16 जनवरी 2023 भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों द्वारा ऋण की हानि संबंधी प्रावधानीकरण के लिए अपेक्षित हानि (ईएल) आधारित दृष्टिकोण पर चर्चा पत्र जारी किया दिनांक 30 सितंबर 2022 को जारी विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य के भाग के रूप में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों द्वारा अपने ऋण संबंधी जोखिमों के लिए रखे जाने वाले आवश्यक हानि संबंधी भत्तों के लिए अपेक्षित हानि-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का प्रस्ताव दिया था। यह घोषणा की गई थी कि परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं पर एक चर्चा पत्र शीघ्र ही जारी किया जाएगा। तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज चर्चा पत्र (डीपी) जारी किया है, जो विभिन्न मुद्दों की व्यापक जांच करता है और भारत में बैंकों द्वारा प्रावधानीकरण हेतु अपेक्षित हानि-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए एक ढांचे का प्रस्ताव करता है। प्रस्तावित दृष्टिकोण, जहां भी आवश्यक हो, विनियामक बैकस्टॉप द्वारा पूरक सिद्धांत-आधारित दिशानिर्देश तैयार करना है। इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और छोटे सहकारी बैंकों (टिप्पणियों के आधार पर तय की जाने वाली सीमा के आधार पर) को उपरोक्त ढांचे से बाहर रखने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित ढांचे के अंतर्गत प्रमुख आवश्यकता यह होगी कि बैंक, वित्तीय आस्तियों (मुख्य रूप से अप्रतिसंहरणीय ऋण प्रतिबद्धताओं सहित ऋण, और परिपक्वता तक धारित या बिक्री के लिए उपलब्ध के रूप में वर्गीकृत निवेश) के प्रारंभिक पहचान के समय और इसके बाद की प्रत्येक रिपोर्टिंग तिथि पर उन पर होने वाली मूल्यांकित ऋण घाटे के आधार पर उन्हें तीन श्रेणियों- चरण 1, चरण 2, और चरण 3, में से किसी एक में वर्गीकृत कर आवश्यक प्रावधान करें । प्रस्तावित सिद्धांतों के अनुरूप बैंकों को हानि संबंधी प्रावधानों का अनुमान लगाने के उद्देश्य से अपेक्षित ऋण की हानियों को मापने के लिए अपने स्वयं के मॉडल को डिजाइन और कार्यान्वित करने की अनुमति होगी। हालांकि, मॉडल जोखिम से संबंधित समस्याओं को कम करने और उत्पन्न होने वाली महत्वपूर्ण परिवर्तनीयता पर विचार करने के लिए, डीपी निम्नलिखित न्यूनीकरणों का प्रस्ताव करता है:
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भारतीय रिज़र्व बैंक विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगा, जिस पर क्रेडिट जोखिम मॉडल तैयार करते समय विचार किया जाना आवश्यक होगा। यह दिशानिर्देश, आईएफ़आरएस 9 में प्रदान किए गए दिशानिर्देश और बीसीबीएस द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के आधार पर, क्रेडिट जोखिम का निर्धारण करते समय बैंकों द्वारा विचार किए जाने वाले कारकों और सूचनाओं पर विस्तृत अपेक्षाओं को निर्दिष्ट करेगा।
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बैंकों द्वारा अपनाए जाने के लिए प्रस्तावित अपेक्षित ऋण हानि संबंधी मॉडल को यह जांच करने के लिए स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना होगा कि क्या मॉडल, ठोस तर्क, बैंक के पास उपलब्ध सभी प्रासंगिक डेटा के सुविचारित उपयोग के आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देश का पालन करते हैं और क्या किसी पक्षपात आदि को दूर करने के लिए मॉडलों का उचित बैक-टेस्टिंग और आंतरिक सत्यापन किया गया है।
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बैंकों के आंतरिक मूल्यांकन के अनुसार प्रावधान, केवल मौजूदा प्रावधानीकरण मानदंडों को पुनः निर्धारित करने के बजाय व्यापक डेटा विश्लेषण के आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनिर्दिष्ट विवेकपूर्ण स्तर के अधीन होंगे।
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बैंकों द्वारा प्रकटीकरणों की एक गैर-विस्तृत सूची निर्धारित की जाएगी।
मॉडलों को डिजाइन करने में आने वाली जटिलताओं और उनके परीक्षण के लिए आवश्यक समय को ध्यान में रखते हुए, अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाने के बाद ढांचे के कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त समय प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, बासेल दिशानिर्देशों के अंतर्गत दी गई अनुमति के अनुसार, एक निर्बाध परिवर्तन के लिए, बैंकों को पांच वर्ष की अधिकतम अवधि में सामान्य इक्विटी टीयर I पूंजी पर बढ़े प्रावधानों के प्रभाव को समाप्त करने का विकल्प प्रदान किया जाएगा। डीपी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को चिन्हित करता है, जिन पर प्राप्त फीडबैक के साथ-साथ विस्तृत डेटा विश्लेषण के आधार पर अंतिम विचार किया जाएगा। डीपी में व्यक्त किए गए विशिष्ट चर्चा प्रश्नों पर टिप्पणियाँ मांगी जाती हैं, जो सुविचारित तर्कों द्वारा समर्थित हैं और जहाँ भी आवश्यक हो, विस्तृत डेटा विश्लेषण और मात्रात्मक साक्ष्य द्वारा समर्थित हैं। टिप्पणियाँ, 28 फरवरी 2023 तक मुख्य महाप्रबंधक, ऋण जोखिम समूह, विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, 12वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट, मुंबई - 400001 को या ई-मेल द्वारा "बैंकों द्वारा प्रावधानीकरण के लिए अपेक्षित ऋण की हानि संबंधी दृष्टिकोण पर चर्चा पत्र" विषय पंक्ति के साथ प्रस्तुत की जा सकती हैं। (योगेश दयाल) मुख्य महाप्रबंधक प्रेस प्रकाशनी: 2022-2023/1558 |