भारतीय रिज़र्व बैंक ने आईआईएफ़एल फ़ाइनेंस लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
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भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 6 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा आईआईएफ़एल फ़ाइनेंस लिमिटेड (कंपनी) पर आरबीआई द्वारा जारी 'आस्ति वर्गीकरण’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹5.30 लाख (पाँच लाख तीस हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58बी(5)(एए) के साथ पठित धारा 58जी(1)(बी) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। आरबीआई ने 31 मार्च 2024 तक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में उक्त कंपनी का सांविधिक निरीक्षण किया था। आरबीआई के निदेशों के अननुपालन संबंधी पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर कंपनी के उत्तर,व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुति और कंपनी की अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है: पुनःसंरचना के समय कंपनी कतिपय खातों को ‘अनर्जक आस्ति’ के रूप में वर्गीकृत करने में विफल रही।¬ यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। (ब्रिज राज) प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2112 |
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