आरबीआई बुलेटिन– जनवरी 2026
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आज रिज़र्व बैंक ने अपने मासिक बुलेटिन का जनवरी 2026 अंक जारी किया। इस बुलेटिन में तीन भाषण, दो आलेख और वर्तमान सांख्यिकी शामिल हैं। ये दो आलेख हैं: I. अर्थव्यवस्था की स्थिति; और II. भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्तीय स्टॉक और निधियों का प्रवाह 2023-24। I. अर्थव्यवस्था की स्थिति अत्यधिक अनिश्चितताओं के बावजूद 2025 में वैश्विक संवृद्धि आघात-सह बनी रही। हालांकि उच्च वैश्विक अनिश्चितता में दिसंबर के दौरान और नरमी देखी गई। वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी की संवृद्धि के पहले अग्रिम अनुमान में भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता परिलक्षित हुई, जोकि एक चुनौतीपूर्ण बाह्य वातावरण के बीच घरेलू कारकों द्वारा संचालित है। दिसंबर के उच्च आवृत्ति संकेतक, उच्च मांग की स्थिति को बनाए रखते हुए संवृद्धि के आवेगों में लगातार उछाल का सुझाव देते हैं। हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़ गई लेकिन वह निम्न सहन-सीमा स्तर से नीचे बनी रही। वाणिज्यिक क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों का प्रवाह पिछले वर्ष में बढ़ गया है, जिसमें गैर-बैंक और बैंक दोनों स्रोत ऋण वृद्धि में योगदान दे रहे हैं। II. भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्तीय स्टॉक और निधियों का प्रवाह 2023-24 सूरज एस, इशू ठाकुर और मौसुमी प्रियदर्शिनी द्वारा यह आलेख वर्ष 2023-24 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के संस्थागत क्षेत्रों में वित्तीय स्टॉक और प्रवाह (एफएसएफ) में अंतर्निहित प्रवृत्तियों को किससे-किसको (फडब्ल्यूटीडब्ल्यू) आधार पर प्रस्तुत करता है। वित्तीय प्रवाहों का विश्लेषण समष्टि आर्थिक प्रवृत्तियों को दर्शाते हुए निधियों के स्रोतों और उपयोगों को ट्रैक करके विभिन्न क्षेत्रों में अंतर-सहबद्धता के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। वर्ष 2011-12 से 2023-24 की अवधि के लिए क्षेत्रीय/उप-क्षेत्रीय विवरण भी इस आलेख के साथ जारी किए जा रहे हैं। मुख्य बातें:
बुलेटिन लेखों में व्यक्त किए गए विचार लेखकों के हैं और यह भारतीय रिज़र्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। (ब्रिज राज) प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1962 |
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