भारत में म्युचुअल फंड (एमएफ) कंपनियों और उनके परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) की विदेशी देयताओं और परिसंपत्तियों (एफएलए) पर सर्वेक्षण
उत्तर: यदि कंपनी के खातों को देय तिथि अर्थात 15 जुलाई से पहले ऑडिट नहीं किया जाता है, तो एमएफ सर्वेक्षण प्रश्नावली गैर-लेखापरीक्षित (अनंतिम) खाते के आधार पर प्रस्तुत की जानी चाहिए।
उत्तर: नहीं, मौजूदा ढांचा हरित जमाराशि को केवल भारतीय रुपये में मूल्यवर्गित करने की अनुमति देता है।
उत्तर:
• ओटीसी व्युत्पन्नी
- रिटेल प्रयोक्ताओं के लिए
- विदेशी मुद्रा फॉरवर्ड
- विदेशी मुद्रा स्वैप
- करेंसी स्वैप
- कॉल और पुट आप्शन की खरीद
- कॉल और पुट स्प्रेड की खरीद
- गैर-रिटेल प्रयोक्ताओं के लिए: खुदरा उपयोगकर्ताओं को पेश किए जाने हेतु सभी विदेशी मुद्रा उत्पाद, कवर्ड विदेशी मुद्रा विकल्प, विदेशी मुद्रा फॉरवर्ड / विदेशी मुद्रा स्वैप / मुद्रा स्वैप / विदेशी मुद्रा विकल्प को करने या रद्द करने का विकल्प और कोई अन्य विदेशी मुद्रा व्युत्पन्नी संविदा जिसमें घटकों के रूप में नकद लिखित और / या अनुमत व्युत्पन्नयों वाले व्युत्पन्नी शामिल हैं , लेकिन लिवरेज व्युत्पन्नी और उन व्युत्पन्नीयों को छोड़कर , जिसमे विशेष रूप से अनुमत व्युत्पन्नयों के अलावा अंतर्निहित व्युत्पन्नी लिखित शामिल हो ।
• एक्सचेंज ट्रेडेड व्युत्पन्नी
- विदेशी मुद्रा फ्यूचर
- विदेशी मुद्रा आप्शन
उत्तर: ये दिशानिर्देश डिजिटल उधार दिशानिर्देशों के अनुसार 'डिजिटल उधार' की परिभाषा को पूरा करने वाले सभी लेन-देनों पर लागू होते हैं।
उत्तर: पूंजीगत लिखतों / परिवर्तनीय नोटों के अधिग्रहण/ अंतरण के लिए निवासी और अनिवासी अर्जक एस्क्रो एजेंट के रूप में समय-समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (गैर-ऋण लिखत) नियमावली, 2019 के प्रावधानों तथा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 की अनुसूची-5 के में विनिर्दिष्ट नियमों और शर्तों के अनुपालन में भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास भारतीय रूपयों में एस्क्रो खाता खोल सकते हैं।
बीजी के आह्वान/एलसी के हस्तांतरण के कारण बनाई गई वित्त पोषित सुविधा के मामले में, बैंक की ऋण हामीदारी अंकन नीति के अनुसार बैंक संबंधित क्रेडिट जोखिम प्रीमियम को ध्यान में रखते हुए हस्तांतरित राशि पर उचित ब्याज दर ले सकता है। हालाँकि, नियत तिथि के भीतर उधारकर्ता द्वारा पुनर्भुगतान न करने पर उस वित्त पोषित सुविधा पर जुर्माना, यदि कोई हो, केवल दंडात्मक शुल्क के रूप में लगाया जा सकता है, दंडात्मक ब्याज के रूप में नहीं।
उत्तर. हां। मास्टर निदेश- भारतीय रिज़र्व बैंक (जमाराशियों पर ब्याज दर) निदेश, 2025 के पैरा 15, 18 और 27 के संदर्भ में, बैंक अपने निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित व्यापक नीति के अनुसार समय-पूर्व आहरण के लिए दंड लगा सकते हैं। दंड के घटकों को जमा करने के समय जमा धारकों के ध्यान में स्पष्ट रूप से लाना चाहिए।
Ans: DLG arrangements are not permitted on the loans which are covered by the credit guarantee schemes administered by trust funds as specified under para 2 of Review of Prudential Norms – Risk Weights for Exposures guaranteed by Credit Guarantee Schemes (CGS) dated September 07, 2022, as amended from time to time.
