RbiSearchHeader

Press escape key to go back

पिछली खोज

पृष्ठ
भारतीय रिज़र्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट

RbiAnnouncementWeb

RBI Announcements
RBI Announcements

FAQ DetailPage Breadcrumb

RbiFaqsSearchFilter

सामग्री प्रकार:

श्रेणी पहलू

केटेगरी

कस्टम पहलू

ddm__keyword__26256231__FaqDetailPage2Title_en_US

खोज परिणाम

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007

उत्तर. पीएसएस अधिनियम, 2007 की धारा 4 के अनुसार रिज़र्व बैंक के अलावा कोई भी व्यक्ति रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत किए बिना भुगतान प्रणाली को संचालित या शुरू नहीं कर सकता है। भुगतान प्रणाली शुरू करने या संचालित करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को पीएसएस अधिनियम, 2007 (धारा 5) के तहत प्राधिकरण के लिए आवेदन करना होगा।

प्राधिकरण के लिए आवेदन भुगतान और निपटान प्रणाली विनियम, 2008 के विनियम 3(2) के तहत फॉर्म ए के अनुसार किया जाना चाहिए। आवेदन को विधिवत भरकर निर्धारित दस्तावेजों के साथ रिज़र्व बैंक को जमा करना होगा।

भुगतान प्रणाली संचालित करने वाली या ऐसी प्रणाली स्थापित करने की इच्छा रखने वाली सभी संस्थाओं को अधिनियम के तहत प्राधिकरण के लिए आवेदन करना आवश्यक है। प्राधिकरण के लिए आवेदन निम्न लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है। भुगतान प्रणाली का कोई भी अनधिकृत संचालन पीएसएस अधिनियम, 2007 के तहत एक अपराध होगा और तदनुसार उस अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा।

सीटीएस के तहत, भौतिक चेक प्रस्तुत करने वाले बैंक में रखे जाते हैं और भुगतान करने वाले बैंकों की ओर नहीं जाते। यदि कोई ग्राहक चाहे, तो बैंक प्रमाणित / प्रामाणिक चेक की छवियाँ प्रदान कर सकते हैं। यदि किसी ग्राहक को भौतिक चेक देखना या प्राप्त करना हो, तो इसे प्रस्तुत करने वाले बैंक से प्राप्त करना होगा, जिसके लिए उसे अपने बैंक से अनुरोध करना होगा। इसके लिए कुछ लागत / शुल्क भी लग सकता है। कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, जो प्रस्तुत करने वाले बैंक चेक को ट्रंकेट करते हैं, उन्हें भौतिक लिखतों को 10 वर्षों की अवधि के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है।

उत्तर. हां, पीपीआई की नकद लोडिंग की सीमा ₹50,000/- प्रति माह है, जो पीपीआई की समग्र सीमा के अधीन है (एक तरह के लघु पीपीआई के मामले अनुमति नहीं है)। इलेक्ट्रॉनिक/ऑनलाइन माध्यमों से पीपीआई को लोड करने की सीमा पीपीआई की समग्र सीमा के अधीन है।

दिनांक 16 दिसंबर 2010 की भारत सरकार अधिसूचना में अधिसूचित प्रकार से बीएसबीडीए-छोटा खाता निम्‍नलिखित शर्तों पर होंगे :

  1. ऐसे खातों में कुल क्रेडिट एक वर्ष में एक लाख रूपए से अधिक न हो।

  2. खातों में अधिकतम शेष किसी भी समय पचास हजार रूपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

  3. किसी महीने में नकद आहरणों और अंतरणों के रूप में कुल नामे (डेबिट) दस हजार रूपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

  4. सामान्‍य केवाइसी औपचारिकताएं पूरी किए बिना विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) छोटे खातों में जमा (क्रेडिट) नहीं किया जा सकेगा।

  5. छोटे खाते प्रारंभ में 12 महीनों की अवधि के लिए वैध होते हैं जिन्‍हें यदि व्‍यक्ति आधिकारिक रूप से वैध प्रलेख के लिए आवेदन करने का प्रमाण प्रस्‍तुत करें तो और 12 महीनों के लिए बढ़ाया जा सकता है।

  6. छोटे खाते बैंकों की केवल सीबीएस सहबद्ध शाखाओं में ही अथवा ऐसी शाखाओं में खोले जा सकते हैं जहां शर्तों को पूरा किए जाने की व्‍यक्ति द्वारा (मैन्‍युअली)निगरानीकरनासंभवहै।

Ans : It is the responsibility of the user institution to communicate to the beneficiary the details of credit that is being afforded to his / her account, indicating the proposed date of credit, amount and related particulars of the payment. Destination banks have been advised to ensure that the pass books / statements given to the beneficiary account holders reflect particulars of the transaction / credit provided by the ECS user institutions. The beneficiaries can match the entries in the passbook / account statement with the advice received by them from the User Institutions. Many banks also give mobile alerts / messages to customers after credit of such funds to accounts.

