भारतीय रिज़र्व बैंक ने वैल्युकॉर्प सिक्योरिटीज एण्ड फाइनेंस लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 23 दिसंबर 2025 के आदेश द्वारा वैल्युकॉर्प सिक्योरिटीज एण्ड फाइनेंस लिमिटेड (कंपनी) पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी 'साख सूचना कंपनियों को डेटा प्रस्तुत करना', 'ऋण एक्सपोजर का अंतरण' और 'अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹2.40 लाख (दो लाख चालीस हजार रूपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 के खंड 23(4) के साथ पठित खंड 25(1)(iii) प्रावधानों तथा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58 बी (5) (एए) के साथ पठित धारा 58जी(1) (बी) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। 31 मार्च 2024 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा कंपनी का सांविधिक निरीक्षण किया गया। भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों तथा उससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया, जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर कंपनी के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है: i) अपने ग्राहकों की ऋण संबंधी जानकारी किसी भी साख सूचना कंपनी (सीआईसी) को प्रस्तुत करने में विफल रही; ii) अनुमत संस्था के अलावा किसी अन्य को ऋण एक्सपोजर अंतरित किया; iii) अपने ग्राहकों को विशिष्ट ग्राहक पहचान कोड (यूसीआईसी) प्रदान करने में असफल रही; iv) अपने ग्राहकों का जोखिम वर्गीकरण करने में विफल रही। यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। (ब्रिज राज) प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1791 |
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