूह, राज्य, जिले और केंद्र, पर जारी किए जाते हैं।

मुख्य बातें:                                                                                                                                         

  • सितंबर 2025 के अंत तक एससीबी की जमाराशियों में 9.9 प्रतिशत की संवृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) हुई, जबकि एक वर्ष पहले यह 11.7 प्रतिशत थी (चार्ट I)।

  • सितंबर 2025 के दौरान महानगरीय शाखाओं, जिनके पास जमाराशियों का बड़ा हिस्सा है, की जमाराशि संवृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) में 9.6 प्रतिशत की नरमी देखी गई, जोकि एक वर्ष पहले 12.7 प्रतिशत थी। ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी शाखाओं ने उसी अवधि के दौरान जमाराशि में क्रमशः 11.7 प्रतिशत, 10.7 प्रतिशत और 9.5 प्रतिशत की संवृद्धि दर्ज की।

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सितंबर 2025 में वार्षिक आधार पर 9.6 प्रतिशत जमा वृद्धि दर्ज की, जिससे जमाराशि की हिस्सेदारी एक तिमाही पहले के 57.3 प्रतिशत से बढ़कर 57.6 प्रतिशत हो गया। सितंबर 2025 के दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों की जमा संवृद्धि एक वर्ष पहले के 15.1 प्रतिशत से घटकर 10.0 प्रतिशत हो गई।

  • हालांकि मियादी जमाराशियों की संवृद्धि (11.6 प्रतिशत) में एक गिरावट का रुझान है, लेकिन सितंबर 2025 में यह चालू (9.3 प्रतिशत) और बचत जमा (6.7 प्रतिशत) से अधिक बना रहा।

  • सितंबर 2025 के अंत तक, मियादी जमाराशि का 69.8 प्रतिशत ऐसी थी, जिसकी मूल परिपक्वता अवधि 'एक से तीन वर्ष' थी, जबकि एक वर्ष पहले यह 66.8 प्रतिशत था और मियादी जमाराशि का 20.0 प्रतिशत ऐसी थी, जिसकी परिपक्वता अवधि एक वर्ष तक की थी।

  • ‘7 प्रतिशत से कम’ ब्याज दर वाली मियादी जमाराशियों की हिस्सेदारी एक वर्ष पहले के 31.2 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2025 में 46.0 प्रतिशत हो गई (चार्ट II)।

  • सितंबर 2025 में ‘एक करोड़ और उससे अधिक’ आकार की मियादी जमाराशियों में (वर्ष-दर-वर्ष) 12.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और उनकी हिस्सेदारी एक वर्ष पहले के 45.3 प्रतिशत की तुलना में 45.6 प्रतिशत रही।

  • सितंबर 2025 के दौरान जमाराशियों में घरेलू क्षेत्र का सबसे ज्यादा योगदान रहा, जिसका जमाराशि में लगभग तीन-पांचवां हिस्सा था। घरेलू क्षेत्र के भीतर, जमाराशियों में व्यक्तियों (एचयूएफ सहित) और महिलाओं की हिस्सेदारी सितंबर 2025 में क्रमशः 85.6 प्रतिशत और 34.5 प्रतिशत रही।

  • सितंबर 2025 के अंत तक एससीबी की कुल जमा राशि में वरिष्ठ नागरिकों का योगदान बढ़कर 20.6 प्रतिशत हो गया (एक वर्ष पहले 20.1 प्रतिशत)।

  • सितंबर 2025 में घरेलू जमाराशि में , छह शीर्ष राज्यों / संघ शासित प्रदेशों (अर्थात्, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, दिल्ली का एनसीटी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) ने संयुक्त रूप से 54.2 प्रतिशत का योगदान दिया। घरेलू जमाराशि में महाराष्ट्र का 16.5 प्रतिशत एकल योगदान रहा।

 

अजीत प्रसाद      
उप महाप्रबंधक (संचार)

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1582


1सितंबर 2025 के अंतिम रिपोर्टिंग शुक्रवार के लिए पाक्षिक फॉर्म-ए विवरणी (आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 42(2) के तहत एकत्रित) के आधार पर बैंक जमाराशि संबंधी समग्र डेटा हमारी वेबसाइट (https://rbi.org.in/ होम>सांख्यिकी>जारी आंकड़े> पाक्षिक>भारत में अनुसूचित बैंक की स्थिति का विवरण) पर पहले ही प्रकाशित किया गया है।   

2बीएसआर-2 के लिए संदर्भ तिथि तिमाही का अंतिम दिन है। इन आंकड़ों में 1 जुलाई 2023 से एक बैंक के साथ एक गैर-बैंक के विलय का प्रभाव शामिल है।

3जून 2025 के अंत की स्थिति को शामिल करते हुए, शृंखला में पिछले जारी आंकड़े,  29 अगस्त 2025 को भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर प्रकाशित किए गए थे।

4बीएसआर के लिए उपयोग किया जाने वाला जनसंख्या समूह मानदंड 2011 की जनगणना के अनुसार संबंधित राजस्व केंद्र, जहां एससीबी की शाखाएं संचालित हो रही हैं, की जनसंख्या के आकार पर आधारित है और इन्हें ए) 'ग्रामीण' (10,000 से कम जनसंख्या), बी) 'अर्ध-शहरी' (10,000 से अधिक और 1 लाख से कम जनसंख्या), सी) 'शहरी' (1 लाख से अधिक और 10 लाख से कम जनसंख्या), डी) 'मेट्रोपॉलिटन' (10 लाख और उससे अधिक जनसंख्या) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

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