टिप्पणी: ये उदाहरण समझने में आसानी के लिए उपलब्ध कराए गए हैं और केवल संकेतात्मक हैं, संपूर्ण नहीं।
उदाहरण 1
मान लें कि 01 अप्रैल 2024 को आरई द्वारा डीएलजी व्यवस्था के अंतर्गत ₹40 करोड़ (कुल स्वीकृत ऋणों में से) का पोर्टफोलियो निर्धारित किया गया है (डीएलजी सेट)। यह पोर्टफोलियो विशिष्ट डीएलजी व्यवस्था के प्रयोजन के लिए "अवरोधित" रहेगा - जिसका अर्थ है कि ऋण चुकौती/राइट-ऑफ के अलावा इसमें कोई भी ऋण आस्ति जोड़ी अथवा हटाई नहीं जा सकती है। आरई में ऐसे कई डीएलजी सेट हो सकते हैं।
ऐसे पोर्टफोलियो पर डीएलजी कवर की सीमा ₹2 करोड़ (₹40 करोड़ का 5%) तय की जाएगी, जो ऋण वितरित होने पर आनुपातिक रूप से सक्रिय हो जाएगी।
उदाहरण 2
मान लें कि उपर्युक्त डीएलजी सेट में से ₹10 करोड़ की राशि का ऋण तुरंत वितरित किया जाता है। फिर 1 अप्रैल 2024 को, पोर्टफोलियो के लिए उपलब्ध डीएलजी कवर ₹0.5 करोड़ (वितरित का 5%) होगा।
इसके बाद, यदि 15 अप्रैल 2024 को ₹10 करोड़ का ऋण आगे वितरित किया जाता है, तो 15 अप्रैल 2024 से डीएलजी कवर आनुपातिक रूप से बढ़कर ₹1 करोड़ हो जाएगा।
(प्रत्येक मामले के सारांश के लिए नीचे दी गई तालिका भी देखें)
केस 1: यदि 30 जून 2024 तक, ₹5 करोड़ के ऋण बिना किसी चूक (डिफ़ॉल्ट) के परिपक्व होते है । इस मामले में, आरई की खाता बहियों में लंबित संविभाग (पोर्टफोलियो) ₹15 करोड़ होगा और डीएलजी कवर ₹1 करोड़ पर रहेगा।
केस 2: इसके बाद, Q2-2024 के दौरान ₹2 करोड़ का डिफॉल्ट होता है और परिणामस्वरूप आरई द्वारा पूरे डीएलजी (₹1 करोड़ 1 ) को उद्धरित कर दिया जाता है। इस मामले में, 30 सितंबर 2024 तक आरई की खाता बहियों में लंबित पोर्टफोलियो ₹15 करोड़ (₹20 करोड़ का मूल पोर्टफोलियो घटाकर ₹5 करोड़ का ऋण, जो बिना डिफ़ॉल्ट के परिपक्व हुआ) होगा, लेकिन डीएलजी के लिए कोई गुंजाइश उपलब्ध नहीं होगी क्योंकि ₹1 करोड़ (वितरित का 5%) का अधिकतम अनुमेय डीएलजी कवर समाप्त हो चुका है। ).
