अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) मास्टर निदेश (एमडी) - क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड - जारी करने और आचार संबंधी निदेश, 2022
उत्तर: कार्ड जारीकर्ताओं को अवांछित क्रेडिट कार्ड जारी करने से प्रतिबंधित किया गया है और उन्हें कार्ड जारी करने से पहले ग्राहक से पूर्व और स्पष्ट सहमति लेनी होगी। हालाँकि, यदि ग्राहक को कोई अवांछित कार्ड प्राप्त होता है, तो उसे ओटीपी अथवा किसी अन्य माध्यम से कार्ड को सक्रिय करने या सक्रिय करने के लिए सहमति प्रदान करने से बचना चाहिए। यदि कार्ड को सक्रिय करने के लिए कोई सहमति प्राप्त नहीं हुई है, कार्ड-जारीकर्ता को ग्राहक से पुष्टि प्राप्त करने की तारीख से सात कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक को बिना किसी लागत के क्रेडिट कार्ड खाता बंद करना होगा और ग्राहक को यह भी सूचित करना होगा कि क्रेडिट कार्ड खाता बंद कर दिया गया है। कार्ड-जारीकर्ता से यह सूचना प्राप्त होने पर कि कार्ड खाता बंद कर दिया गया है, ग्राहक कार्ड को नष्ट कर देगा। इसके अलावा, ग्राहक अवांछित कार्ड जारी करने के विरुद्ध कार्ड-जारीकर्ता के पास शिकायत दर्ज कर सकता है और इसे एकीकृत ओम्बड्समैन योजना के अनुसार आरबीआई ओम्बड्समैन के पास भेज सकता है (कृपया नीचे प्रश्न 17 का उत्तर देखें)।
उत्तर: ऑटोमेटेड टेलर मशीन एक कंप्यूटरीकृत मशीन है जो कि बैंक के ग्राहकों को बैंक शाखा जाने की जरूरत के बिना ही नकदी निकालने एवं अन्य वित्तीय और गैर वित्तीय लेनदेन के लिए अपने खाते तक पहुँचने (accessing) की सुविधा प्रदान करती है।
भारत में विदेशी मुद्रा लेन देन के प्रबंध के लिए विधिक ढांचा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 द्वारा प्रदान किया गया है। विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) जो कि 1 जून 2000 से लागू हुआ, के अंतर्गत विदेशी मुद्रा से संबंधित सभी लेन देन को या तो पूंजीगत अथवा चालू खाता लेन देन के रूप में वर्गीकृत किया गया है। किसी निवासी द्वारा किए गए सभी लेनदेन जिनसे भारत के बाहर उसकी आस्तियों अथवा देयताओं जिनमें आकस्मिक देयताएँ शामिल हैं, में परिवर्तन नहीं होता है को चालू खाता लेनदेन कहते हैं।
फेमा की धारा-5 के अनुसार भारत1 में निवास करने वाले व्यक्ति के पास किसी भी चालू खाता लेनदेन के लिए विदेशी मुद्रा खरीदने अथवा बेचने की स्वतन्त्रता है। इन में अपवाद केवल उन लेनदेन, जैसे कि लाटरी जीत में से विप्रेषण; रेसिंग / राइडिंग, आदि या अन्य किसी शौक से प्राप्त आय का विप्रेषण; लाटरी टिकट, प्रतिबंधित / वर्जित पत्रिकाओं,फुटबाल पूल्स, स्वीपस्टेक, आदि की खरीद के लिए विप्रेषण; किसी ऐसी कंपनी द्वारा लाभांश का विप्रेषण जिस पर लाभांश संतुलन की आवश्यकता लागू है ; रूपी स्टेट क्रेडिट रूट के अधीन निर्यात पर कमीशन का भुगतान, सिवाय चाय और तंबाकू के निर्यात के बीजक मूल्य के 10% तक कमीशन ; भारतीय कंपनियों की विदेश में संयुक्त उद्यमों / पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्थाओं में ईक्विटी निवेश के लिए किए गए निर्यात पर कमीशन का भुगतान; नॉन – रेसीडेंट स्पैशल रूपी (खाता) योजना में धारित निधियों पर ब्याज आय का विप्रेषण तथा टेलीफोन की “काल बॅक सर्विसेज” से संबंधित भुगतान, के संबंध में है जिन के लिए विदेशी मुद्रा आहारित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगाएं हैं।
दिनांक 3 मई 2000 (अनु-I) की अधिसूचना सं जी.एस.आर. 381 (ई) द्वारा अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियमावली, 2000 (बाद में उन्हें “नियम” कहा जाएगा) तथा 26 मई 2015 की अधिसूचना जीएसआर 426 (ई)में दिए गए नियमों की संशोधित अनुसूची-III सरकारी राजपत्र में तथा हमारी वेबसाइट www.rbi.org.in पर उपलब्ध “अन्य विप्रेषण सुविधाएं”पर हमारे मास्टर अनुदेश के अनुबंध के रूप में उपलब्ध है।
यह “अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न’ इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा समान्यतः पूछे जानेवाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का यह प्रयास है। तथापि कोई लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लें।
उत्तर: "प्राधिकृत व्यापारी" का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 अधिनियम की धारा-10 की उप-धारा (1) के अंतर्गत रिज़र्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा अथवा विदेशी प्रतिभूतियों में व्यापार करने के लिए प्राधिकृत किये गए व्यक्ति से है (एडी की सूची www.rbi.org.in पर उपलब्ध है) और समान्यतः इनमें बैंक शामिल हैं।
उत्तर: राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनईएफटी) एक राष्ट्रव्यापी केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली है जिसका स्वामित्व और संचालन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा किया जाता है। सिस्टम में भाग लेने वाले विभिन्न हितधारकों द्वारा पालन की जाने वाली प्रक्रियाओं संबंधी सूची निम्नलिखित लिंक के तहत आरबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://rbi.org.in/documents/87730/39711381/NEFTPROCEDURALJANUARY2024DBA95372B2454F9F8B767824B0B6E86F.pdf.