  • आईआईबी सरकारी प्रतिभूति होगी और जी-सेक में विभिन्न वर्गों के पात्र निवेशक, आईआईबी में भी निवेश करने के लिए पात्र होंगे।

  • एफ़आईआई आगामी आईआईबी में निवेश के लिए पात्र होंगे बशर्ते जी-सेक में उनके निवेश के लिए सीमा है (वर्तमान में यूएस डॉलर 25 बिलियन)।

सिस्‍टम रिज़र्व बैंक के स्‍वामित्‍व में है। ग्राहकों के लिए कोई प्रभार नहीं है। लेकिन चूंकि सभी सौदे सीसीआइएल द्वारा गारंटीकृत होते हैं और उनका निपटान किया जाता है, इसलिए प्राथमिक व्‍यापारियेां को निपटान प्रभार देने होंगे और अपने ग्राहकों की ओर से सीसीआइएल के पास पर्याप्‍त मार्जिन जमा कराने होंगे।

उत्तर: आईडीएफ-एनबीएफसी न्यूनतम 5 वर्ष की परिपक्वता अवधि के रुपये या डॉलर मूल्यवर्ग के बांड जारी करके संसाधन जुटाएंगे। आईडीएफ-एमएफ, एमएफ की इकाइयों को जारी करके संसाधन जुटाएंगे।

एडीएफ के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए कुल समय उस क्लस्टर पर निर्भर करेगा जिसमें बैंक दृष्टिकोण पत्र में दी गई कार्यप्रणाली के अनुसार प्रक्रिया और प्रौद्योगिकी परिपक्वता का आकलन करने के बाद खुद को रखता है। तथापि, यह उम्मीद की जाती है कि उन्नत आईटी सिस्टम और कम्प्यूटरीकृत वातावरण में काम करने का अनुभव रखने वाले बैंक सबसे कम समय में, यहां तक ​​​​कि 2-3 महीने में भी एडीएफ को लागू करेंगे। सामान्य तौर पर, बैंकों को कम से कम संभव समय सीमा के भीतर उद्देश्यों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।
उ. ईसीएस क्रेडिट देने वाली संस्था को इससे कई लाभ हैं: • प्रशासनिक व्यवस्था, मुद्रण, प्रेषण और कागज लिखतों के समाधान में होने वाली बचत ईसीएस क्रेडिट नहीँ अपनाने की स्थिति में प्राप्त नहीं होती. • पारगमन में लिखतों के खोने/ चोरी होने और धोखाधड़ीपूर्ण नकदीकरण होने की संभावना नहीं है.• दक्ष भुगतान माध्यम जिसमें निर्धारित दिनांक को हिताधिकारियों को क्रेडिट मिलना सुनिश्चित है.•लागत कम है.
हाँ। बैंकों को यह अधिकार है कि वे कट ऑफ तिथि को जमा राशि में से अपनी देय राशि का समायोजन कर सकते हैं। जमा बीमा ऐसी देय राशियों के समायोजन के बाद उपलब्ध है।

उत्तर: हाँ । उपर्युक्त प्रश्न 10 में उल्लिखित लेनदेन को छोड़कर। तथापि, म्यांमार के साथ किए जाने वाले व्यापार लेनदेन का एसीयू व्यवस्था के अतिरिक्त किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्रा में निपटान किया जा सकता है। श्रीलंका के साथ किए जाने वाले व्यापारिक लेनदेन सहित सभी पात्र चालू खाता लेनदेन का एसीयू व्यवस्था के बाहर निपटान करने की अनुमति अगली सूचना जारी किए जाने तक दी गयी है। साथ ही, 1 जुलाई 2016 से ‘यूरो’ में किए गए व्यापारिक लेनदेन सहित सभी पात्र चालू खाता लेनदेन का एसीयू व्यवस्था के बाहर निपटान करने की अनुमति अगली सूचना जारी किए जाने तक दी गयी है।

Travellers are allowed to purchase foreign currency notes/coins only up to USD 2000. Balance amount can be taken in the form of traveller’s cheque or banker’s draft. Exceptions to this are (a) travellers proceeding to Iraq and Libya can draw foreign exchange in the form of foreign currency notes and coins not exceeding US$ 5000 or its equivalent; (b) travellers proceeding to the Islamic Republic of Iran, Russian Federation and other Republics of Commonwealth of Independent States can draw entire foreign exchange released in form of foreign currency notes or coins.

उत्तर: लाभार्थी की पहचान के आवश्यक तत्व हैं:

लाभार्थी का नाम
लाभार्थी की शाखा का नाम
लाभार्थी के बैंक का नाम
लाभार्थी का खाता प्रकार
लाभार्थी का खाता संख्या
लाभार्थी की शाखा आईएफएससी
प्रेषक और लाभार्थी कानूनी इकाई पहचानकर्ता (पात्र लेनदेन के लिए)

वर्तमान में, एडी श्रेणी-I बैंकों, एडी श्रेणी-II और संपूर्ण मुद्रा परिवर्तकों (एफएफएमसी) के माध्यम से विदेशी मुद्रा या विदेशी मुद्रा में निर्दिष्ट ट्रैवेलर्स चेक का भारतीय रुपये में अदला-बदली संभव है। इसके अलावा, एडी श्रेणी-I बैंक, एडी श्रेणी- II और एफएफएमसी विदेशी मुद्रा की खरीद करने के लिए फ्रैंचाइज़ी (जिन्हें एजेंट के रूप में भी जाना जाता है) नियुक्त कर सकते हैं।

