31 मई 2017 भारतीय रिज़र्व बैंक ने “अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की जमा और ऋण संबंधी तिमाही सांख्यिकी: मार्च 2017” को प्रकाशित किया भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज 31 मार्च 2017 की स्थिति के अनुसार 'अनुसूचित वाणिज्य बैंकों (एससीबी) की जमा और ऋण संबंधी तिमाही सांख्यिकी' के आंकड़ें जारी किए हैं। इस तिमाही सर्वेक्षण में सभी एससीबी के आंकडे समेकित किए गए हैं जिनमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (क्षेग्राबैं) भी शामिल हैं| साथ ही, पहली बार, फरवरी 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की दूसरी अनुसूची में शामिल हुए दो लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) के आंकड़ों को भी इस प्रकाशन में शामिल किया गया है। इस सर्वेक्षण में राज्यवार, जिलावार, केंद्रवार, जनसंख्या-समूह और बैंक-समूहवार सभी प्रकार की जमा-राशियों, जमा के प्रकारों के अनुसार ब्रेक-अप के साथ और बैंक ऋणों को सम्मिलित किया गया है| यह प्रकाशन http://dbie.rbi.org.in/DBIE/dbie.rbi?site=publications#!3 लिंक से प्राप्त किया जा सकता है| प्रमुख तथ्य: -
मार्च 2017 में जमा-राशियों की वृद्धि दर (साल दर साल) दिसंबर 2016 की तुलना में कम रही। -
बैंक ऋण की वृद्धि दर लगातार दूसरी तिमाही मे भी घटती हुई पाई गयी। -
जहां बैंक जमा-राशियां और ऋण की वृद्धि दर में गिरावट सभी जनसंख्या समूहों में देखी गई, वहीं महानगरीय क्षेत्रों में वृद्धि दर में अत्यधिक कमी पाई गई। -
बैंक समूहों के संबंध में, निजी क्षेत्र के बैंकों का प्रदर्शन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में काफी अच्छा रहा। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने भी जमा-राशियां और ऋण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। -
कुल जमा और ऋण का लगभग दो-तिहाई हिस्सा सात राज्यों, महाराष्ट्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर-प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात में केंद्रित बना रहा। -
अखिल भारतीय स्तर पर सभी एससीबी का ऋण-जमा अनुपात मार्च - 2017 के अंत में बढ़ कर 73.7 प्रतिशत हो गया जो कि एक तिमाही पहले 70.6 प्रतिशत था। -
अखिल भारतीय औसत स्तर से अधिक ऋण-जमा अनुपात वाले राज्यों में तमिलनाडु (106.5 प्रतिशत), महाराष्ट्र (106.3 प्रतिशत), चंडीगढ़ (102.9 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (100.2 प्रतिशत), तेलंगाना (99.6 प्रतिशत) और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली (88.5 प्रतिशत) शामिल हैं। अजीत प्रसाद सहायक परामर्शदाता प्रेस प्रकाशनी: 2016-2017/3234 |