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बोली-पूर्व बैठक का कार्यवृत्त - भारतीय रिज़र्व बैंक की शिकायत प्रबंध प्रणाली 2.0 के कार्यान्वयन के लिए विक्रेता के रूप में पैनल में शामिल होने के लिए इच्छा की अभिव्यक्ति (ईओआइ), मुंबई

Published on जनवरी , 21 2026
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बोली-पूर्व बैठक का कार्यवृत्त - भारतीय रिज़र्व बैंक की शिकायत प्रबंध प्रणाली 2.0 के कार्यान्वयन के लिए विक्रेता के रूप में पैनल में शामिल होने के लिए इच्छा की अभिव्यक्ति (ईओआइ), मुंबई

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बोली-पूर्व बैठक का कार्यवृत्त - भारतीय रिज़र्व बैंक की शिकायत प्रबंध प्रणाली 2.0 के कार्यान्वयन के लिए विक्रेता के रूप में पैनल में शामिल होने के लिए इच्छा की अभिव्यक्ति (ईओआइ), मुंबई

सीएमएस 2.0 के विकास के लिए 'बोली-पूर्व बैठक' का आयोजन 19 जनवरी 2026 को अपराह्न 3 बजे सीईपीडी, केंद्रीय कार्यालय, प्रथम तल के सम्मेलन कक्ष में किया गया ।
 
2.  बैठक की अध्यक्षता मुख्य महाप्रबंधक, सीईपीडी, केंद्रीय कार्यालय द्वारा की गई। बैठक में निम्नलिखित संभावित बोलीदाताओं ने भाग लिया:

क्र. संख्या

संभावित बोलीदाताओं के नाम

1.

सेल्सफोर्स

2.

दीपिजा टेलीकॉम

3.

आईबीएम

4.

न्यूजेन सॉफ्टवेयर

5.

डिजिटाइड

6.

सीआरएम नेक्ट

7.

ज़ोहो

8.

टीसीएस

9.

डेलोइट

10.

एचटीसी

11

ईवाई

3. अपने उद्घाटन भाषण में, मुख्य महाप्रबंधक, सीईपीडी, केंका ने संभावित सीएमएस समाधानों को कुछ प्रमुख अपेक्षाओं के संबंध में जानकारी प्रदान की। बैठक के दौरान विचार-विमर्श के एक भाग के रूप में, निम्नलिखित प्रश्न/मुद्दे उठाए गए /चर्चा की गई। इन प्रश्नों/मुद्दों के संबंध में बैंक द्वारा दिए गए उत्तर/स्पष्टीकरण इस प्रकार हैं:

क्र.सं

प्रश्न

बैंक की प्रतिक्रिया

1.

क्या  आरबीआई सीएमएस  2.0 के लिए क्लाउड / नेटिव-क्लाउड / हाइब्रिड डिप्लॉयमेंट मॉडल के लिए तैयार है? यह स्पष्ट किया गया कि सीएमएस 2.0 को ऑन-प्रिमाइसेस डिप्लॉय करना होगा। क्लाउड, होस्टेड प्राइवेट क्लाउड, या हाइब्रिड मॉडल पर विचार नहीं किया जा रहा है।

2.

क्या सीओटीएस उत्पाद के बजाय बिल्ड-फ्रॉम-स्क्रैच समाधान का प्रस्ताव दिया जा सकता है? आरबीआई विशेष रूप से एक वाणिज्यिक ऑफ-द-शेल्फ (सीओटीएस) उत्पाद की तलाश कर रहा है, जो पहले से ही स्थापित है और उत्पादन में सिद्ध है। इस ईओआइ के तहत बिल्ड-फ्रॉम-स्क्रैच समाधानों की परिकल्पना नहीं की गई है।

3.