उत्तर: विदेशी मुद्रा में व्यापार करने के लिए प्राधिकृत बैंक आईडीसी जारी कर सकते हैं जिनका प्रयोग निवासी द्वारा उसके विदेश में दौरे के दौरान नकदी आहरण के लिए या किसी व्यापारिक स्थापना के भुगतान के लिए किया जा सकता है । आईडीसी प्रयोग केवल चालू खाता लेनदेनों के लिए अनुमत है और इन कार्डों के प्रयोग एलआरएस सीमा के भीतर किया जाएगा।

प्राधिकृत डीलर बैंक विदेश में निजी / कारोबारी यात्रा पर जा रहे निवासियों को स्टोर वैल्यू कार्ड/चार्ज कार्ड/स्मार्ट कार्ड जारी कर सकते हैं जो विदेशी व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भुगतान करने और एटीएम टर्मिनलों से नकदी निकालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं । ऐसे कार्ड जारी करने के लिए रिज़र्व बैंक से पूर्वानुमती आवश्यक नहीं है। तथापि, ऐसे कार्डों का प्रयोग अनुमत चालू खाता लेनदेनों तक सीमित है और इन कार्डों के प्रयोग एलआरएस सीमा के अधीन होगा।

भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के साथ या विदेश में किसी बैंक के साथ, जैसा कि वर्तमान विदेशी मुद्रा विनियमों के अधीन अनुमत है, विदेशी मुद्रा खाते रखने वाले निवासी व्यक्ति, विदेशी बैंकों तथा अन्य विख्यात एजेंसियों से आईसीसी प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र हैं। भारत में या विदेश में, कार्ड पर प्रभार, कार्डधारक के विदेशी मुद्रा खाते (खातों में रखी निधियों में से या भारत से, केवल बैंक के माध्यम से जहां कार्ड धारक का चालू या बचत खाता है, से विप्रेषण, यदि कोई हो, में से दिए जा सकते हैं । इस प्रयोजन के लिए विप्रेषण विदेश में कार्ड जारी करने वाली एजेंसी को सीधे भी भेजा जा सकता है, और किसी अन्य पार्टी को नहीं । यह भी स्पष्ट किया जाता है कि लागू ऋण सीमा कार्ड जारी करने वाले बैंकों द्वारा निर्धारित ऋण सीमा होगी । इस सुविधा के अधीन रिज़र्व बैंक द्वारा कोई विप्रेषण, यदि कोई हो की मौद्रिक सीमा निर्धारित नहीं की गई है । ऐसे व्यक्ति के भारत के बाहर दौरे पर होते समय उसके द्वारा अपने व्यय के भुगतान के लिए किए गए आईसीसी के प्रयोग पर एलआरएस सीमा लागू नहीं होगी।

विभिन्न प्रयोजनों से विदेश यात्रा के लिए आईसीसी/आईडीसी का उपयोग किया जा सकता है तथा विदेशी जर्नल के लिए अभिदान, इंटरनेट अभिदान नीआदि के लिए व्यक्तिगत भुगतान करने के लिए भि किया जा सकता है। तथापि लाटरी टिकट, प्रतिबंधित पत्रिकाओं, आदि की खरीद जैसी फेम(कैट) संशोधन नियमावली, 2015 की अनुसूची 1 में निर्दिष्ट प्रतिबंधित लेनदेन के लेई आईसीसी/आईडीसी के प्रयोग की अनुमति नहीं है।

नेपाल तथा भूटान में विदेशी मुद्रा में भुगतान करने के लिए इन लिखतों के प्रयोग की अनुमति नहीं है ।

प्रतिभूतियों की लागत, जहां भी लागू हो उपार्जित ब्याज़ और कमीशन ग्राहकों से प्राप्त करने के तौर तरीके फेसिलिटेटर द्वारा तैयार किया जाना चाहिए और इस प्रयोजन के लिए ग्राहक के साथ निष्पादित करार में इसे स्पष्ट रूप से कहा जाना चाहिए।
No. The Banking Ombudsman does not charge any fee for filing and resolving customers’ complaints.
नहीं। चूँकि यह धनराशि अवयस्क बच्चे की संपत्ति है न कि बैंक के कर्मचारी की, अत: अतिरिक्त ब्याज नहीं दिया जा सकता।
Yes, capitalization of export proceeds is permitted subject to compliance of certain guidelines. i.e. the exports have not remained outstanding beyond the stipulated period of realisation etc.

Web Content Display (Global)

आरबीआई मोबाइल एप्लीकेशन इंस्टॉल करें और लेटेस्ट न्यूज़ का तुरंत एक्सेस पाएं!

हमारा ऐप इंस्टॉल करने के लिए QR कोड स्कैन करें

RbiWasItHelpfulUtility

पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022

क्या यह पेज उपयोगी था?