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उत्तर: भारतीय वित्तीय प्रणाली कोड (आईएफएससी) एक अल्फा-न्यूमेरिक कोड है जो विशिष्ट रूप से एनईएफटी प्रणाली में भाग लेने वाली बैंक-शाखा की पहचान करता है। यह एक 11-अंकीय कोड है जिसमें पहले 4 अल्फा वर्ण बैंक का प्रतिनिधित्व करते हैं, और अंतिम 6 वर्ण शाखा का प्रतिनिधित्व करते हैं। पांचवां वर्ण 0 (शून्य) है। आईएफएसई का उपयोग एनईएफटी प्रणाली द्वारा मूल/गंतव्य बैंकों/शाखाओं की पहचान करने और संबंधित बैंकों/शाखाओं को उचित रूप से संदेश भेजने के लिए किया जाता है।
उ. जो उपयोगकर्ता ईसीएस क्रेडिट के माध्यम से भुगतान करना चाहते हैं उन्हें किसी अनुमोदित ईसीएस केन्द्र में हिताधिकारी का विवरण जैसे (नाम, बैंक / शाखा / हिताधिकारी का खाता संख्या, गंतव्य बैंक शाखा का माइकर कोड, आदि), तथा वह तारीख जिस में हिताधिकारी को क्रेडिट दिया जाना है, को एक निर्धारित प्रारूप (इनपुट फाइल) में अपने प्रायोजक बैंक को भेजना होता है. भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट में http://www.rbi.org.in/scripts/ECSUser.aspx. पर ईसीएस क्रेडिट की सुविधा प्रदान करने वाले केंद्रों की सूची उपलब्ध है.
ईसीएस केंद्र का प्रबंधन करने वाला बैंक तब प्रायोजक बैंक का खाता निर्धारित दिन को डेबिट करता है और गंतव्य बैंक का खाता क्रेडिट करके गंतव्य बैंक शाखाओं के माध्यम से अन्तिम हिताधिकारी का खाता क्रेडिट करता है.
भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट में ईसीएस क्रेडिट योजना के बारे में अधिक जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक की वेवसाइट http://www.rbi.org.in/scripts/ECSUser.aspx पर प्राप्त कर सकते हैं.
These guidelines have been notified by Reserve Bank of India in its Notification FEMA No.19 dated 3rd May 2000 as amended from time to time which can be accessed at the Reserve Bank’s website fema.rbi.org.in.
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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बड़े पैमाने पर लोगों को मुद्रास्फीति दर्शाता है और इसलिए, वैश्विक रूप में, सीपीआई या रिटेल मूल्य सूचकांक (आरपीआई) का केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रास्फीति लक्ष्य के साथ ही साथ आईआईबी में मुद्रास्फीति सुरक्षा के लिए प्रयोग किया जाता है।
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भारत में, पूरे भारत का सीपीआई जनवरी 2011 से जारी किया जा रहा है और यह स्थायी होने में कुछ समय लेगा। मौद्रिक नीति अपने मूल्य स्थिरीकरण के लिए डबल्यूपीआई को लक्षित करना जारी रखेगा। उक्त को देखते हुए, आईआईबी में मुद्रास्फीति संरक्षण के लिए डबल्यूपीआई पर विचार करने का निर्णय लिया है।
उत्तर:
ए. फेटर्स (FETERS) के तहत आवश्यक विनियामक रिपोर्टिंग (आर-विवरणी) एसएनआरआर खाते रखने वाले बैंक द्वारा की जाएगी।
बी. एसएनआरआर खाते को धारण करने वाली अनिवासी इकाई के किसी ऑफशोर खाते से एसएनआरआर खाते में/ खाते से किसी भी तरह के क्रेडिट/ डेबिट को एडी बैंक अंतरण प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट किया जाएगा।
सी. किसी घरेलू (भारतीय) पक्ष से/को एसएनआरआर खाते से/ खाते में किए जाने वाले किसी भी क्रेडिट/ डेबिट को संबंधित अंतर्निहित लेनदेन (आयात, निर्यात, व्यापार ऋण, सेवाएं, ईसीबी, आदि) के आधार पर रिपोर्ट किया जाएगा।
ध्यान रहे कि एसएनआरआर खाता रखने वाला बैंक इन खातों के संबंध में अपने पास धारित अन्य आईएनआर वोस्ट्रो खातों पर लागू रिपोर्टिंग प्रक्रिया के समान ही रिपोर्टिंग प्रक्रिया का अनुपालन करेगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए कृपया ‘आर-विवरणियों का समेकन : फेटर्स के तहत रिपोर्टिंग’ विषय पर जारी दिनांक 20 मार्च 2019 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 25 का भी संदर्भ लें।
उत्तर: "प्रायोजन" का अर्थ एनबीएफसी द्वारा आईडीएफ के 30 से 49% के बीच इक्विटी भागीदारी है।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022