भारतीय रिज़र्व बैंक ने अगरतला को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, त्रिपुरा पर मौद्रिक दंड लगाया
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भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 3 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा, अगरतला को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, त्रिपुरा (बैंक) पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी 'एक्सपोज़र मानदंड और सांविधिक /अन्य प्रतिबंध-यूसीबी' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹2 लाख (दो लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1) (सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। आरबीआई ने 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में उक्त बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया था। आरबीआई के निदेशों के अननुपालन और तत्संबंधी पत्राचार के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है: बैंक ने विवेकपूर्ण अंतर-बैंक (सकल) एक्सपोज़र सीमा और विवेकपूर्ण अंतर-बैंक प्रतिपक्षकार सीमा का उल्लंघन किया था। यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। (ब्रिज राज) प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2049 |
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