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अरक्षित विदेशी मुद्रा एक्‍सपोजर वाली संस्‍थाओं में एक्‍सपोजर के लिए पूंजी और प्रावधानीकरण अपेक्षाएं – स्‍पष्‍टीकरण

आरबीआई/2013-14/620
बैंपविवि. सं.बीपी. बीसी. 116/21.06.200/2013-14                          

3 जून 2014

अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/  
मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक
(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्‍थानीय क्षेत्र के बैंकों को छोड़कर) 

महोदय,

अरक्षित विदेशी मुद्रा एक्‍सपोजर वाली संस्‍थाओं में एक्‍सपोजर के लिए पूंजी और प्रावधानीकरण अपेक्षाएं – स्‍पष्‍टीकरण

कृपया दिनांक 15 जनवरी 2014 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 85/21.06.200/2013-14 देखें, जिसमें अरक्षित विदेशी मुद्रा एक्‍सपोजर (यूएफसीई) वाली संस्‍थाओं में एक्‍सपोजर के लिए पूंजी और प्रावधानीकरण अपेक्षाओं पर दिशानिर्देशों का ब्‍योरा दिया गया था। इस संबंध में दिशानिर्देशों के कतिपय प्रावधानों के बारे में हमें बैंकों से अनेक प्रश्‍न प्राप्‍त हुए हैं, जिनके बारे में स्‍पष्‍टीकरण नीचे दिया गया हैः  

2. दिशानिर्देशों को लागू करना संस्‍थाओं से आवधिक आधार पर अच्‍छी गुणवत्‍ता वाले आंकड़े प्राप्‍त करने पर निर्भर करेगा। बैंकों ने यह कहा है कि यदि संस्‍थाएं सांविधिक लेखा-परीक्षकों द्वारा लेखा-परीक्षित सूचना बैंकों को प्रस्‍तुत करें, तो यूएफसीई पर प्राप्‍त सूचना की प्रामाणिकता को सुनिश्चित किया जा सकता है। अतएव, यह सूचित किया जाता है कि संस्‍थाओं से तिमाही आधार पर स्‍वयं-प्रमाणन के आधार पर यूएफसीई पर सूचना प्राप्‍त की जाए तथा बेहतर होगा कि इस सूचना को  संबंधित संस्‍था द्वारा आंतरिक रूप से लेखा-परीक्षित किया जाना चाहिए। तथापि, यूएफसीई सूचना को कम-से-कम वार्षिक आधार पर संस्‍था के सांविधिक लेखा-परीक्षक द्वारा लेखा-परीक्षित किया जाना चाहिए और उसकी सत्‍यता को प्रमाणित किया जाना चाहिए। प्रारंभ में विदेश में स्थित शाखाओं/सहायक कंपनियों के एक्सपोजर के मामले में सांविधिक लेखा-परीक्षा की अपेक्षा पर जोर नहीं दिया जाए। 

3. दिशानिर्देशों में कंपनी के अरक्षित विदेशी मुद्रा एक्‍सपोजर के जोखिम का मूल्‍यांकन यूएस डॉलर-भारतीय रुपये की विनिमय दरों की अस्थिरता के दृष्टिकोण से किया गया है। बैंकों के अनुरोध पर यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि यूएसडी के अलावा अन्‍य मुद्राओं के विदेशी मुद्रा एक्‍सपोजर (एफसीई) को मौजूदा बाजार दर का प्रयोग करते हुए यूएसडी में परिवर्तित किया जाए।

4. दिशानिर्देशों में यूएसडी-आईएनआर की वार्षिकीकृत अस्थिरता की गणना के लिए विस्‍तृत चरणबद्ध क्रियाविधि दी गई है। बैंकों का मानना है कि उनके द्वारा परिकलित वार्षिकीकृत अस्थिरता अलग-अलग बैंकों में भिन्‍न-भिन्‍न हो सकती है। पूरे बैंकिंग उद्योग में एक समान वार्षिकीकृत अस्थिरता का प्रयोग करना सुनिश्चित करने के लिए बैंकों ने अनुरोध किया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक भारतीय विदेशी मुद्रा व्‍यापारी संघ (फेडाई) को यह अधिदेश जारी करे कि वे यूएसडी-आईएनआर की वार्षिक अस्थिरता का प्रकाशन करें, जिसे संभावित हानि की गणना के लिए प्रयोग करना होगा। तदनुसार, यह सूचित किया जाता है कि भारतीय रिज़र्व बैंक फेडाई से यह अनुरोध करेगा कि वे दिशानिर्देशों के प्रावधानों का पालन करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक संदर्भ दर के आधार पर यूएसडी-आईएनआर दर की अस्थिरता की गणना करें, तथा उसे यूएफसीई के कारण संभावित हानि के परिमाण की गणना के लिए प्रयोग में लाया जाएगा। तथापि, जब तक फेडाई अपनी वेबसाइट पर इस सूचना को दैनिक आधार पर प्रदर्शित करना प्रारंभ नहीं करता, तब तक बैंक दिशानिर्देशों में निहित प्रावधानों का पालन करते हुए अस्थिरता के आंकड़ों की गणना करना जारी रखें।

