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आरबीआई/2009-10/273
डीपीएसएस.सीओ.सं.1357/02.23.02/2009-10
24 दिसंबर, 2009
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक / मुख्य कार्यकारी अधिकारी
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी)/शहरी सहकारी बैंक/राज्य सहकारी बैंक/
जिला केंद्रीय सहकारी बैंक सहित सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक
महोदया / प्रिय महोदय
भारत में मोबाइल बैंकिंग लेनदेन - बैंकों के लिए परिचालन हेतु दिशा-निर्देश
कृपया शीर्षांकित विषय पर हमारे दिनांक 08 अक्टूबर 2008 के परिपत्र सं. आरबीआई/2008-09/208, डीपीएसएस. सीओ. सं.619/02.23.02/2008-09 के साथ संलग्न दिशा-निर्देशों का संदर्भ लें I
2. मोबाइल बैंकिंग लेनदेन को सुकर बनाने वाले बैंकों से प्राप्त अनुरोधों के आधार पर, दिशा-निर्देशों को निम्नानुसार संशोधित किया गया है:
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लेन-देन की सीमा: उपर्युक्त दिशा-निर्देशों के पैरा 8.1 के प्रावधानों में संशोधन करते हुए बैंकों को अब अपने ग्राहकों को, निधियों के अंतरण और वस्तुओं/सेवाओं की खरीद से जुड़े लेनदेन, दोनों के लिए प्रति ग्राहक ₹50,000/- की दैनिक सीमा के साथ यह सेवा प्रदान करने की अनुमति दी गई है है। वर्तमान में, ऐसे लेन-देन के लिए क्रमशः ₹5000/- और ₹10000/- की अलग-अलग सीमा है I
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प्रौद्योगिकी और सुरक्षा मानक: बैंकों द्वारा संपूर्ण कूटलेखन (एन्क्रिप्शन) के बिना ₹1000/- तक के लेनदेन की सुविधा दी जा सकती है। ऐसे लेन-देन में शामिल जोखिम संबंधी पहलुओं को बैंकों द्वारा पर्याप्त सुरक्षा उपायों के माध्यम से हल किया जा सकता है।
3. नकद संवितरण के लिए निधियों का विप्रेषण:
नकदी के विप्रेषण हेतु मोबाइल फोन का प्रयोग सुकर बनाने के लिए, बैंकों को निधि अंतरण सेवाएं प्रदान करने की अनुमति दी गई है, जो प्राप्तकर्ताओं को नकद संवितरण के लिए अपने ग्राहकों के खातों से निधियों के अंतरण प्रदान की सुविधा प्रदान करते हैं। प्राप्तकर्ताओं को धन के संवितरण की ऐसी सेवाएं एटीएम या बैंक द्वारा बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (व्यवसाय प्रतिनिधि) के रूप में नियुक्त किसी एजेंट (टों) के माध्यम से दी जाती हैं। ऐसी निधि अंतरण सेवा बैंकों द्वारा निम्नलिखित शर्तों के अधीन प्रदान की जाएगी:-
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इस तरह के अंतरण का अधिकतम मूल्य रुपये ₹5000/- प्रति लेन-देन होगा।
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बैंक इस तरह के लेन-देन के वेग (वेलोसिटी) पर उचित सीमा लगा सकते हैं, जो प्रति ग्राहक अधिकतम ₹25,000/- प्रति माह हो सकती है।
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प्राप्तकर्ता की पहचान के बाद ही एजेंट/एटीएम में निधियों के संवितरण की अनुमति दी जाएगी। इस संबंध में, समय-समय पर यथासंशोधित धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अधीन भारत सरकार द्वारा जारी 12 नवंबर 2009 की अधिसूचना के प्रावधानों की ओर बैंकों का ध्यान आकृष्ट किया जाता है।
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बैंक ऐसी सेवाओं के लिए प्राधिकृत एजेंट के रूप में नियुक्त करने से पहले व्यक्तियों के बारे में समुचित सावधानी बरतें।
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बैंक अपने एजेंटों की भूल-चूक के सभी कार्यों के लिए मालिक (प्रिंसिपल) के रूप में जिम्मेदार होंगे।
4. यह निदेश भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, (2007 का अधिनियम 51) की धारा 18 के तहत जारी किया गया है।
भवदीय
(जी. पद्मनाभन)
मुख्य महाप्रबंधक
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