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भारतीय रिज़र्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट

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उदारीकृत विप्रेषण योजना

उत्तर: इस योजना के तहत निम्नलिखित के लिए विप्रेषण की सुविधा उपलब्ध नहीं है:

(i) विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) विनियमावली, 2000 की अनुसूची-। के तहत विशेष रूप से निषिद्ध किसी भी प्रयोजन (जैसे लॉटरी टिकट खरीदने/ जुए में दांव लगाने, निषिद्ध पत्रिकाओं की खरीद, आदि) अथवा अनुसूची-॥ के तहत प्रतिबंधित किसी भी मद के लिए विप्रेषण;

(ii) पारदेशीय विनिमय गृहों/ पारदेशीय प्रतिपक्ष को मार्जिन अथवा मार्जिन कॉल के लिए भारत से विप्रेषण;

(iii) पारदेशीय द्वितीयक बाजार में भारतीय कंपनियों द्वारा जारी विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांडों की खरीद के लिए विप्रेषण;

(iv) विदेशों में विदेशी मुद्रा की ट्रेडिंग के लिए विप्रेषण;

(v) पूंजी खाता लेनदेनों के लिए यह योजना उन देशों के लिए उपलब्ध नहीं है जिनकी पहचान वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ने समय समय पर “असहयोगी देशों एवं क्षेत्राधिकारों” के रूप में की है।

(vi) जिन व्यक्तियों या संस्थाओं की पहचान आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने के कारण बेहद जोखिम वालों के रूप में की गई हो तथा जिसके बारे में रिज़र्व बैंक ने बैंकों को अलग से सूचित किया हो उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विप्रेषण भेजने की अनुमति भी नहीं है।

(vii) एक निवासी द्वारा दूसरे निवासी को एलआरएस के तहत विदेश में रखे गए विदेशी मुद्रा खाते में क्रेडिट के लिए विदेशी मुद्रा में उपहार देना।

इसे खरीदने पर निवेशक ने स्‍वर्ण की जितनी मात्रा के लिए पैसे दिए हैं उतनी मात्रा संरक्षित हो जाती है और बॉण्‍ड की मीयाद पूरी हो जाने पर या उससे पहले बॉण्‍ड जमा कर देने पर उसे उस समय बाज़ार में चल रही कीमत मिलती है। अत: स्‍वर्ण को भौतिक रूप में अपने पास रखने के बजाय राष्ट्रिक स्‍वर्ण बॉण्‍ड के रूप में रखना बेहतर विकल्‍प है। इस प्रकार जोखिम से बचने के साथ-साथ इसे सुरक्षित रखने की लागत नहीं है। निवेशकों को इस बात का आश्‍वासन मिलता है कि बॉण्‍ड की अवधि समाप्ति पर उन्‍हें स्‍वर्ण का बाज़ार भाव मिलेगा और साथ ही आवधिक ब्‍याज भी। स्‍वर्ण के आभूषणों पर कारीगरी शुल्‍क देना पड़ता है और उसकी शुद्धता भी देखनी पड़ती है। राष्ट्रिक स्‍वर्ण बॉण्‍ड के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है। यह बॉण्‍ड रिज़र्व की बहियों अथवा डीमैट रूप में दर्ज रहते हैं, अत: इनके गुम होने की गुंजाइश नहीं रहती।

नहीं, सरफेसी अधिनियम, 2002 के अंतर्गत मौजूद और पहले ही बेची जा चुकी आस्तियों को वेबसाइट पर प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं है।
निम्नलिखित परिस्थितियों में आरई के पास मौजूद प्रतिभूति आस्तियों को वेबसाइट से हटा दिया जाएगा:
(i) जब प्रतिभूति आस्ति बेची जा चुकी हो; अथवा
(ii) जब प्रतिभूति लेनदार को बकाया राशि प्राप्त हो गई हो (जिसमें मूलधन, ब्याज और उधारकर्ता द्वारा प्रतिभूति लेनदार को देय कोई अन्य बकाया राशि शामिल है) अथवा उधारकर्ता से सहमत निपटान राशि का भुगतान हो गया हो।

उत्तर: सर्वेक्षण वार्षिक रूप से संचालित किया जाता है।

वर्तमान में, यूपीआई-पे नउ लिंकेज के माध्यम से प्रेषण प्राप्त करने के लिए भारत में भाग लेने वाले बैंक हैं:

  • एक्सिस बैंक

  • डीबीएस बैंक इंडिया

  • आईसीआईसीआई बैंक

  • इंडियन बैंक

  • इंडियन ओवरसीज बैंक

  • भारतीय स्टेट बैंक

यह भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अपनाई गई नीति है जिसके माध्यम से जनसाधारण को अच्छी गुणवत्ता के बैंकनोट उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाता है।

उत्तर: यह सीमा डीएलजी सेट से किसी भी समय संवितरित कुल राशि पर लागू होती है (उपर्युक्त प्र.1 के उत्तर के साथ पढ़ें)। कृपया अंत में उदाहरण देखें।

उत्तर: नेपाल में रहने वाले लाभार्थी को प्रति लेनदेन 2 लाख रुपये तक विप्रेषित किया जा सकता है; बशर्ते प्रेषक का खाता भारत में किसी भी एनईएफटी सक्षम बैंक शाखा में हो।

वॉक-इन / गैर-ग्राहक, नेपाल में रहने वाले लाभार्थी को, प्रति लेनदेन 50,000 तक भेजे जा सकते हैं।

उत्तर. अनिवासी प्रतिपक्ष/ पारदेशीय संस्थाओं के संबंध में, प्राधिकृत व्यापारी बैंक कृपया उक्त परिपत्र के पैरा 2 में निहित निर्देश का संदर्भ लें।

उत्तर: (ए) नीचे दिए गए मौजूदा दिशानिर्देश आरई को हरित जमाराशि पर अलग-अलग ब्याज दर की पेशकश करने की अनुमति नहीं देते हैं:

(बी) आरई अपने ग्राहकों को आय के आवंटन/उपयोग की परवाह किए बिना सहमत नियमों और शर्तों और उपरोक्त निर्देशों के अनुसार हरित जमाराशि पर ब्याज का भुगतान करेंगे। (सी) हरित जमाराशि की समयपूर्व निकासी पर कोई प्रतिबंध नहीं है, हालांकि, आरई को ऊपर उल्लिखित मौजूदा दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। इसके अलावा, समय से पहले निकासी का हरित जमाराशि की आय का उपयोग करके शुरू की गई गतिविधियों/परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022

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