पेपर आधारित निधि के लेन-देन से इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण में परिवर्तन पर अध्ययन समूह की रिपोर्ट जनता की टिप्पणी के लिए रखी गई
19 अप्रैल 2007
पेपर आधारित निधि के लेन-देन से इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण में
परिवर्तन पर अध्ययन समूह की रिपोर्ट जनता की टिप्पणी के लिए रखी गई
भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज पेपर आधारित निधियों के लेनदेन से इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण में परिवर्तन पर अध्ययन समूह की रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट पर जनता की टिप्पणी के लिए रखा। टिप्पणियाँ मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक, भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग, केंद्रीय कार्यालय, फोर्ट, मुंबई-400001 को अथवा ई-मेल द्वारा 15 मई 2007 से पहले भेजी जाए।
रिज़र्व बैंक उपयुक्त प्रौद्योगिकी ढांचा तैयार करके कदम उठा रहा हैं ताकि पेपर आधारित भुगतानों से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों जैसे वास्तविक समय सकल निपटान (आरटीजीएस), राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनइएफटी) और इलेक्ट्रॉनिक समाशोधन सेवा (इसीएस) का सुचारू अंतरण हो सके। ऐसा करते समय भारतीय रिज़र्व बैंक अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्ट प्रणाली को अपना रही है जिससे कार्यक्षमता बढ़ी है और भुगतान और निपटान प्रणालियों में जोखिम घटा है। इन भुगतान प्रणालियों की उपलब्धता के लिए सुविधाएं बढ़ी हैं, साथ ही उनका उपयोग भी निरंतर बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में वास्तविक समय सकल निपटान प्रणाली में बैंको की 28000 से भी अधिक शाखाएं शामिल हैं जबकि राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण प्रणाली में 23000 से भी अधिक बैंक शाखाएं शामिल हैं। देश में 64 केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक समाशोधन सेवा उपलब्ध हैं।
रिज़र्व बैंक ने पेपर आधारित निधियों के लेनदेन से इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण में परिवर्तन से संबंधित विभिन्न मामलों की जाँच करने ने के लिए एक समूह का गठन किया था। समूह द्वारा दिए गए सुझाव का दृष्टिकोण यह था कि यदि आवश्यक हो तो इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाए, निगरानी रखी जाए और पालन अनिवार्यत: किया जाए। रिपोर्ट में कतिपय संवर्गों के महत्त्वपूर्ण भुगतानों को केवल वास्तविक समय सकल निपटान के माध्यम से ही करने के लिए समयबद्ध कार्य योजना तैयार की गयी है।
जी. रघुराज
उप महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी : 2006-2007/1435
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