क्या आरबीआई ओईएम-लेड या सिस्टम इंटीग्रेटर (एसआइ)-लेड एंगेजमेंट की तलाश में है? आरबीआई का ध्यान उत्पाद-केंद्रित है, न कि संगठन-केंद्रित। ओईएम-लेड और एसआइ-लेड दोनों बोलियां स्वीकार्य हैं। हालांकि, बोली में एक पहचाने गए प्रोडक्ट की क्षमता को स्पष्ट रूप से  दिखाना होगा। आरबीआई एक बोलीदाता के साथ एक संविदा करेगा, जो एंड-टू-एंड डिलीवरी के लिए जिम्मेदार होगा।

4.

क्या एक बोलीदाता विभिन्न कार्यात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई उत्पादों का प्रस्ताव दे सकता है?   एक बोली केवल एक उत्पाद पर आधारित होनी चाहिए।  एक ही  बोली में कई उत्पादों की परिकल्पना नहीं की गई है, क्योंकि मूल्यांकन उत्पाद-आधारित है, और अन्यथा तुलनात्मक मूल्यांकन संभव नहीं होगा।

5.

क्या कई बोलीदाता एक ही ओईएम उत्पाद का प्रस्ताव दे सकते हैं? प्रत्येक बोली के लिए वन-टू-वन ओईएम संबंध की अपेक्षा है।  कई बोली लगाने वालों को एक ही उत्पाद प्रस्तुत करने की अनुमति देने की अपेक्षा नहीं है।

6.

यदि एसआइ ने स्वतंत्र रूप से उत्पाद का कार्यान्वयन नहीं किया है, तो क्या ओईएम   संदर्भ स्वीकार किए जाएंगे ? चूंकि मूल्यांकन उत्पाद-केंद्रित है, इसलिए ओईएम कार्यान्वयन संदर्भ स्वीकार्य हैं, भले ही एसआइ ने पहले उस उत्पाद को स्वतंत्र रूप से कार्यान्वित नहीं किया हो।

7.

क्या किसी विशेष ओईएम के साथ भागीदारी करने पर अन्य सीआरएम उत्पादों के साथ एसआइ अनुभव की गणना की जा सकती है? केवल प्रस्तावित उत्पाद से संबंधित अनुभव और संदर्भों पर विचार किया जाएगा।अन्य उत्पादों या प्लेटफार्मों के साथ अनुभव की गणना नहीं की जाएगी।

8.

क्या ओईएम और एसआइ संयुक्त रूप से पात्रता मानदंडों (तकनीकी और वित्तीय) को पूरा कर सकते हैं?
 
हाँ, निम्न शर्तों के अधीन:
  1. उत्पाद क्षमता और संदर्भ ओईएम से आने चाहिए।
  2. संविदा करने वाली संस्था के रूप में वित्तीय मजबूती और गारंटी को एसआई द्वारा सपोर्ट किया जा सकता है।
  3. संविदा  पर हस्ताक्षर करने वाला बोलीदाता सभी दायित्वों के लिए जिम्मेदार होगा।

9.

क्या भारत-विशिष्ट कार्यान्वयन अनिवार्य है? भारत में कार्यान्वयन अनिवार्य नहीं है, लेकिन  स्कोरिंग मैट्रिक्स में इसका  महत्व( वेटेज) अधिक है।  

10.

क्या  एनडीए के कारण संदर्भ पत्र ईओआइ   में बताए गए सटीक फॉर्मेट से अलग हो सकते हैं? हाँ। हालांकि ईओआइ फॉर्मेट के अनुसार संदर्भ पत्रों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन जहाँ एनडीए की रुकावटें हैं, वहाँ आरबीआई प्रत्येक मामले के आधार पर  वैकल्पिक दस्तावेजी साक्ष्यों (जैसे प्रोडक्शन साइन-ऑफ, डिप्लॉयमेंट कन्फर्मेशन, या पीओएस) की जाँच करेगा।

11.

क्या बिना वाणिज्यिक मूल्य बताए ग्राहक रेफरेंस प्रस्तुत किए जा सकते हैं? हाँ।  यदि ग्राहक नीतियों या एनडीए के कारण कुछ वाणिज्यिक विवरणों का खुलासा नहीं किया जा सकता है, तो बोलीदाता उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत  कर सकते हैं। आरबीआई उनका उचित प्रकार से आकलन करेगा।

12.