5. यूएफसीई दिशानिर्देशों में यह अपेक्षित है कि विनिमय दर उतार-चढ़ाव के कारण संभावित हानि की तुलना सांविधिक लेखा-परीक्षकों द्वारा प्रमाणित अद्यतन तिमाही परिणामों के अनुसार वार्षिक ईबीआईडी (ब्याज और मूल्यह्रास के पूर्व अर्जन) के साथ की जानी चाहिए। बैंकों ने कहा है कि निजी/असूचीबद्ध कंपनियों के मामले में तिमाही आधार पर लेखा-परीक्षित ईबीआईडी उपलब्‍ध नहीं भी हो सकता है। इस संबंध में, यह सूचित किया जाता है कि यदि पिछली तिमाही के लेखा-परीक्षित परिणाम उपलब्‍ध न हों, तो नवीनतम उपलब्‍ध लेखापरीक्षित तिमाही या वार्षिक परिणामों का प्रयोग किया जाना चाहिए। प्रयुक्‍त वार्षिक ईबीआईडी आंकड़ें कम से कम पिछले वित्‍त वर्ष के होने चाहिए। यह भी स्‍पष्‍ट किया जाता है कि दिशानिर्देशों में सीमित लेखा-परीक्षित परिणामों और पूर्ण लेखा-परीक्षित परिणामों के बीच कोई विभेद नहीं किया गया है।   

6. दिशानिर्देशों में मौजूदा अपेक्षाओं के अतिरिक्‍त वृद्धिशील पूंजी और प्रावधानीकरण अपेक्षाओं की शुरुआत की गई है। बैंकों ने एक्‍सपोजर की उस राशि पर स्‍पष्‍टीकरण का अनुरोध किया है, जिस पर वृद्धिशील पूंजी और प्रावधानीकरण की राशि की गणना की जानी है, क्‍योंकि पूंजी और प्रावधानीकरण की गणना के लिए प्रयुक्‍त एक्‍सपोजरों की गणना अलग-अलग तरह से की जाती है। इस संबंध में यह सूचित किया जाता है कि  यूएफसीई के लिए वृद्धिशील प्रावधानीकरण की गणना उस एक्‍सपोजर राशि पर आधारित होनी चाहिए, जो मानक आस्ति प्रावधानीकरण के लिए प्रयुक्‍त हुई है तथा यूएफसीई के लिए वृद्धिशील पूंजी अपेक्षाएं उस एक्‍सपोजर राशि पर आधारित होनी चाहिए, जिसका प्रयोग ऋण जोखिम पूंजी अपेक्षाओं की गणना के लिए किया गया है।

7. ये दिशानिर्देश उन सभी संस्‍थाओं पर लागू हैं जिन पर बैंक ने क्रेडिट एक्‍सपोजर लिया है। बैंकों ने यह स्‍पष्‍ट करने का अनुरोध किया है कि क्‍या ये दिशानिर्देश अंतर-बैंक एक्‍सपोजरों पर भी लागू हैं। इस संबंध में यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि यूएफसीई दिशानिर्देशों की परिधि में अंतर-बैंक एक्‍सपोजरों को शामिल न किया जाए।

8. ये दिशानिर्देश संस्‍था के आकार पर ध्‍यान न देते हुए सभी संस्‍थाओं पर लागू होंगे। बैंकों ने बताया है कि छोटी संस्‍थाओं के लिए वृद्धिशील पूंजी और प्रावधानीकरण की तिमाही आधार पर गणना करना परिचालन की दृष्टि से कठिन होगा। इस संबंध में, ऐसी छोटी संस्‍थाओं के प्रति एक्‍सपोजर, जिनके पास अरक्षित विदेशी मुद्रा एक्‍सपोजर हैं, के संबंध में बैंकों के पास मानकीकृत पद्धति का पालन करने का विकल्‍प हो सकता है, जिसके अंतर्गत विद्यमान मानक आस्ति प्रावधानीकरण के अतिरिक्‍त 10 बीपीएस वृद्धिशील प्रावधानीकरण करना अपेक्षित है। छोटी संस्‍थाओं के लिए मानकीकृत पद्धति का पालन करने वाले बैंकों को इन संस्‍थाओं से यूएफसीई डेटा लेने की आवश्यकता नहीं होगी और इसलिए ऐसी छोटी संस्‍थाओं के लिए ईबीआईडी के प्रतिशत के रूप में संभावित हानि के आधार पर वृद्धिशील पूंजी और प्रावधानीकरण की गणना किया जाना अपेक्षित नहीं होगा। आगे यह भी स्‍पष्‍ट किया जाता है कि छोटी संस्‍थाएं ऐसी संस्‍थाएं हैं, जिनमें बैंकिंग प्रणाली का कुल एक्‍सपोजर 25 करोड़ रुपये या उससे कम है।