केस 3: आगे बढ़ते हुए, मान लेते हैं कि आरई द्वारा अक्टूबर 2024 के दौरान ₹2 करोड़ के डिफॉल्ट ऋण पर ₹1 करोड़ की वसूली की गई है। ऐसे मामले में, 31 अक्टूबर 2024 तक आरई की खाता बहियों में लंबित पोर्टफोलियो की राशि घटकर ₹14 करोड़ ((₹20 करोड़ के मूल पोर्टफोलियो से बिना किसी डिफॉल्ट के परिपक्व हुए ₹5 करोड़ के ऋण से घटाकर ₹1 करोड़ के ऋण जो डिफॉल्ट में थे और वसूल किए गए). हो जाएगी। हालाँकि, डीएलजी कवर को बहाल करने के लिए ₹1 करोड़ की वसूली राशि नहीं जोड़ी जा सकती है।
(आंकड़े करोड़ ₹ में)
| अवधि | संवितरित | बिना डिफ़ॉल्ट के परिपक्व हो रहा ऋण | डिफ़ॉल्ट राशि | लागू डीएलजी | वसूली/बट्टे खाते में डालना | बकाया पोर्टफोलियो | उपलब्ध डीएलजी कवर |
| प्रारंभिक स्थिति | 10 | - | - | - | - | 10 | 0.5 |
| आगे का संवितरण | 10 | - | - | - | - | 20 | 1 |
| केस 1 | 20 | 5 | - | - | - | 15 | 1 |
| केस 2 | 20 | 5 | 2 | 1 | - | 15 | 0 |
| केस 3 | 20 | 5 | 2 | 1 | 1 | 14 | 0 |
1 यह माना गया है कि अब तक इन ऋणों पर शून्य मूलधन/ब्याज प्राप्त हुआ है।
उत्तर: संदर्भ अवधि के दौरान कुल चालान मूल्य मूल रूप से भारतीय रुपये (आईएनआर) में होना चाहिए (जिसमें विदेश में सहायक(कों)/सहयोगी(यों) के बिलिंग भी शामिल होना चाहिए)।
आरबी-आइओएस, 2021 के तहत शामिल नहीं की गई आरई से संबंधित शिकायतों को समाधान के लिए आरबीआई के उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण कक्षों (सीईपीसी) (वर्तमान में 30 आरबीआई कार्यालयों में स्थित) को अग्रेषित किया जाता है। ऐसी शिकायतें पोर्टल पर या प्रश्न 16 में दिए गए पते पर भी दर्ज की जा सकती हैं। शिकायत दर्ज करते समय उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर शिकायतकर्ता को एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से इसकी सूचना दी जाएगी।
उत्तर: उपयोग में सुलभता के लिए, ई₹ भौतिक मुद्रा के समान मूल्यवर्ग में उपलब्ध है। यह उपयोगकर्ताओं को भौतिक मुद्रा नोटों के उपयोग के समान ही परिचितता और सुविधा प्रदान करता है।
उत्तर: अधिकांश मुद्राओं के लिए विनिमय दर विदेशी मुद्रा बाजारों में निर्धारित की जाती है, खासकर यूएसडी, यूरो, जेपीवाई, आदि वैश्विक मुद्राओं के लिए ऐसा होता है। लेनदेन के संक्रमण चरण में, यदि दो मुद्राओं (जैसे:- आईएनआर और श्रीलंकाई रुपया) के बीच प्रत्यक्ष विनिमय दरों को निर्धारित करने वाला कोई बाजार उपलब्ध नहीं है, तो उन मामलों में दो व्यापारिक भागीदार देशों की मुद्राओं के बीच विनिमय दर उस आधार पर निर्धारित होगी, जहां प्रत्येक करेंसी के बदले वैश्विक मुद्राओं में परिवर्तन के लिए बाजार उपलब्ध है। इन्हें क्रॉस करेंसी दर के माध्यम से निर्धारित किया जाएगा।
उत्तर. हाँ, उपरोक्त प्रश्न 5 के उत्तर में उल्लिखित दस्तावेज संयुक्त खाते के सभी खाताधारकों द्वारा आरई को प्रस्तुत किए जाएंगे।
उत्तर: हां, जब तक कि संभावित जमाकर्ता पहले से ही बैंक का केवाईसी अनुपालक ग्राहक न हो।
विनियामकीय पूंजी के नजरिए से बाहरी रेटिंग एजेंसियों से क्रेडिट रेटिंग कराया जाना तब तक अनिवार्य नहीं है जब तक किसी प्रतिपक्षकार के लिए कुल अधिकतम एक्सपोजर ₹ 7.5 करोड़ की सीमा से अधिक नहीं है, जो कि कतिपय अन्य शर्तों को पूरा करने के अधीन है।