उत्तर. केवाईसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक विनियमित संस्था (आरई), जिसमें बैंक भी शामिल है, ग्राहक की पहचान और पता, व्यवसाय की प्रकृति और वित्तीय स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करती हैं और उसका सत्यापन करती है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि एक विनियमित संस्था को उस ग्राहक के बारे में पता हो जिसके साथ वह व्यवहार कर रही है और विनियमित संस्था द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का दुरुपयोग काले धन को वैध बनाना/आतंकवादी वित्तपोषण/प्रसार वित्तपोषण (एमएल/टीएफ/पीएफ) उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाता हो।
उत्तर: उक्त निदेश के पैरा 4(1)(iv) के प्रयोजनों के लिए, 'व्यक्ति' शब्द में व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, एचयूएफ, फर्म, समाज या कोई कृत्रिम संस्था शामिल होगी, चाहे वह निगमित हो अथवा नही।
उत्तर : नहीं। हालांकि, बैंकों को संग्रहण और शुद्धता परीक्षण केन्द्रों (सीपीटीसी) के नाम और रिफाइनरीज़ जिनके साथ उन्होंने त्रिपक्षीय करार किया है और इस योजना का संचालन करनेवाली शाखाएँ सहित कार्यान्वयन संबंधी ब्योरा आरबीआई को प्रस्तुत करना चाहिए। बैंकों को इस योजना के तहत सभी शाखाओं द्वारा समाहरित स्वर्ण की मात्रा संबंधी समेकित आंकड़ा मासिक आधार पर निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट करनी चाहिए।
“अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्नों’ का यह खण्ड इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा आम तौर पर पूछे जानेवाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का एक प्रयास है। तथापि किसी प्रकार का लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लिया जाए। इससे संबंधित मूल विनियमावली 21 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं.फेमा 10(आर)/2015-आरबी के तहत जारी की गई विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में निवासी व्यक्ति के विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली, 2015 है। इस संबंध में जारी किए गए विभिन्न निदेश ‘जमा राशियां और खाते’ विषय पर जारी मास्टर निदेश सं.14 के भाग-I में समेकित किए गए हैं। मूल विनियमावली में किए गए संशोधन, यदि कोई हों, को परिशिष्ठ में जोड़ा गया है ।
उत्तर : विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) की धारा-2(वी) में ‘भारत में निवासी व्यक्ति’ को परिभाषित किया गया है; जो निम्नानुसार है:
(i) ऐसा कोई व्यक्ति जो पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान एक सौ बयासी दिन से अधिक समयावधि तक भारत में निवास कर रहा था किन्तु इसके अंतर्गत :-
(ए) ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं है जो –
(क) भारत से बाहर रोजगार हेतु नियोजित होने के लिए या नियोजित हो जाने पर; या
(ख) भारत के बाहर कोई कारोबार करने या भारत के बाहर कोई व्यवसाय करने के लिए; अथवा
(ग) ऐसी परिस्थितियों में, किसी अन्य प्रयोजन के लिए जिनसे उसका भारत से बाहर अनिश्चित अवधि तक ठहरने का आशय उपदर्शित होता हो,
भारत से बाहर चला गया है या भारत से बाहर ठहरता है,
(बी) ऐसा व्यक्ति भी नहीं जो-
(क) भारत में रोजगार पर नियोजित होने के लिए या नियोजित होने पर, या
(ख) भारत में कोई कारोबार करने या भारत में कोई व्यवसाय चलाने के लिए; या
(ग) ऐसी परिस्थितियों में, किसी अन्य प्रयोजन के लिए जिनसे उसका भारत में अनिश्चित अवधि तक ठहरने का आशय उपदर्शित होता हो,
भारत लौट आता है या भारत में ठहरता है।
(ii) कोई व्यक्ति या भारत में पंजीकृत अथवा निगमित कोई कॉर्पोरेट निकाय ;
(iii) भारत के बाहर निवासी किसी व्यक्ति के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन भारत में कोई कार्यालय, शाखा या एजेंसी;
(iv) भारत में निवासी किसी व्यक्ति के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन भारत में कोई कार्यालय, शाखा या एजेंसी।
उ : फैक्टरिंग अधिनियम, 2011 'फैक्टरिंग बिजनेस' को इसप्रकार परिभाषित करता है, "ऐसी प्राप्तियों या वित्तपोषण के असाइनमेंट को स्वीकार करके असाइनर के प्राप्तियों के अधिग्रहण का व्यवसाय, चाहे ऋण या अग्रिम करने के माध्यम से या किसी भी प्राप्य पर प्रतिभूति ब्याज के बदले किसी अन्य तरीके से किया गया हो"
हालांकि, बैंकों द्वारा व्यवसाय के सामान्य क्रम में प्राप्य की प्रतिभूति और कमीशन एजेंट के रूप में या अन्यथा कृषि उत्पाद या किसी भी प्रकार के सामान की बिक्री के लिए की गई किसी भी गतिविधि और संबंधित गतिविधियों के लिए प्रदान की जाने वाली क्रेडिट सुविधाएं स्पष्ट रूप से फैक्टरिंग व्यवसाय की परिभाषा से बाहर हैं। फैक्टरिंग अधिनियम ने भारत में फैक्टरिंग के लिए बुनियादी कानूनी ढांचा तैयार किया है।
उत्तर: ‘अनिवासी भारतीय’ (एनआरआई) भारत से बाहर निवास करने वाला व्यक्ति है, जो भारत का नागरिक है।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022