भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक-अभिशासन) संशोधन निदेश, 2026 और भारतीय रिज़र्व बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक-अभिशासन) संशोधन निदेश, 2026 के मसौदे पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित करता है
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित मसौदा निदेश जारी किए हैंः (1) मसौदा भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक- अभिशासन ) संशोधन निदेश, 2026 मसौदा निदेशों पर टिप्पणियां/प्रतिक्रिया 30 जनवरी 2026 तक जनता/हितधारकों से आमंत्रित किए जा रहे हैं। टिप्पणियां/प्रतिक्रिया रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘Connect2Regulate’ खंड के अंतर्गत दी गई लिंक के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती हैं। वैकल्पिक रूप से, टिप्पणियां/प्रतिक्रिया निम्नलिखित पते पर भी अग्रेषित की जा सकती हैं : मुख्य महाप्रबंधक अथवा ‘’आरबीआई (यूसीबी- अभिशासन ) संशोधन निदेश, 2026/आरबीआई (आरसीबीएस- अभिशासन ) संशोधन निदेश, 2026 पर प्रतिक्रिया’’ विषय के साथ पर ई-मेल के माध्यम से प्रेषित की जा सकती हैं। पृष्ठभूमि और उद्देश्य बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 10ए(2ए)(i), सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए अधिकतम 10 वर्ष का निरंतर कार्यकाल निर्धारित करती है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां दो निदेशकीय कार्यकाल के बीच निदेशक का पद ग्रहण करने पर, उस पद से इस्तीफा देकर या अन्य कोई कार्रवाई करके तथा उसके बाद निदेशक मंडल के लिए पुनर्निर्वाचन या सहयोजन के माध्यम से निदेशक चुनकर इस प्रावधान से बचा जाता है। ऐसी पद्धति इसके लिए बनाए गए कानून के प्रयोजन और उसके अभिप्राय को धूमिल कर देती हैं। पूर्वोक्त संवैधानिक प्रावधान का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए एक न्यूनतम कूलिंग-पीरियड शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
(ब्रिज राज) प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1883 |
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