क्या उपयोगकर्ताओं की संख्या और शिकायत की मात्रा के लिए पात्रता सीमा पर बातचीत की जा सकती है? ईओआइ में निर्दिष्ट पात्रता मानदंड, जिसमें उपयोगकर्ता आधार और शिकायत की मात्रा शामिल है, तय हैं और उनमें कोई ढील नहीं दी जाएगी।

13.

क्या प्रति वर्ष ~15 लाख शिकायतों के आंकड़े अंतिम हैं? आंकड़े उचित हेडरूम के साथ वास्तविक मात्रा को दर्शाते हैं। सिस्टम को इस मात्रा और भविष्य की वृद्धि को संभालने में सक्षम होना चाहिए।

14.

क्या प्रस्तावित सार्वभौमिक शिकायत पोर्टल वर्तमान ईओआइ दायरे का हिस्सा है? सार्वभौमिक शिकायत पोर्टल की परिकल्पना सीएमएस 2.0 के कार्यान्वयन के बाद के चरणों में की गई है। सीएमएस 2.0 को आर्किटेक्चर के हिसाब से इस आवश्यकता के लिए तैयार होना चाहिए।

15.

क्या आंतरिक रूप से बहुभाषी प्रसंस्करण को सहयोग प्रदान करने के लिए सीएमएस 2.0 की आवश्यकता होगी? आंतरिक प्रसंस्करण अंग्रेजी में जारी रहेगा, और जहां तक ​​संभव होगा, दूसरी भाषाओं के इस्तेमाल के लिए भी सहयोग दिया जाएगा।  हालांकि:
  • शिकायतकर्ता कई भारतीय भाषाओं में शिकायत दर्ज करा सकें।
  • शिकायतकर्ता की भाषा में प्रतिक्रिया आवश्यक है।

16.

क्या "ऑन-प्रिमाइसेस",  उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट-आधारित पहुँच (एक्सेस) को सीमित करता है? ऑन-प्रिमाइसेस परिनियोजन से तात्पर्य है कि सिस्टम और डेटा कहाँ होस्ट किए जाते हैं, न कि उपयोगकर्ता इसे कैसे एक्सेस करते हैं।  सिस्टम को रिमोट एक्सेस सहित इंटरनेट पर सुरक्षित रूप से एक्सेस किया जा सकता है, बशर्ते कि डेटा आरबीआई के बुनियादी ढांचे के बाहर न हो।

17.

क्या एनडीए और इंटीग्रिटी पैक्ट का स्टांप पेपर पर होना जरूरी है? संभावित बोलीदाताओं को ईओआइ में दी गई आवश्यकताओं का पालन करना होगा।

ध्यान दें:

  1. यह दस्तावेज (बोली-पूर्व बैठक का कार्यवृत्त) निविदा का भाग होगा।
  2. बोली दस्तावेज के नियम और शर्तें और स्पेसिफिकेशन्स पहले जैसे ही रहेंगे।
  3. चल रही प्रक्रिया के भाग के रूप में, उपर्युक्त स्पष्टीकरण सभी इच्छुक बोलीदाताओं की जानकारी के लिए जारी किए गए हैं। बोलीदाताओं द्वारा ई-मेल के माध्यम से पूछे गए उनके विशिष्ट संदर्भ से संबंधित प्रश्नों का जवाब वन-टू-वन आधार पर दिया जाएगा।

Statistics-Data Releases-Overview

जारी आंकड़े

इस खण्‍ड में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था, बैंकिंग और वित्‍त के विभिन्‍न पहलुओं से संबंधित आँकड़े दिये गये हैं। जहां विद्यमान विगत एक वर्ष के आँकड़ों के रूप में परिभाषित किए गये हैं और वे नीचे दिये गए लिंक पर उपलब्‍ध हैं वहीं अनुसंधानकर्ता इस पृष्‍ठ पर दिये गए भारतीय अर्थव्‍यवथा का डाटाबेस लिंक पर आँकड़ा श्रृंखला भी प्राप्‍त कर सकते हैं।

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: अक्‍तूबर 26, 2023

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