9. वर्तमान में मानक आस्ति प्रावधान कुछ सीमाओं के अधीन टियर 2 पूंजी में शामिल किए जाने हेतु पात्र हैं। बैंकों ने यह स्‍पष्‍ट करने का अनुरोध किया है कि क्‍या दिशानिर्देशों का पालन करते हुए रखे गए वृद्धिशील प्रावधानीकरण भी वर्तमान अपेक्षाओं के अनुरूप टियर 2 पूंजी में शामिल किए जाने हेतु पात्र होंगे। इस संबंध में, यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि अपेक्षित वृद्धिशील प्रावधान वर्तमान मानक आस्ति प्रावधानीकरण अपेक्षा के अतिरिक्‍त हैं। अतएव, इसे सामान्‍य प्रावधानों के लिए लागू विद्यमान ट्रीटमेंट के समान ही प्रकटीकरण और टियर 2 में शामिल करने हेतु सामान्‍य प्रावधान के रूप में माना जाए। वर्तमान में, ऋण जोखिम के लिए मानकीकृत पद्धति का पालन करने वाले बैंकों के लिए सामान्‍य प्रावधान ऋण जोखिम भारित आस्तियों के अधिकतम 1.25% तक टियर 2 पूंजी के रूप में स्‍वीकार किए जाते हैं। आंतरिक रेटिंग आधारित पद्धति के अंतर्गत जहां कुल प्रत्‍याशित हानि की राशि कुल प्रावधानों से कम हो, बैंक इस अंतर को आंतरिक रेटिंग पर आधारित पद्धति के अंतर्गत गणना किए गए ऋण जोखिम भारित आस्तियों के अधिकतम 0.6% तक टियर 2 पूंजी के रूप में मान्‍यता दे सकते हैं।

10. वृद्धिशील पूंजी और प्रावधानीकरण की गणना संस्‍थाओं से संग्रह किए गए विस्‍तृत डेटा पर निर्भर करेगी। बैंकों ने कहा है कि उन सभी संस्‍थाओं के संबंध में समयबद्ध रूप से अपेक्षित डेटा प्राप्‍त करना संभव नहीं होगा, जिन पर बैंक का ऋण एक्‍सपोजर है। बैंकों ने इस पर स्‍पष्‍टीकरण का अनुरोध किया है कि जो संस्‍थाएं अपेक्षित डेटा उपलब्‍ध कराने में असमर्थ हों, उनके प्रति एक्‍सपोजर के संबंध में क्‍या कार्रवाई करनी होगी। इस संबंध में यह सूचित किया जाता है कि ऐसे मामलों में, जहां बैंक यूएफसीई की गणना के लिए पर्याप्‍त डेटा पाने में असमर्थ है, वहां बैंक एक सतर्क दृष्टिकोण अपना सकते हैं तथा एक्‍सपोजर को अंतिम खाने में रख सकते हैं जिसमें वृद्धिशील प्रावधानीकरण 80 बीपीएस तथा जोखिम भार में 25 प्रतिशत वृद्धि अपेक्षित है। बैंकों के लिए यह उचित होगा कि उधारकर्ता के लिए अपनी उधार दर निश्चित करते समय उधारकर्ता द्वारा यूएफसीई दिशानिर्देशों के अनुपालनको ध्यान में रखे, क्‍योंकि इससे उसकी सूचना/डेटा की गुणवत्‍ता और समयबद्ध प्रस्तुतीकरण में सुधार होगा। 

11. यूएफसीई दिशानिर्देश 01 अप्रैल 2014 से प्रभावी हो गए हैं। कुछ बैंकों ने यह कहा है कि चूंकि अप्रैल-जून तिमाही के लिए पहली बार अपेक्षित प्रावधानों की गणना की जाएगी, इसलिए प्रावधानीकरण का पूरा भार एक तिमाही की कमाई पर पड़ेगा। इस संबंध में यह सूचित किया जाता है कि यूएफसीई दिशानिर्देशों के आधार पर अप्रैल-जून 2014 तिमाही के लिए लागू अतिरिक्‍त प्रावधानीकरण अपेक्षा को वित्‍त वर्ष 2014-15 के दौरान समान रूप से वितरित किया जाए। तथापि, पूंजी अपेक्षाओं के लिए ऐसी कोई छूट नहीं दी जाएगी।  

भवदीय,

(राजेश वर्मा)
प्रभारी मुख्‍य महाप्रबंधक

 

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