(कृपया विनियामकीय खुदरा पोर्टफोलियो - जोखिम भार के लिए संशोधित सीमा संबंधी 12 अक्तूबर 2020 का परिपत्र देखें।)
उत्पाद की प्रमुख विशेषताओं के आधार पर, संबंधित पीआर के आरएस के लिए लागू पात्रता मानदंड और नेटवर्थ मानदंड आईओआरएस में भागीदारी के लिए आवेदक इकाई पर भी लागू होंगे।
उत्तर: शमन प्राधिकारी द्वारा एक आदेश पारित किया जाता है जिसमें उल्लंघन तथा फेमा, 1999 के उन प्रावधानों, जिनका उल्लंघन किया गया है, का ब्योरा दिया जाता है। इस शमन आदेश में ही शमन राशि भी दर्शायी जाती है। शमन आदेश में निर्दिष्ट शमन राशि का भुगतान कर दिए जाने पर शमन की प्रक्रिया पूरी होती है।
यदि चेक परिवहन या समाशोधन प्रक्रिया में खो जाते हैं, तो बैंक को तुरंत इसे प्रस्तुत करने वाले ग्राहक (लाभार्थी) के ध्यान में लाना चाहिए ताकि ग्राहक आहर्ता को स्टॉप पेमेंट दर्ज करने के लिए सूचित कर सके और यह भी सुनिश्चित कर सके कि खोए हुए चेक/लिखत की राशि के क्रेडिट न होने के कारण अन्य जारी किए गए चेक अस्वीकार न हों।
उत्तर. दोनों प्रकार के लघु पीपीआई पुनः लोड करने योग्य हैं और इनका उपयोग केवल वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए किया जाएगा। उनकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
₹10,000/- तक के पीपीआई (नकद लोडिंग सुविधा के साथ):
ए) किसी भी माह के दौरान लोड की गई राशि ₹10,000/- से अधिक नहीं होगी;
बी) वित्तीय वर्ष के दौरान लोड की गई कुल राशि ₹1,20,000/- से अधिक नहीं होगी;
सी) किसी भी समय बकाया राशि ₹10,000/- से अधिक नहीं होगी;
डी) किसी भी महीने के दौरान डेबिट की गई कुल राशि ₹10,000/- से अधिक नहीं होगी;
ई) पीपीआई 24 महीने के भीतर पूर्ण-केवाईसी पीपीआई में परिवर्तित किए जाएंगे; तथा
एफ) लोडिंग / पुनः लोडिंग नकद अथवा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हो सकेगी।
₹10,000/- तक के पीपीआई (नकद लोडिंग सुविधा के बिना):
ए) किसी भी माह के दौरान लोड की गई राशि ₹10,000/- से अधिक नहीं होगी;
बी) वित्तीय वर्ष के दौरान लोड की गई कुल राशि ₹1,20,000/- से अधिक नहीं होगी;
सी) किसी भी समय बकाया राशि ₹10,000/- से अधिक नहीं होगी;
डी) लोडिंग/पुनः लोडिंग बैंक खाते/क्रेडिट कार्ड/पूर्ण-केवाईसी पीपीआई से होगी; तथा
ई) 24 दिसंबर 2019 को मौजूदा लघु पीपीआई (नकद लोडिंग सुविधा के साथ) को, पीपीआई धारक द्वारा चाहने पर, ऐसे पीपीआई में परिवर्तित किया जा सकता है।
Ans : ECS Credit offers many advantages to the beneficiary –
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The beneficiary need not visit his / her bank for depositing the paper instruments which he would have otherwise received had he not opted for ECS Credit.
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The beneficiary need not be apprehensive of loss / theft of physical instruments or the likelihood of fraudulent encashment thereof.
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Cost effective.
-
The beneficiary receives the funds right on the due date.
