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भारतीय रिज़र्व बैंक ने “अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की जमा और ऋण संबंधी तिमाही सांख्यिकी : दिसंबर 2015” जारी की

26 फरवरी 2016

भारतीय रिज़र्व बैंक ने 'अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की जमा और
ऋण संबंधी तिमाही सांख्यिकी : दिसंबर 2015' जारी की

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज दिसंबर 2015 को समाप्त तिमाही के लिए 'अनुसूचित वाणिज्य बैंकों (एससीबी) की जमा और ऋण संबंधी तिमाही सांख्यिकी' जारी की। यह प्रकाशन अनुसूचित वाणिज्य बैंक (एससीबी) जिसमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) भी सम्मिलित हैं, के तिमाही सर्वेक्षण पर आधारित हैं। इस में बैंकों की जमा और ऋण संबंधी राज्यवार, जिलावार, केंद्रवार, जनसंख्या समूहवार और बैंक समूहवार आंकडे सम्मिलित हैं। ये आंकडे सीधे रूप से https://dbie.rbi.org.in/DBIE/dbie.rbi?site=publications#!3 से प्राप्त किए जा सकते हैं।

मुख्‍य बातें :

  • इस तिमाही में जमा राशियों में वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) एक वर्ष पूर्व की इसी तिमाही के 10.9 प्रतिशत से घटकर 10.3 प्रतिशत हो गई जबकि ऋण 10.1 प्रतिशत से बढ़कर 10.9 प्रतिशत हो गए।

  • अनुसूचित वाणिज्य बैंकों के कुल कारोबार (जमा राशियाँ और ऋणों का योग) के आकार के क्रमानुसार सात राज्यों अर्थात महाराष्ट्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात की संयुक्त हिस्सेदारी 68.2 प्रतिशत रही। अकेले महाराष्ट्र का कुल कारोबार में योगदान 25.4 प्रतिशत रहा। इन सात राज्यों की हिस्सेदारी जमाराशियों में 65.7 प्रतिशत और ऋण में 71.3 प्रतिशत रही।

  • तिमाही के अंत में अखिल भारतीय ऋण-जमा (सी-डी)अनुपात 76.8 प्रतिशत था। चंडीगढ़ का ऋण-जमा अनुपात सर्वोच्च (121.4 प्रतिशत) था जिसके बाद तामिलनाडु (113.7 प्रतिशत), आंध्र-प्रदेश (104.8 प्रतिशत), तेलंगाना (104.6 प्रतिशत), महाराष्ट्र (97.6 प्रतिशत), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (94.5 प्रतिशत) और राजस्थान (87.3 प्रतिशत) का स्थान रहा।

  • तिमाही के अंत में भारतीय स्टेट बैंक और इसके सहायक बैंकों और निजी क्षेत्र के बैंकों की जमाराशियों और ऋणों की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि में उनके एक वर्ष पूर्व में रहे स्तर की तुलना में बढ़ोतरी हुई, हालांकि राष्ट्रीयकृत बैंकों की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि में कमी आई। विदेशी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थिति संमिश्र रही। जबकि उनकी जमाओं की वृद्धि में बढ़ोतरी हुई , ऋण में कमी आई।

  • अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की जमाराशियों तथा सकल बैंक ऋण में लगभग आधी हिस्सेदारी का अंशदान देकर राष्ट्रीयकृत बैंकों ने अपनी प्रमुख स्थिति को बनाये रखा। भारतीय स्टेट बैंक और इसके सहायक बैंकों तथा निजी क्षेत्र के बैंकों की जमाराशियों तथा ऋण दोनों में हिस्सेदारियां लगभग समान थीं जो कि 20-23 प्रतिशत की सीमा में रही।

अनिरुद्ध डी. जाधव
सहायक प्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2015-2016/2034

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