अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - आरबीआई - Reserve Bank of India
सरकारी प्रतिभूति अधिनियम 2006 और सरकारी प्रतिभूति विनियमावली 2007
सरकारी प्रतिभूति, निवेशकों के लंबे अवधि के लिए सुरक्षा, तरलता और आकर्षक प्रतिलाभ के अवसर प्रदान करता है । सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 को लागू करने से भारत सरकार द्वारा जारी सरकारी प्रतिभूतियां जिसमें राहत /बचत बांड शामिल है, निवेशक के लिए अधिक सुविधाजनक हो गए है । अधिनियम में हुए बदलाव के कारण इन बांडो में निवेशकों को विशेष लाभ होगा । इस संबंध में जनजागृति निर्माण करने और अनुकूल उपाय के रुप में निम्नलिखित अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्नों (एफएक्यू) को उत्तर के साथ भारतीय रिज़र्व बैंक(आरबीआई) द्वारा प्रकाशित किया गया है ।
सरकारी प्रतिभूति(जी–सेक ) अर्थात लोक ऋण वृघ्दि या किसी उद्देश्य से सरकार के राजपत्र में अधिसूचित किए अनुसार सरकार द्वारा निर्मित या जारी प्रतिभूति है और जो निम्नलिखित रूपों में है :-
i) व्यक्ति को या के आदेश से देय सरकारी वचनपत्र (जीपीएन); या
ii) धारक को देय वाहक बांड; या
iii) स्टॉक; या
iv) बांड लेजर खाते में धारित बांड (बीएलए).
हां, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के भाग ‘X’ के अंतर्गत जारी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (सक्सेशन सर्टिफिकट ) के आधार पर ही नहीं बल्कि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा जारी डिक्री , आदेश अथवा निर्देश या किसी अन्य कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति को मालिकाना हक प्रदान करने के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र या आदेश के आधार पर भी मालिकाना हक निर्धारित किया जा सकता है । मृत्तक या संयुक्त धारकों की सरकारी प्रतिभूति पर मालिकाना हक भारतीय रिजर्व बैंक /एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी प्रतिभूति विनियमावली मे निर्धारित निम्नांकित छह मे से किसी एक दस्तावेज द्वारा भी निर्धारित किया जा सकता है ।
'ए ' सरकारी प्रतिभूति के मृत्तक धारक द्वारा तैयार की गई वसीयत में जिस व्यक्ति को दावा हेतु अधिकार दिया है, बशर्ते कि दावेदार बैंक को न्यायालय द्वारा जारी प्रोबेट प्रस्तुत करता है ; अथवा
'बी ' परिवार समझौता का पंजीकृत विलेख, जिसमें दावा की गए सरकारी प्रतिभूति को शामिल किया गया है और वह सरकारी प्रतिभूति दावेदार को दी गई है; अथवा
‘सी’ दावा की गई सरकारी प्रतिभूति के लिए, संबंधित कानून के अनुसार उपहार विलेख (गीफ्ट डीड ) बनाया है, अथवा
'डी ' अन्य कानूनी वारिस या मृतक के उत्तराधिकारी द्वारा दावेदार के पक्ष मे सरकारी प्रतिभूति के संबंध में कानून के अनुसार बनाई गयी त्याग विलेख अथवा
‘ई ‘ दावा की गई सरकारी प्रतिभूति के संबंध में विदेशी कोर्ट द्वारा पारित डिक्री, जोकि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 कोड, (1908 का 5) की धारा 44 ए के प्रावधान के अनुसार कार्रवाई करने हेतु स्वीकार्य हो ।
‘एफ’ बटवारा निष्पादन विलेख , जिसमें दावा की गई सरकारी प्रतिभूति को शामिल किया गया है और दावेदार का हिस्सा निर्धारित किया गया हो ।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022