उत्तर: हां, एनईएफटी का उपयोग देश में एनआरई और एनआरओ खातों से/में निधि अंतरण के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 2000 (फेमा) और वायर ट्रांसफर दिशानिर्देशों के प्रावधानों के पालन के अधीन है।
यदि कोई बैंक परिसमापन में जाता है, तो डीआईसीजीसी परिसमापक को दावा सूची प्राप्त होने की तारीख से दो महीने के भीतर प्रत्येक जमाकर्ता की पांच लाख रुपये तक की दावा राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। परिसमापक को प्रत्येक बीमित जमाकर्ता को उनकी दावा राशि के अनुरूप दावा राशि का वितरण करना होता है।
यदि एक बैंक का पुनर्निर्माण या समामेलन / दूसरे बैंक के साथ विलय किया जाता है: डीआईसीजीसी संबंधित बैंक को जमा की पूरी राशि या उस समय लागू बीमा कवर की सीमा के बीच का अंतर, जो भी कम हो और पुनर्गठन / समामेलन योजना के तहत उसके द्वारा प्राप्त राशि को हस्तांतरिती बैंक / बीमित बैंक / हस्तांतरिती बैंक, जो भी हो, के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से दावा सूची की प्राप्ति की तारीख से दो महीने के भीतर भुगतान करता है।
इस योजना के तहत, रिज़र्व बैंक एडी श्रेणी-I, एडी श्रेणी-II और एफएफएमसी को उनके विकल्प पर सीमित मुद्रा परिवर्तन कारोबार अर्थात विदेशी मुद्रा नोटों, सिक्कों या यात्री चेकों का परिवर्तन भारतीय रुपये में करने के उद्देश्य से एजेंसी या फ्रैंचाइज़ी समझौता करने की अनुमति देता है।
फ्रैंचाइज़ी कोई भी ऐसी इकाई हो सकती है जिसके पास कारोबार करने का स्थान हो और जिसकी निवल स्वामित्व निधि न्यूनतम 10 लाख रुपये हो। फ्रैंचाइजी केवल प्रतिबंधित मुद्रा परिवर्तन व्यवसाय ही कर सकते हैं।
फ्रैंचाइज़र के रूप में कोई एडी श्रेणी-I बैंक / एडी श्रेणी- II / एफएफएमसी को यह स्वतंत्रता होगी कि वह फ्रैंचाइज़ी के साथ आपसी समझौते के माध्यम से इस व्यवस्था की समयावधि और कमीशन अथवा शुल्क के संबंध में निर्णय ले सके। किए जाने वाले एजेंसी/फ्रैंचाइज़ी करार में निम्नलिखित मुख्य विशेषताएं शामिल होनी चाहिए:-
ए. फ़्रैंचाइज़ी को अपने फ़्रैंचाइज़र का नाम, विनिमय दर के साथ-साथ इस बात को भी प्रदर्शित करना होगा कि वे केवल विदेशी मुद्रा खरीदने के लिए अधिकृत हैं, मुख्य रूप से अपने कार्यालयों में । विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने के लिए विनिमय दर एडी श्रेणी-I बैंक/प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-II/ एफएफएमसी द्वारा उनकी शाखाओं में लगायी जाने वाली दैनिक विनिमय दरों के समान या उसके करीब होनी चाहिए।
बी. फ्रैंचाइजी द्वारा खरीदी गई विदेशी मुद्रा को खरीद की तारीख से 7 कार्य दिवसों के भीतर उसके फ्रैंचाइज़र के पास ही सौंपा जाना चाहिए।
सी. फ्रैंचाइज़ी द्वारा लेनदेन का अभिलेख समुचित रूप से रखना ।
डी. फ़्रैंचाइज़र द्वारा फ़्रैंचाइजी का ऑन-साइट निरीक्षण वर्ष में कम से कम एक बार किया जाना चाहिए।
उत्तर: भारत में निवास करने वाले व्यक्ति भारत के दौरे पर आए भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति के रहने- खाने तथा उससे संबंधित सेवाओं अथवा भारत में आने जाने तथा उसके भीतर की गई यात्रा के संबंध में किए गए व्यय के प्रति भारतीय रुपये में भुगतान करने के लिए स्वतंत्र है।
निम्नलिखित सरकारी संगठनों / एजेंसियों की जमाराशियों के अलावा अन्य सरकारी विभाग /सरकारी योजना के नाम पर बचत बैंक खाता नहीं खोला जा सकता -
1. बैंक द्वारा वित्तपोषित प्राथमिक सहकारी ऋण समिति ।
2. खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड ।
3. कृषि उत्पाद बाज़ार समितियाँ
4. सोसायटी रजिस्ट्रिकरण अधिनियम, 1860 या राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में लागू अन्य किसी समान कानून के अंतर्गत पंजीकृत समितियाँ (सोसायटी)।
5. कंपनी अधिनियम, 1956 द्वारा नियंत्रित कंपनियां, जिन्हें उक्त अधिनियम की धारा 25 के अंतर्गत अथवा भारतीय कंपनी अधिनियम, 1913 के तदनुरूप प्रावधान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा लाइसेंस मिला है तथा अपने नाम के आगे ‘लिमिटेड’ या "प्राइवेट लिमिटेड" शब्द नहीं लगाने की अनुमति मिली है।
6. उपर्युक्त खंड (i) में उल्लिखित संस्थाओं के अलावा ऐसी संस्थाएं जिनकी समस्त आय पर आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत आयकर से छूट प्राप्त है।
7. केंद्र सरकार / राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए जारी अनुदान/ सब्सिडी के संबंध में सरकारी विभाग /संगठन / एजेन्सियां, बशर्ते संबंधित सरकारी विभाग से बचत बैंक खाते खोलने के लिए प्राधिकार प्रस्तुत किया गया हो।
8. ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एवं बाल विकास
9. पंजीकृत या अपंजीकृत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) जो अपने सदस्यों में बचत की आदतें प्रोत्साहित कर रहे हैं।
10. किसान क्लब-विकास स्वयंसेवक वाहिनी (वीवीवी)
उत्तर: घरेलू / अपतटीय संस्थागत निवेशक, विशेष रूप से बीमा और पेंशन फंड, आईडीएफ द्वारा जारी इकाइयों और बांडों के माध्यम से निवेश कर सकते हैं।
- नहीं अभी तक ऐसा नहीं है।
-
प्राथमिक नीलामी के लिए वेब-आधारित प्लेटफॉर्म पर कार्य हालांकि प्रगति पर है और जब यह पूरा हो जाएगा, निवेशक आईआईबी सहित जी-सेक के प्राथमिक नीलामी में भाग ले सकेंगे।
उत्तर: हाँ।
The complainant is required to give details such as, his/her name and address, the name and address of the branch or office of the NBFC against which the complaint is made, facts giving rise to the complaint supported by documents, if any, the nature and extent of the loss caused to the complainant, the relief sought from the NBFC Ombudsman and a declaration that the complaint is maintainable under Clause 9A of the Scheme.
उत्तर. आवेदन की विस्तृत प्रक्रिया भुगतान प्रणाली के लिए पहुँच मानदंड पर दिनांक 17 जनवरी 2017 के मास्टर निदेश डीपीएसएस.सीओ.ओडी.सं.1846/04.04.009/2016-17 में दी गई है।
सीपीएस की सदस्यता के लिए सभी आवेदन मुख्य महाप्रबंधक, भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (डीपीएसएस), भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), केंद्रीय कार्यालय, 14वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट, मुंबई - 400 001, को प्रस्तुत किए जाएंगे।
आवेदन अनुलग्नकों सहित भुगतान प्रणाली के लिए पहुँच मानदंड पर मास्टर निदेश के परिशिष्ट - 1 "केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली की सदस्यता के लिए आवरण पत्र" में निर्धारित प्रारूप में होना चाहिए।
उत्तर
बीएसबीडीए खोलने के लिए किसी प्रारंभिक जमा की कोई आवश्यकता नहीं है।
-
जिन बैंकों के माध्यम से प्रतिभूतियाँ खरीदी गई वे इन ग्राहकों को अन्य उपभोक्ता सेवा उपलब्ध कराएंगे।
-
निवेशक अन्य सेवाओं जैसे पता में परिवर्तन, शीघ्र मोचन, नामांकन, ग्रहणाधिकार इत्यादि के लिए बैंक से संपर्क कर सकते हैं।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022